kunal kamra News: कुणाल कामरा की याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई, अपने खिलाफ दर्ज FIR को दी है चुनौती
kunal kamra New: बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार(8 अप्रैल) को स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा को एकनाथ शिंदे पर व्यंग्य के मामले में 16 अप्रैल तक सुरक्षा प्रदान की है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सभी सरकारी पक्ष से नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 16 अप्रैल को होनी है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार (8 अप्रैल 2025) को स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा की याचिका पर मुंबई पुलिस और शिवसेना विधायक मुरजी पटेल को नोटिस जारी किया। कुणाल कामरा पर आरोप है कि उन्होंने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। इस मामले की जांच थार पुलिस कर रही है। गौरतलब है कि इस संबंध में कामरा को तीन बार पूछताछ के लिए बुलाया जा चुका है, लेकिन वब अभी तक लिस स्टेशन में उपस्थित नहीं हुए हैं।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक कुणाल कामरा ने शिवसेना द्वारा उनके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की मांग की है। कामरा के वकील ने कहा, हम इस तरह के मामले को रद्द करने से चिंतित हैं। मद्रास हाईकोर्ट में जो कुछ हुआ, उसके मद्देनजर मेरे मुवक्किल ने अपने सामने आने वाले खतरे के मद्देनजर तीन बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर बयान देने की पेशकश की है। ऐसा लगता है कि अधिकारी बयान दर्ज नहीं कर रहे हैं; वे यहां उनकी शारीरिक उपस्थिति पर जोर दे रहे हैं।
मेरे क्लाइंट को जान से मारने की धमकी मिल रही है: वकील
वकील ने कहा कम से कम तीन मौकों पर, हमने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर सहयोग करने की पेशकश की है। यह कोई हत्या का मामला नहीं है, यह एक कॉमेडी शो है। अगर वे हलफनामा दाखिल करना चाहते हैं, तो उन्हें 16 अप्रैल से पहले नोटिस देना होगा।
सुनवाई के दौरान वकील ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके क्लाइंट के ऊपर कोई हत्या जैसे गंभीर अपराध का मामला दर्ज नहीं है। कॉमेडी शो पूरी तरह से स्क्रिप्टेड होती है। उन्होंने सुरक्षा का हवाला देते हुए कहा कि मेरे क्लाइंट को जान से मारने की धमकी मिल रही है, इसलिए कोर्ट से गुजारिश है कि कामरा को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हाजिर होने की इजाजत दें।
कुणाल कामरा ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है
बता दे कि इस मामले में कुणाल कामरा ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर को चुनौती दी है उन्होंने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार के मौलिक अधिकार के आधार पर उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की है। उन्होंने याचिका में कहा है कि क्या राजनीतिक घटनाक्रम और नेताओं की गतिविधियों पर टिप्पणी करने के लिए किसी व्यक्ति के अधिकार को इस तरह से आपराधिक बनाया जा सकता है।












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