पटौदी खानदान की संपत्ति को लेकर शर्मिला टैगोर का चौंकाने वाला खुलासा, कहा- 'मैंने जो खरीदा अपने नाम पर खरीदा'
Sharmila Tagore: हिंदी सिनेमा की लिजेंड्री एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर इस समय सुर्खियों में छाई हुई हैं। उनका एक इंटरव्यू सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वह नवाब पटौदी की संपत्ति और वसीयत को लेकर कई राज खोलती नजर आई हैं। उन्होंने अपने पति मंसूर अली खान पटौदी के पैसों को लेकर भी कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
शर्मिला टैगोर ने अपने करियर में खूब पैसे कमाए हैं
शर्मिला टैगोर न सिर्फ एक अच्छी अभिनेत्री हैं बल्कि लोग आज भी उनकी खूबसूरती के दीवाने हैं। उन्होंने 60 के दशक में फिल्मी दुनिया में अपना कदम रखा था। बेहद कम उम्र से ही शर्मिला टैगोर ने अपनी एक अलग पहचान बना ली थी। करियर में उन्होंने न सिर्फ खूब पैसे कमाए, बल्कि नाम भी खूब कमाया।

पति मंसूर अली खान पटौदी की संपत्ति
आज के समय में भी शर्मिला टैगोर की तगड़ी फैन फॉलोइंग हैं और लोग उन्हें उनके काम के लिए प्यार भी करते हैं। इस वक्त वह अपने एक इंटरव्यू को लेकर लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं, जिसमें उन्होंने अपने फिल्मी करियर से लेकर प्रॉपर्टी तक की बात कही है। इसके अलावा उन्होंने अपने दिवंगत पति मंसूर अली खान पटौदी की संपत्ति और वसीयत पर भी खुलकर बात की है।
'मेरी प्रॉपर्टी या संपत्ति में पति का हक नहीं था'
शर्मिला टैगोर ने लंबे समय बाद फिल्म 'गुलमौहर' से एक्टिंग में कमबैक किया था। ये फिल्म साल 2023 में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई थी। हाल ही में शर्मिला टैगौर ने 'पैसा वैसा विद अनुपम गुप्ता' पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान बताया कि उनकी किसी भी प्रॉपर्टी या संपत्ति में पति का हक नहीं था। वह अपनी चीजें खुद अपने पैसों से खरीदती थीं।
'मैंने जो खरीदा अपने नाम पर खरीदा'
शर्मिला टैगोर ने इंटरव्यू में बताया- इस्लाम में वसीयत नहीं बना सकते हैं, पर मेरे और पति के पास काफी संपत्ति और जमीन थी, जिसकी वजह से ऐसा करना पड़ा था। शर्मिला टैगोर ने आगे बताया- मैंने जो कुछ भी खरीदा, मेरी संपत्ति जैसे घर, कार या कोई भी चीज या ज्वैलरी, वो सब अपने नाम पर खरीदी। इसमें मेरे पति का कोई हिस्सा नहीं था। टाइगर मंसूर अली खान पटौदी के पास जो कुछ था, वह उनके नाम पर था। जाहिर है कि उन्होंने एक वसीयत भी बनाई थी।
'इस्लाम में वसीयत की इजाजत नहीं'
शर्मिला टैगोर ने दावा किया कि इस्लाम में किसी को वसीयत बनाने की इजाजत नहीं है, इसलिए उन्हें इस बारे में काफी सोचना पड़ा था। उन्होंने कहा- इस्लाम में वसीयत बनाने की अनुमति नहीं दी गई है, इसलिए आपको इसके बारे में सोचना पड़ता है। आप इसे उन लोगों को दे सकते हैं, जो आपके वारिस नहीं हैं। लेकिन अपने उत्तराधिकारियों या वारिस को नहीं दे सकते।
'तीनों बच्चों में समना रूप से बंटेगा'
शर्मिला टैगोर ने इंटरव्यू में कहा- हमारे पास बहुत सारी जमीन है इसलिए उसकी भी देखभाल करनी थी, उसे भी देखना था। ये सुनिश्चित करना था कि ये किसके नाम हो। मेरे 3 बच्चे हैं, तो इस बात का ध्यान रखा कि तीनों को सब कुछ सही तरीके से मिले। सबकुछ तीनों में समान रूप से बंटना चाहिए।
'कोविड के बाद से मैंने संपत्ति की देखभाल शुरू की'
जानकारी के अनुसार मंसूर अली खान पटौदी और शर्मिला टैगोर, दो बेटियों- सबा, सोहा और बेटे सैफ अली खान के पैरेंट्स हैं। शर्मिला टैगोर ने बताया कि उन्होंने 16 साल की उम्र से ही काम करना शुरू कर दिया था, लेकिन कभी भी अपनी संपत्ति या पैसों को मैनेज करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई। हालांकि कोविड महामारी के दौरान उन्होंने चीजों को अपने हाथ में लिया और अपनी संपत्ति को संभालना भी शुरू किया।












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