Neelam Giri Bhojpuri Song: नीलम गिरी के नए गाने ने मचाई तबाही, 'सूट में लागब ऐश्वर्या' से बढ़ा इंटरनेट का पारा
Neelam Giri Bhojpuri Song: भोजपुरी एक्ट्रेस नीलम गिरी टीवी के फेमस रिएलिटी शो 'बिग बॉस 19' से बाहर आने के बाद लगातार फैंस को नए-नए सरप्राइज दे रही हैं। हाल ही में उनकी आने वाली फिल्म 'मनमोहनी' का ट्रेलर रिलीज हुआ था जिसने दर्शकों को इमोशनल कर दिया।
नीलम गिरी का नया गाना रिलीज
इस बीच नीलम गिरी ने अपने फैंस के लिए एक और खास तोहफा देते हुए नया सॉन्ग 'सूट में लागब ऐश्वर्या' रिलीज कर दिया है। शिल्पी राज ने इस गाने को अपनी दमदार आवाज से सजाया है। इस गाने में नीलम गिरि के साथ प्रवेश लाल यादव नजर आ रहे हैं।

सोशल मीडिया पर क्यों छा गया है 'सूट में लागब ऐश्वर्या'?
-गाना रिलीज होते ही नीलम गिरि और प्रवेश लाल यादव की ऑन-स्क्रीन जोड़ी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। वीडियो में एक हल्की-फुल्की लेकिन दिलचस्प बातचीत देखने को मिलती है। प्रवेश लाल यादव जो नीलम के ऑन-स्क्रीन पति बने हैं, उनसे पूछते हैं कि उन्होंने उनके लिए बाली और झुमका तो खरीद दिया है, अब और क्या चाहिए।
-इस पर नीलम गिरि शरारती अंदाज में जवाब देती हैं कि उनकी साड़ी बार-बार सरक जाती है इसलिए वह उन्हें काला सूट (करिया सूट) लाकर दें, जिसमें वह ऐश्वर्या राय जैसी लगेंगी।
-फैंस इस चुलबुले कॉन्सेप्ट और दोनों की प्यारी जुगलबंदी को खूब पसंद कर रहे हैं। वीडियो का कमेंट सेक्शन हार्ट और फायर इमोजी से भरा पड़ा है। गाने का फिल्मांकन, सेटअप और रंगीन प्रस्तुति इसे देखने लायक बनाती है।
गाने की टीम-
कलाकार: प्रवेश लाल यादव और नीलम गिरी
निर्माता: प्रवेश लाल यादव
स्वर: प्रवेश लाल यादव और शिल्पी राज
संगीत: प्रवेश लाल यादव
गीत: मुकेश मिश्रा
डायरेक्टर: गोल्डी जैसवाल
कोरियोग्राफर: सनी सोनकर
DOP: राजन वर्मा
एडिटिंग: प्रदीप यादव
DI: युग मोशन पिक्चर
म्यूजिक ऑन: प्रवेश लाल ऑफिसियल
फिल्म 'मनमोहनी' की भावुक कहानी
-नीलम गिरी जल्द ही फिल्म 'मनमोहनी' में नजर आएंगी। इस फिल्म को रवींद्र सिंह ने प्रोड्यूस किया है और इसका निर्देशन राज कुमार ने किया है। कहानी सभा वर्मा ने लिखी है, संगीत रितेश ठाकुर ने दिया है और एडिटिंग अजय सिंह ने की है। फिल्म के गानों के बोल सोनू श्रीवास्तव ने लिखे हैं।
-फिल्म की कहानी मनमोहनी नाम की एक लड़की के जीवन पर आधारित है जो अपने पिता मुरली प्रसाद, एक साधारण मूर्तिकार के साथ रहती है। कहानी तब मोड़ लेती है जब कुछ लोग उनकी दिवंगत पत्नी की याद में बनाई गई मूर्ति को मोटी रकम में खरीदना चाहते हैं लेकिन पिता उसे बेचने से मना कर देते हैं।
-इसके बाद अचानक उनकी तबीयत बिगड़ जाती है और इलाज के लिए पैसे की कमी होने पर मनमोहनी मजबूरी में अपनी इज्जत तक कुर्बान करने का फैसला करती है। हालांकि तब तक बहुत देर हो चुकी होती है और उनके पिता का निधन हो जाता है। ये फिल्म समाज की कड़वी सच्चाइयों, मजबूरियों और एक बेटी के दर्दभरे संघर्ष को उजागर करती है।












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