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Mamta Child Factory Review: सरोगेसी पर मोहसिन खान ने बनाई एंटरटेनिंग फिल्म, जानिए कैसी है कहानी?

इस सप्ताह निर्देशक मोहसिन खान की फ़िल्म ममता चाईल्ड फैक्ट्री ओटीटी पर रिलीज हुई है। फिल्म की शुरुआत महाराष्ट्र के एक छोटे शहर से होती है, जहां भाऊ (प्रथमेश परब) और चोच्या (पृथ्वीक प्रताप) रियल एस्टेट के छोटे कामों में लगे, मस्त और सपने देखने वाले लड़के हैं। उनकी दुनिया तब बदलती है जब डॉक्टर अमृता देशमुख (अंकिता लांडे) गांव में एक फर्टिलिटी सेंटर शुरू करने आती हैं। अमृता के आधुनिक और प्रगतिशील विचार गांव की पुरानी सोच, सामाजिक घुटन और ग्रामीण महिलाओं की अनिश्चितता से टकराते हैं। आर्थिक तंगी से जूझती महिलाएं सरोगेसी को एक मौका मानती हैं, मगर समाज की बातें, परिवार का डर और सरोगेसी के प्रति अनजानगी उन्हें कदम बढ़ाने से रोकती है।

Mamta Child Factory Review

कहानी में मोड़ तब आता है जब एमएलए संजय तात्या भोसले (गणेश यादव) अपनी निजी समस्या छिपाते हुए गुप्त रूप से सरोगेसी का सहारा लेते हैं। इसके बाद कहानी राजनीति, सामाजिक अफवाहों, नैतिक दुविधाओं और मानवीय रिश्तों के एक दिलचस्प मिश्रण में बदल जाती है। ट्विस्ट लगातार आते हैं और कहानी अपनी जड़ों-इमोशन और मानवीय संघर्ष-से जुड़ी रहती है।

अभिनय है कैसा?
प्रथमेश परब फिल्म को अपने अभिनय से बहुत मनोरंजक बना देते हैं। भाऊ के रूप में उनका मासूम, मजाकिया और बाद में गहराई से भावुक अभिनय दिल छू लेता है। अंकिता लांडे डॉक्टर अमृता के रूप में गरिमा, संवेदनशीलता और संतुलन लेकर आती हैं, खासकर तब जब फिल्म सरोगेसी के नैतिक पक्षों में उतरती है। पृथ्वीक प्रताप भाऊ के दोस्त चोच्या के हास्य से कहानी में ताज़गी बनाए रखते हैं। गणेश यादव एमएलए के संघर्ष, दबाव और दुविधाओं को बेहद वास्तविकता से पेश करते हैं। कहीं कहीं इस किरदार में हास्य भी दिखता है फ़िल्म के अन्य कलाकार सुजाता मोगल और विजय पटवर्धन का अभिनय भी बढ़िया हैं।

फिल्म का लेखन और निर्देशन
मोहसिन खान की सबसे बड़ी ताकत फ़िल्म के विषय के साथ मनोरंजन का तालमेल है। प्रथमेश एक। एंटरटेनिंग एक्टर है इसलिए सरोगेसी जैसे विषय में भी वह कॉमेडी लेकर आते है वह सरोगेसी को कहीं भी भारी-भरकम नहीं बनाते, बल्कि इसे मानवीय भावनाओं में पिरोकर दिखाते हैं। फ़िल्म का पहला हिस्सा हल्का-फुल्का, मजेदार और ग्रामीण किरदारो और घटनाओ से भरा है, जबकि दूसरा हिस्सा अधिक भावनात्मक, सामाजिक और नैतिक संघर्षों से प्रभावित है। हां, क्लाइमैक्स में सरोगेसी का मूल विषय थोड़ा पीछे छूट जाता है, और फिल्म पारिवारिक ड्रामा और इमोशनल पल्स पर ज्यादा फोकस करती है। लेकिन यह 'फिल्मी' अंदाज़ भी कहानी को कमजोर नहीं करता है.

फाइनल वर्डिक्ट
ममता चाइल्ड फ़ैक्ट्री सरोगेसी, सामाजिक दबाव, गांव की सादगी, पारिवारिक संबंधों और मानवीय भावनाओं का संतुलित मिश्रण है। क्लाइमैक्स में विषय थोड़ा हल्का पड़ भी जाए, लेकिन फैमिली वैल्यूज़ और ड्रामा इसे पूरी तरह से एंटरटेनिंग बनाते हैं।

कलाकार: प्रथमेश परब, अंकिता लांडे, पृथ्वीक प्रताप, गणेश यादव
निर्देशक: मोहसिन खान
प्लेटफ़ॉर्म: अल्ट्रा प्ले ओटीटी
रेटिंग: 3.5/5

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