कुकर से भिड़ंत में लौटी लौकी की शान, 'पंचायत' की राजनीति में समोसे को भी मिलेगी तवज्जो
जब सिंपल सी लौकी को प्रेशर कुकर में पकाते हैं, तो क्या मिलता है? एक नरम सी सब्जी, लेकिन फुलेरा की लौकी इतनी आसानी से प्रेशर में नहीं आती। जैसे ही पंचायत सीजन 4 का इलेक्शन फीवर उबाल पर पहुंचता है। फुलेरा की सबसे अतरंगी कैंपेन सड़कों पर उतर चुकी है, जहां हर नुक्कड़ एक पॉलिटिकल बैटलग्राउंड बन गया है। यूं कहें बैटल-गॉर्ड, जो इस बार की कहानी को और भी मसालेदार और अफ़रातफ़री भरा बना रहा है।
लेकिन इस बार की नेतागिरी में वो पुराने ढर्रे वाली हरकतें नहीं चलेंगी। अब तक पंचायत के दर्शकों को सीधी-सादी लौकी परोसी जाती रही है, लेकिन इस सीज़न में मुकाबला है प्रेशर कुकर से। क्योंकि क्रांति देवी फुलेरा चुनाव में ताल ठोकने को तैयार हैं। अबकी बार लड़ाई है लौकी बनाम कुकर और दांव इतने बड़े कभी नहीं रहे।

एक के बाद एक ज़बरदस्त और हंसाने वाली इंस्टॉलेशंस की सीरीज़ में, कहीं बड़ी-बड़ी लौकियां प्रेशर कूकर के नीचे दब रही हैं, तो कहीं वही लौकियां कूकर को ही चट कर जा रही हैं। ये नज़ारे शहर के पॉपुलर इलाकों में लोगों को हैरान भी कर रहे हैं, हंसा भी रहे हैं और सबसे मज़ेदार बात, यह एक हरी सब्ज़ी के भविष्य को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ा भी रहे हैं।
पटना के मरीन ड्राइव (लोकनायक गंगा पथ) पर जहां लोग आमतौर पर सुकून से टहलने और नदी किनारे की खूबसूरती देखने आते हैं, वहीं इस बार कुछ अलग ही देखने को मिला। अजीबो-गरीब इंस्टॉलेशंस ने सबका ध्यान खींचा। इंदौर की छप्पन दुकान पर दही भल्ला और पोहा-जलेबी के बीच फूडीज़ एक-दूसरे से पूछते दिखे, "क्या हमारी प्यारी लौकी का अंत आ गया? प्रधान जी की लौकी का ऐसा हाल?" वहीं लखनऊ के चर्चित 1090 चौराहे पर लोग जब स्वाद के साथ वक्त बिता रहे थे, तब कैमरे का रुख अचानक उस अब-आइकॉनिक लौकी की तरफ मुड़ गया, जो अब पंचायती सियासत की तीखी थाली में बेचारी कच्ची ही पड़ी दिख रही है।
मामूली इंस्टॉलेशंस ही नहीं, बल्कि फुलेरा के चुनावी संग्राम की गर्मी लोग हर कोने में महसूस कर रहे हैं। बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगे हैं, जिन पर दमदार नारे लिखे हैं, "बनराकस का वार या प्रधान का प्रहार?" और "एक, दो, तीन... कौन होगी फुलेरा की क्वीन?" - यानी देसी चुनावी तड़का, बिल्कुल वैसा ही जैसा हम सबको पसंद है। लेकिन सबसे अलग जो चीज़ लोगों को चौंका रही है, वो है एक असली सीटी बजाने वाला प्रेशर कुकर, जो होर्डिंग पर लगाया गया है। हर कुछ घंटों में वो सीटी बजाता है और राह चलते लोगों को रोक देता है - जैसे कह रहा हो, "अब तो प्रेशर बढ़ेगा!" ये देसी चुनावी हंगामा न केवल मज़ेदार है बल्कि 'पंचायत' के नए सीज़न की दीवानगी को भी असली रंग दे रहा है। गांव की सादगी और लोकल जुड़ाव के साथ, ये कैंपेन हाई-कॉन्सेप्ट का भी ज़बरदस्त नमूना है, जहां पब्लिसिटी भी कहानी का हिस्सा बन गई है। आज के OOH प्रचारों के इस भीड़भाड़ वाले दौर में फुलेरा का चुनावी तमाशा अलग ही रंग दिखा रहा है - ज़ोरदार, जोशीला और पूरी तरह देसी। और अगर कुकर से सीटी निकल रही है, तो समझ लो... शो परोसने को तैयार है।
अपने खास अंदाज़ यानी देसी ह्यूमर, इमोशन्स और ज़मीन से जुड़ी कहानियों के साथ पंचायत सीज़न 4 लौट आया है। इस बार भी वही प्यारा सा कास्ट साथ है जितेन्द्र कुमार, नीना गुप्ता, रघुबीर यादव, फैसल मलिक, चंदन रॉय, सान्विका, दुर्गेश कुमार, सुनीता राजवार और पंकज झा। TVF द्वारा प्रोड्यूस किया गया ये सीज़न दीपक कुमार मिश्रा और चंदन कुमार की क्रिएशन है। इसकी कहानी चंदन कुमार ने लिखी है और डायरेक्शन की कमान संभाली है दीपक कुमार मिश्रा और अक्षत विजयवर्गीय ने। तो तैयार हो जाइए फुलेरा के अगले अध्याय के लिए, जहां इस बार इमोशन्स और भी ज़्यादा गहराएंगे और कहानी बनेगी पहले से भी ज्यादा यादगार।












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