सैयारा के लिए हटाई गई मराठी फिल्म तो भड़क उठे संजय राउत, चेतावनी देते हुए कहा- असली दुश्मन को पहचानो

Saiyaara Controversy: एक तरफ न्यूकमर अहान पांडे की फिल्म 'सैयारा' बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा रही है और एक हफ्ते में 200 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर चुकी है, वहीं दूसरी ओर इस फिल्म को लेकर महाराष्ट्र में भाषा आधारित विवाद गरमा गया है। मामला तब भड़क उठा जब मराठी फिल्म 'ये रे ये रे पैसा 3' को मल्टीप्लेक्स से हटाकर उसकी जगह 'सैयारा' को स्क्रीनिंग दे दी गई।

इस पर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) और शिवसेना (UBT) के नेता खुलकर सामने आ गए हैं और इसे मराठी भाषा और सिनेमा का अपमान बताया है।

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मराठी फिल्म हटाकर 'सैयारा' की स्क्रीनिंग: क्या है विवाद?

MNS के फिल्म यूनिट अध्यक्ष अमेय खोपकर ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि मराठी फिल्म 'ये रे ये रे पैसा 3' को 18 जुलाई को रिलीज़ किया गया था और इसे दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स भी मिल रहा था। लेकिन महज एक हफ्ते के अंदर ही इसे मुंबई के कई मल्टीप्लेक्स से हटा दिया गया और उसकी जगह हिंदी फिल्म 'सैयारा' को चारों शोज दे दिए गए।

खोपकर ने मीडिया से बातचीत में कहा, "मुंबई के दिल में मराठी फिल्म के लिए जगह नहीं बची है। दादर के प्लाज़ा सिनेमा में चारों शो 'सैयारा' को दे दिए गए और मराठी फिल्म हटा दी गई। मैं अभी चुप हूं, लेकिन चेतावनी देता हूं - अगर भविष्य में मराठी सिनेमा के साथ ऐसा किया गया तो मैं मल्टीप्लेक्स के शीशे तोड़ दूंगा।"

संजय राउत का तीखा हमला, बोले - लड़ाई तेज होनी चाहिए

इस पूरे विवाद पर शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर लिखा, "मराठी के लिए सब एकजुट हो रहे हैं, लड़ रहे हैं, फिर भी सवाल खत्म नहीं होते। हिंदी फिल्म 'सैयारा' को थिएटर दिलाने के लिए मराठी फिल्म 'ये रे ये रे पैसा 3' को बंद कर दिया गया। यह एक आम बात हो गई है।मराठी के लिए लड़ाई तेज होनी चाहिए। मराठी के असली हत्यारे अलग हैं। जय महाराष्ट्र!"

राउत का यह बयान दर्शाता है कि मराठी भाषा और सिनेमा के हक की लड़ाई अब केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप भी लेने लगी है।

बॉलीवुड बनाम क्षेत्रीय सिनेमा विवाद

यह पहली बार नहीं है जब मराठी फिल्मों को शो टाइम को लेकर नुकसान उठाना पड़ा है। महाराष्ट्र में अक्सर यह मुद्दा उठता रहा है कि मल्टीप्लेक्स और सिनेमाघर बड़ी बजट की बॉलीवुड फिल्मों को तरजीह देते हैं और क्षेत्रीय सिनेमा को सीमित या ऑफ-पीक शो टाइम्स में डालते हैं।

MNS और शिवसेना ने पहले भी मराठी फिल्मों को 'प्राइम टाइम' में स्क्रीन देने की मांग की है, और इसको लेकर आंदोलन भी किए गए हैं। मौजूदा विवाद एक बार फिर इस बहस को हवा दे रहा है।

'सैयारा' की पॉपुलैरिटी और विवाद के बीच बॉक्स ऑफिस पर धमाल

मोहित सूरी द्वारा निर्देशित 'सैयारा' ने रिलीज के एक हफ्ते में ही 200 करोड़ से अधिक का कलेक्शन कर लिया है। यह फिल्म अभिनेता चंकी पांडे के भतीजे अहान पांडे की डेब्यू फिल्म है और इसे करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शन्स और भूषण कुमार के टी-सीरीज़ द्वारा प्रोड्यूस किया गया है। सैयारा की पॉपुलैरिटी का ही नतीजा है कि कई सिनेमाघरों ने इसे अधिक शो देना शुरू किया, लेकिन इसने मराठी फिल्म इंडस्ट्री को नाराज कर दिया है।

इस मामले ने महाराष्ट्र की राजनीति और सांस्कृतिक बहस को फिर से उभार दिया है। अब देखना होगा कि राज्य सरकार, मल्टीप्लेक्स मालिक और फिल्म इंडस्ट्री मिलकर इस समस्या का कोई संतुलित समाधान निकालते हैं या यह मुद्दा और बड़ा रूप लेता है।

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