चींटियों ने इस फेमस एक्ट्रेस का नोंच डाला बदन, जवानी के प्यार में हुई ऐसी हालत, फिर लिखा गया- मौत मुबारक हो!
Meena Kumari: हिंदी सिनेमा की चमकती रोशनी के पीछे कई बार ऐसे साए छिपे होते हैं, जिनका दर्द परदे तक नहीं पहुंच पाता। मीना कुमारी उन्हीं विरल सितारों में से थीं, जिनकी आंखों में दिखने वाला दर्द सिर्फ अभिनय नहीं, उनकी अपनी जिंदगी की सच्चाई था।
मीना कुमारी का इश्क अधूरा और तकलीफों से भरा रहा
वैलेंटाइन वीक (Valentine Week) में जब हर तरफ प्यार, इकरार और रिश्तों की मिठास की बातें होती हैं, तब हिंदी सिनेमा की एक ऐसी शख्सियत याद आती है, जिसकी मोहब्बत की कहानी खुशियों से ज्यादा दर्द से भरी रही। मीना कुमारी, जिन्हें दुनिया 'ट्रेजडी क्वीन' के नाम से जानती है, ने पर्दे पर प्रेम की अनगिनत दास्तानें जीं लेकिन असल जिंदगी में उनका अपना इश्क अधूरा और तकलीफों से भरा रहा।

मीना कुमारी की आंखों में एक अलग सा दर्द था
-मीना कुमारी की आंखों में दिखने वाला दर्द महज अभिनय नहीं था बल्कि दिल में छिपी उन अधूरी ख्वाहिशों का अक्स था, जिन्हें मोहब्बत कभी मुकम्मल नहीं कर सकी। प्यार के इस मौसम में मीना कुमारी की कहानी याद दिलाती है कि हर प्रेम कहानी का अंजाम खुशहाल नहीं होता, कुछ दास्तानें दर्द के साथ भी अमर हो जाती हैं।
-मीना कुमारी ने अपनी अदाकारी, नजाकत और दर्दभरी अभिव्यक्ति के कारण ही उन्हें ट्रेजडी क्वीन कहा जाता था। विडंबना ये रही कि परदे पर निभाए उनके किरदारों की तरह उनकी निजी जिंदगी भी गहरे उतार-चढ़ाव से भरी रही थी।
मीना कुमारी का बदन चींटियों ने नोंच डाला था
-कहा जाता है कि मीना कुमारी के जन्म के समय उनके परिवार की आर्थिक हालत बेहद कमजोर थी। हालात ऐसे थे कि इलाज का खर्च उठाना भी मुश्किल था। जब मीना कुमारी का जन्म हुआ तो उनके माता-पिता के पास डॉक्टर के फीस चुकाने के पैसे नहीं थे और इसलिए वह बेटी को डॉक्टर के पास ही छोड़ गए थे।
-बाद में पैसे लेकर जब मीना कुमारी के पिता डॉक्टर के पास वापस आए तो उनकी बेटी के शरीर पर चींटियां रेंग रही थीं, जिसे देखकर वह हैरान हो गए थे। मीना कुमारी के शुरुआती जीवन की ये घटना उनके संघर्षपूर्ण बचपन की झलक देती है। पढ़ाई और साहित्य से उन्हें विशेष लगाव था और बहुत कम लोग जानते हैं कि वह एक संवेदनशील शायरा भी थीं।
मीना कुमारी का प्यार, शादी और बढ़ती दूरियां
-फिल्मों में प्रेम कहानियां निभाने वाली मीना कुमारी की निजी मोहब्बत मुकम्मल न हो सकी। उन्होंने निर्देशक कमाल अमरोही से साल 1952 में निकाह किया था, जो पहले से शादीशुदा थे। ये रिश्ता लंबे समय तक लोगों के सामने नहीं आया था।
-समय के साथ मीना कुमारी और कमाल अमरोही के रिश्ते में खटास आई और शादी के करीब 12 साल बाद यानी 1964 में दोनों अलग हो गए थे। इस रिश्ते को लेकर कई तरह के दावे सामने आए थे। कई तरह की चर्चाएं भी हुई थीं। इन चर्चाओं में शक और मानसिक-शारीरिक तकलीफों की बातें भी शामिल थीं।

मीना कुमारी की बीमारी और अकेलापन
-कमाल अमरोही से अलग होने के 4 साल बाद मीना कुमारी लीवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझने लगी थीं। इलाज के दौरान हालात और कठिन होते गए। कहा जाता है कि बढ़ते खर्च और बिगड़ती सेहत ने उन्हें और अकेला कर दिया था।
-कुछ रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया है कि कुछ समय तक तो मीना कुमारी के पूर्व पति ने इलाज में उनकी मदद की थी लेकिन कहा जाता है कि एक्ट्रेस के अस्पताल का खर्च जब हद से ज्यादा बढ़ गया था तो कमाल अमरोही ने भी उनसे दूरी बना ली थी।
आखिरी विदाई और नरगिस दत्त का खत
-31 मार्च 1972 को मीना कुमारी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था। उनके अंतिम संस्कार का खर्च उनकी करीबी दोस्त एक्ट्रेस नरगिस दत्त ने उठाया था। बाद में नरगिस दत्त ने एक भावुक खत लिखा था जिसमें उन्होंने मीना कुमारी के दर्द भरे जीवन को याद करते हुए कहा था कि ये दुनिया उनके जैसे लोगों के लिए नहीं थी।
-नरगिस दत्त ने उस खत में लिखा था- मीना कुमारी, तुम्हें मौत मुबारक हो! आज तुम्हारी बाजी तुम्हें तुम्हारी मौत पर बधाई देती है और कहती है कि तुम फिर कभी इस दुनिया में कदम मत रखना। ये जगह तुम जैसे लोगों के लिए नहीं है।
मीना कुमारी के पीछे का छिपा दर्द
मीना कुमारी की कहानी आज भी बताती है कि शोहरत के पीछे छिपा दर्द कितना गहरा हो सकता है। उनकी कला अमर है और उनकी जिंदगी एक ऐसी दास्तान है,जिसे भुलाया नहीं जा सकता।












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