देश की सबसे हिंसक फ़िल्म 'मारको' का स्टाइलिश एक्शन, उन्नी मुकुंदन का अभिनय है देखने लायक
कलाकार: उन्नी मुकुंदन, युक्ति थरेजा, सिद्दीकी, जगदीश, एंसन पॉल, राहुल देव
निर्देशक: हनीफ अदेनी
रेटिंग: 3 स्टार्स
बॉक्स ऑफिस पर इन दिनों दक्षिण भारत की फिल्मो का जलवा है। पुष्पा 2 ने सिनेमाघरों में अपनी रफ्तार अब भी पकड़ी हुई है इसी बीच एक बड़ी मलयालम फ़िल्म मारको क्रिस्मस वीकेंड पर रिलीज हुई है। जब से इसका टीज़र आउट हुआ था तब से इसकी बहुत चर्चा थी। फ़िल्म जब सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है तो आइए हम भारतीय सिनेमा की सबसे हिंसात्मक फ़िल्म का रिव्यू करते हैं।

यह फ़िल्म क्रिमिनल्स की अंदरूनी राजनीति और गैंगवार की कहानी है, जो बहुत एक्साइटेड है और एक भव्य शैली में शूट की गई है। बात करते हैं मारको की, मुख्य गैंगस्टर का गोद लिया सबसे प्यारा लड़का है। वह बहुत बेबाक और बेखौफ है, हिंसा करता है। वह अपने सबसे प्यारे लड़के को बहुत चाहता है जो अंधा है। गैंगवार जब शुरू होता है तो थमने का नाम नहीं लेता है उसके बाद मारको की एंट्री होती है। मारको के लिए दुश्मन गैंग के गुंडे खूब साज़िश रचते हैं, विक्टर की प्रेमिका को लेकर भरम पैदा किए जाते हैं मगर मारको को अपने अंधे भाई के साथ हुई बुरी घटना का बदला लेना है।
मारको का टाइटल रोल उन्नी मुकुंदन ने बड़ी खूबी से निभाया है। बहुत ही जबरदस्त एक्शन सीन शूट किए गए हैं। किसी मलयालम फ़िल्म में पहली बार इस स्तर का एक्शन देखने को मिल रहा है।
कहा जा रहा है कि यह फ़िल्म भारत की सबसे ज्यादा हिंसात्मक फ़िल्म है जो बड़े पर्दे पर आई है। इस वजह से यह फ़िल्म सेंसर में काफी दिनों तक फंसी रही उसके बाद इसे सर्टिफिकेट मिला।
यह 2019 की फ़िल्म मिखाइल का स्पिन-ऑफ़ है। मार्को मलयालम में अब तक बनी सबसे अधिक हिंसक फिल्म मानी जा रही है। फ़िल्म में उन्नी मुकुंदन का स्वैग अपनी बुलंदी पर है और देखने लायक है। काफी स्टाइलिश फिल्ममेकिंग ने इस सिनेमा को मील का पत्थर बना दिया है।
फ़िल्म का स्टाइल, एक्शन और इसका बैकग्राउंड स्कोर इसको एक अलग लेवल पर लेकर जाते हैं। फ़िल्म में थ्रिल और सस्पेंस के बहुत तेज एलिमेंट्स डाले गए हैं इसलिए दर्शक प्रिडिक्ट नहीं कर पाते कि अगला दृश्य क्या होगा। गैंगवार में अलग अलग प्लाट और सिक्वेंस दर्शकों को बांधे रखते हैं। मलयालम एक्शन फिल्म मारको तकनीकी पहलुओं में अव्वल दर्जे की फ़िल्म है। इसके स्टाइल वाले स्टंट की बात की जाए या धांसू सिनेमैटोग्राफी की या फिर बैकग्राउंड स्कोर के मामले में यह सिनेमा एक रिकॉर्ड क्रिएट कर रहा है।
उन्नी मुकुंदन ने जो एक्टिंग की है उन्हें कई अवार्ड्स मिलने वाले हैं।
फ़िल्म असाधारण एक्शन और अनूठे स्टाइल के कारण एकदम अलग दिखती है। निर्देशन कहानी को उच्च स्तर तक ले गया है। डायरेक्शन इतना कुशल और सटीक है कि फ़िल्म एक आकर्षक सिनेमाई अनुभव देती है। खतरनाक एक्शन सीक्वेंस दर्शकों को अपनी सीटों से बांधे रखने में कामयाब हैं। फ़िल्म की सबसे खास बात यह है कि शुरू से क्लाइमेक्स तक, मारको एक मनोरंजक तेजी के साथ आगे बढ़ती है। फिल्म का निर्देशन और ज़बरदस्त एक्शन इसे देखने लायक बनाता है।
उन्नी मुकुंदन ने मुख्य भूमिका में जान डाल दी है। पर्दे पर उनकी असरदार उपस्थिति और चरित्र के लिए पूरी तरह से अनुकूल और तैयार उनकी बॉडी दर्शकों के लिए एक बेहतरीन विजुअल ट्रीट होता है। फिल्म के मनोरंजक निर्देशन के साथ उन्नी की गजब अदाकारी मार्को एक्शन के शौकीन दर्शकों के लिए और मास मनोरंजन के लिए शानदार विकल्प है।
फिल्म मारको न सिर्फ मलयालम में रिलीज हुई है, बल्कि इसे हिंदी, तमिल, तेलुगू, कन्नड़ में भी डब किया गया है, जिससे यह अधिक संख्या में भारतीय दर्शकों के बीच पहुंच रही है।
क्या मारको अपने उस परिवार का, जिसने एक लावारिस बच्चे को अपनाया और बड़ा किया, बदला ले पाएगा? इस गैंगवार की कहानी का अंत क्या होगा? इसके लिए आपको फ़िल्म मारको नजदीकी सिनेमाघर में जाकर देखनी होगी।
मारको के रूप में उन्नी मुकुंदन का लाजवाब अभिनय इस बदले की थ्रिलर कहानी को वो ऊंचाई प्रदान करता है, जो एक मिसाल कायम करता है। हाल ही में किल जैसी फ़िल्में पसन्द करने वालों के लिए मारको बेहतरीन सिनेमा है। इसके स्टाइलिश एक्शन दृश्य और ज़बरदस्त बैकग्राउंड स्कोर आपके मन मस्तिष्क पर हावी हो जाते हैं।












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