Manoj Kumar demise: मनोज कुमार ने धमेंद्र और शशि कपूर को क्यों कहा था 'लालची' एक्टर
Manoj Kumar demise: बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर और फिल्म निर्देशक मनोज कुमार का शुक्रवार को तड़के निधन हो गया। मुंबई के लीलावती अस्पताल में 87 वर्षीय मनोज कुमार दुनिया को सदा के लिए अलविदा कर गए। मनोज कुमार के निधन की खबर ने सभी सिनेमा प्रेमियों को तगड़ा झटका लगा है।
देशभक्ति की फिल्मों में अपने शानदार अभियन की बदौलत "भारत कुमार" के नाम से पहचाने जाने वाले मनोज कुमार को पद्मश्री और दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है। मनोज कुमार अपनी शानदार एक्टिंग ही नहीं फिल्म निर्देशन के लिए भी जाने जाते है। आइए जानते हैं कि मनोज कुमार ने एक्टर धमेंद्र और शशि कपूर जैसे शानदार एक्टर को क्यों लालची कहां था?

अभिनय और निर्देशन के लिए जाने जाने वाले एक्टर मनोज कुमार ने हिंदी सिनेमा में कुछ ऐसी चुनिंदा फिल्में की जिसके लिए वो सदा के लिए अमर हो गए। मनोज कुमार ने 1995 में फिल्म मैदान-ए-जंग में आखिरी बार नजर आए थे। लगभग तीन दशक से एक्टिंग करियर से दूर मनोज कुमार लंबे समय से फिल्म निर्देशन कर रहे थे।
मनोज कुमार ने धमेंद्र और शशि कपूर को क्यों कहा था लालची?
मनज कुमार ने हिंदी सिनेमा में अहम योगदान दिया है लेकिन उन्होंने अपने समय के एक्टर की तुलना में बहुत कम फिल्में की हैं। एक इंटरव्यू में मनोज कुमार में जब मनोज कुमार से पूछा गया कि उन्होंने कई सालों से कोई फिल्म क्यों नहीं बनाई और फिल्म में अभिनय नहीं किया। इस प्रश्न का जवाब देते हुए तब मनेाज कुमार ने कहा था कि मैं एक्टर के तौर पर भी लालची फिल्मी व्यक्ति नहीं हूं।
मनोज कुमार ने क्या कहा था?
मनोज कुमार ने कहा मेरे साथ के एक्टर धमेंद्र और शशि कपूर ने लगभग 300 फिल्में की है और मैंने अपने पूरे करियर में मुश्किल से 35 फिल्में की हैं। मनोज कुमार ने तर्क दिया कि वह धर्मेंद्र या शशि कपूर की तरह 'लालची' व्यक्ति नहीं हैं।
मनोज कुमार की लोकप्रिय फिल्में
मनोज कुमार की कुछ लोकप्रिय फिल्मों में शहीद (1965), उपकार (1967), पूरब और पश्चिम (1970) और रोटी कपड़ा और मकान (1974) शामिल हैं। देशभक्ति की फिल्में करने के कारण, अभिनेता को "भारत कुमार" भी कहा जाता था।
मनोज कुमार की पंसदीदा फिल्म कौन सी थी?
मनोज कुमार ने कुछ चुनिंदा फिल्में की हैं लेकिन जब उनके एक इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि उनका पसंदीदा फिल्म प्रोजेक्ट कौन सा था तब उन्होंने "1972 में आई शोर फिल्म को बताया था। उन्होंने कहा था कि " मैं जया भादुड़ी जी की गुड्डी में देखने के बाद इस फिल्म को साइन करने गया था। मैंने उनसे कहा कि शोर एक पिता और बेटे के बारे में है। बेटा बोल नहीं सकता और पिता उसे सुनने के लिए तरसता है। लेकिन जिस दिन बेटा बोलता है, पिता सुन नहीं पाता। ऐसी कहानी पर कोई भारतीय फिल्म नहीं बनी थी। और यह एकमात्र ऐसी फिल्म है जिसका मैंने निर्देशन किया था जिसमें मेरा नाम भारत नहीं था।"












Click it and Unblock the Notifications