Shakuni mama: गुफी पेंटल चले गए, लेकिन हमेशा जिंदा रहेंगे महाभारत में 'शकुनि' के ये 7 डायलॉग
Shakuni mama best dialogues: महाभारत में शकुनि के किरदार को अमर करने वाले अभिनेता गुफी पेंटल अब नहीं रहे हैं। पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे गुफी पेंटल का निधन हो गया है।

Shakuni mama's dialogues in Mahabharat: हाथ में चौसर के पासे, लंगड़ाती चाल और चेहरे पर साजिश रचते गहरे हाव-भाव...महाभारत में ये पहचान थी मामा शकुनि की, जिसका किरदार निभाने वाले अभिनेता गुफी पेंटल ने सोमवार को दुनिया को अलविदा कह दिया।
बीआर फिल्म्स में बतौर कास्टिंग डायरेक्टर काम करने वाले गुफी पेंटल को अंदाजा भी नहीं था कि महाभारत जैसे बड़े सीरियल में शकुनि जैसा अहम रोल उन्हें मिल जाएगा, लेकिन जब मिल गया, तो गुफी पेंटल ने इस किरदार में खुद को झोंक दिया।
शकुनि की चतुराई और गुफी पेंटल की एक्टिंग के मिक्सचर ने जो किरदार बनाया, कोई और अभिनेता शायद ही उस रोल को इतने बेजोड़ तरीके से निभा सकता था। महाभारत में शकुनि के कुछ ऐसे डायलॉग भी थे, जिन्हें भूल पाना बहुत मुश्किल है। आइए नजर डालते हैं शकुनि के कुछ ऐसे ही डायलॉग पर...
1:- जहां हार-जीत का परिणाम निकलता हो पिताश्री, वो केवल खेल नहीं होता बल्कि रणभूमि होता है, क्योंकि ना तो कोई हारने के लिए चौसर खेलता है पिता महाराज और ना ही हारने के लिए युद्ध लड़ता है। (गांधार में अपने पिता से चौसर में हारने के बाद शकुनि)
2:- हस्तिनापुर के भविष्य की रक्षा तो भीष्म जी कर ही रहे हैं, लेकिन अपने पुत्र के भविष्य की चिंता तो आपको ही करनी होगी ना महाराज धृतराष्ट्र, क्योंकि दुर्योंधन तो अभी बच्चा है। (पांड्व पुत्रों को राजमहल में स्थान देने पर धृतराष्ट्र को भड़काते हुए शकुनि)
3:- राजनीति का पहला नियम ये है कि राजा के मन की अवस्था का तो उसके अतिरिक्त किसी और को ज्ञान ही नहीं होना चाहिए और तुम्हारा मुखमंडल तो एक भोजपत्र की भांति कोई भी पढ़ सकता है दुर्योधन। (पांड्वों पर गुस्साए दुर्योधन को समझाते हुए शकुनि)
4:- ये राजगद्दी भी अजीब वस्तु है महाराज, बड़े-बड़े राष्ट्रभक्तों और पितृभक्तों को डिगा देती है और कभी-कभार प्रश्न ना करना भी राजनीति है, आप तो जानते हैं कि शकुनि सदैव आपके और आपके परिवार के हित की बात करता है जीजा महाराज। (युधिष्ठर के खिलाफ धृतराष्ट्र को भड़काते हुए शकुनि)
5:- तुम्हारा ये मित्र कर्ण है बड़ा मूर्ख, अरे मैं तो इसे इसलिए झेलता हूं पुत्र कि तुम्हारे प्रति इसकी निष्ठा पर मुझे अटल विश्वास है। हां, राजनीति में ऐसे मूर्खों का अपना ही एक महत्व और स्थान होता है। जब चाहो इन्हें बाण बनाकर किसी की और चला दो या फिर चौसर की गोटी बनाकर पिटवा डालो। (चौसर खेलने से रोकने पर कर्ण पर भड़कते हुए शकुनि)
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6:- अपने पिता को नेत्रहीन कहने से कुछ नहीं होगा पुत्र, वे तो मूर्ख हैं, उन्हें मूर्ख ही कहो प्रिय दुशासन। सारे मानव इतिहास में श्री श्री धृतराष्ट्र जैसा पिता कदाचित ही कोई निकले, जो अपना जीवन अपने पुत्र के अधिकारों को किसी और के पुत्र को देने में बिता रहा है। (चौसर में जीत के बाद धृतराष्ट्र के फैसले पर भड़कते हुए शकुनि)
7:- अरे मैं तो युद्ध को इसलिए टाल रहा था भांजे, कि पांड्वों को हराने का केवल एक उपाय है, परंतु तुम वो उपाय नहीं करोगे। जीजाश्री ने ठीक ही कहा था कि पराजय तुम्हारे दुर्भाग्य में है और ये दुर्भाग्य तुम्हें स्वीकार करना ही पड़ेगा। (महाभारत के युद्ध से ठीक पहले दुर्योधन पर भड़कते हुए शकुनि)












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