Raid 2 Movie Review: ‘कोष मूलो दंड’ का मतलब समझाती 'रेड 2', अजय देवगन ने फ्रैंचाइज को दिलाए अव्वल नंबर
मूवी रिव्यू- रेड 2
कलाकार- अजय देवगन, वाणी कपूर, सुप्रिया पाठक, रितेश देशमुख, रजत कपूर और अमित सियाल
डायरेक्टर- राज कुमार गुप्ता
रेटिंग- 3.5 स्टार्स
Raid 2 Movie Review: 1 मई को मजदूर दिवस होता है, देश के कुछ राज्यों में इसकी छुट्टी होती है। इसी दिन फिल्म रिलीज हुई है, रेड 2। 2018 में आई रेड का सीक्वल। प्रेस शो हुआ लेकिन नहीं जा पाया। इसलिए अपने कर्तव्य का निर्वाहन करते हुए, फिल्म देखने सिनेमाघर में सुबह सुबह जा धमका। अमूनन सुबह जब भी फिल्म देखने जाओ तो चेहरे में नींद की एक परछाई रहती है। फल स्वरूप उबासी आती है। आज भी कुछ ऐसा ही रहा। लेकिन इससे उबासी आज गायब हुई। वजह अजय देवगन की फिल्म रेड 2 थी। कोविड के बाद फिल्म देखते समय उबासी आना या मोबाइल चलाना, फिल्म की अच्छाई या बुराई का पैमाना हो गया है। रेड 2 की पहली सफलता ये है कि देखते वक्त उबासी नहीं आती है।

कहानी 1989 में राजस्थान में खुलती है। जहां एक रंगीन पार्टी चल रही है। जिसमें शराब भी है और शबाब भी। इसी दौरान सरकारी एंबेसडर कार और जिप्सी का काफिला दिखता है। एक आदमी बदवास भागता है और बताता है कि रेड पड़ने वाली है। अगुवाई करते हैं, ईमानदार अफसर अमय पटनायक। यहां रेड पड़ती और फिर अमय का तबादला होता है। लेकिन इस बार इसमें एक कैच है। अमय का ट्रांसफर रेड की वजह से नहीं, बल्कि रिश्वत मांगने की वजह से होता है। 74 रेड मारने वाला ईमानदार अफसर रिश्वत मांग लेता है। चौंकना लाजमी है। यहीं से शुरू होता है फिल्म रेड की महाभारत। जो इतनी मजेदार है कि देखने पर आपको एक आनंद की अनुभूति होगी।
अजय देवगन एक टिपिकल सरकारी अफसर बने हैं। पिछले फिल्म से इस बार वो और निखरे हैं। उनकी परफॉर्मेंस भी काफी सही है। एक सरकारी अफसर और जिसकी छवि ईमानदार की हो, उसमें अजय देवगन एक दम चुस्त और दुरुस्त हैं। तकरीबन आधा दर्जन फ्लॉप फिल्मों के बाद अजय ने फिर एक नई राह पकड़ी है। यहां वो अव्वल नंबर से पास होते नजर आते हैं। वाणी कपूर ने बीवी का किरदार निभाया है। जिसमें वो औसत ही लगी हैं। हालांकि कोशिश उन्होंने पूरी की है, लेकिन हो नहीं सकी। फिल्म के विलन रितेश देशमुख हैं। आजकल के नए तरीके के विलन की राह को और विकसित करते नजर आते हैं। उनका काम फिल्म को बेहतरीन पेस में लेकर चलता है। उनकी मां बनी सुप्रिया पाठक ने क्लाइमैक्स में जान डाल दी है। फिल्म में ब्रिजेंद्र काला, यशपाल शर्मा, रजत कपूर और अमित सियाल भी हैं। अमित ने अपने तुरंत रंग बदलने के अंदाज और उत्तर प्रदेश की टोन को इतने बारीकी से दिखाया है कि आपको हंसी भी कई जगह आती है। बाकी एक्टर्स ने अपने हिस्से से फिल्म में चार चांद लगाए हैं।
फिल्म को रितेश शाह ने लिखा है। जिन्हें डायरेक्टर राज कुमार गुप्ता, जयदीप यादव और करण व्यास का साथ मिला है। इतने लोगों ने एक बेहतरीन और कसी हुई कहानी को जन्म दिया है। जिसे देख आपको एक अलग मजा आता है। फिल्म के डायलॉग भी बेहद चुटीले हैं। जो कहानी के साथ तालमेल बैठा कर चलते हैं। राज कुमार गुप्ता ने एक बार फिर बॉउंड्री पार गेंद पहुंचाने का काम किया है। उन्होंने फिल्म के हर एक डिपार्टमेंट में गहराई से काम किया है। किरदारों के बात करें तो अमय पटनायक के राजस्थान के लुक को देख समझ आता है कि वो कहां हैं। किस परिस्थिति में रह रह है। राज कुमार गुप्ता को डायरेक्शन में भी पूरे नंबर मिलते हैं। सुधीर चौधरी की सिनेमैटोग्राफी भी अच्छी है। लेकिन संदीप फ्रांसिस की चुस्त एडिटिंग ने कमाल कर दिया है। हालांकि फिल्म के गाने औसत हैं, जो नहीं भी होते तो कोई गम नहीं होता।
फिल्म के बारे में मैंने आपको पहले ही बताया है कि ये उबासी फ्री है। इसे देखने में आप पैसे खर्च करेंगे तो गम नहीं होगा। यही फिल्म रेड 2 की असली जीत है। इस वीकेंड में अगर आप सिनेमाघर जाकर कुछ अच्छा देखने चाहते हैं तो ये परफेक्ट वॉच बन सकती है। मेरी बात यहीं, तक आप भी फिल्म देखिए और अपनी राय बनाइए। फिल्म देखने जाएं और अगर समय मिलें कमेंट बॉक्स में आकर अपनी प्रतिक्रिया जरूर दें।












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