Asrani Education: गणित में फेल, फिर असरानी ने कैसे पार किया 350 का आंकड़ा? बने कॉमेडी किंग, कितने पढ़े-लिखे?
Govardhan Asrani Education: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता गोवर्धन असरानी (1 जनवरी 1941 - 20 अक्टूबर 2025) का 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया, लेकिन उनकी हास्य भरी विरासत और 350+ फिल्मों का योगदान अमर रहेगा। गणित में कमजोर होने के बावजूद असरानी ने अभिनय की दुनिया में न सिर्फ कदम रखा, बल्कि शोले के जेलर से लेकर नमक हराम तक लाखों दिल जीते।
उनकी शिक्षा का सफर जयपुर के स्कूल-कॉलेज से पुणे के FTII तक रहा। आइए, जानते हैं कि गणित में फेल होने वाले असरानी कैसे बने बॉलीवुड के कॉमेडी किंग...

Govardhan Asrani Journey: जयपुर से FTII तक का सफर
असरानी का जन्म जयपुर, राजस्थान में एक मध्यमवर्गीय सिंधी-हिंदू परिवार में हुआ था। उनके पिता कालीन व्यापारी थे। चार बहनें और तीन भाइयों से परिवार भरा हुआ है। असरानी को पारिवारिक व्यवसाय में कोई रुचि नहीं थी, और गणित में उनकी कमजोरी ने उन्हें वैकल्पिक रास्ता चुनने को प्रेरित किया।
असरानी ने जयपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल से मैट्रिक (10वीं) पूरी की। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया, 'मैं पढ़ाई में औसत था, गणित में फेल होता था। लेकिन नाटकों और रेडियो ने मुझे आकर्षित किया।' राजस्थान कॉलेज, जयपुर से स्नातक (BA) किया। पढ़ाई के दौरान उन्होंने आर्थिक स्वतंत्रता के लिए ऑल इंडिया रेडियो, जयपुर में वॉयस आर्टिस्ट के रूप में काम किया। यह अनुभव उनके अभिनय करियर की पहली सीढ़ी बना।
1960-62 में असरानी ने जयपुर में लेखक कलाभाई ठक्कर से अभिनय की बारीकियां सीखीं। 1962 में वे मुंबई आए, जहां निर्देशक किशोर साहू और ऋषिकेश मुखर्जी ने उन्हें औपचारिक प्रशिक्षण की सलाह दी। 1964 में असरानी ने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे में अभिनय कोर्स में दाखिला लिया। 1966 में कोर्स पूरा करने के बाद वे प्रोफेशनल अभिनय के लिए तैयार थे। FTII में उनकी प्रतिभा ने प्रोफेसरों को प्रभावित किया।

गणित में फेल, फिर भी 350+ फिल्मों का रिकॉर्ड
असरानी ने गणित में कमजोरी को कभी रुकावट नहीं बनने दिया। उनकी रुचि अभिनय, नाटक, और रेडियो में थी। FTII की ट्रेनिंग ने उन्हें आत्मविश्वास दिया। 1967 में उनकी पहली हिंदी फिल्म हरे कांच की चूड़ियां में छोटा रोल मिला। इसके बाद गुजराती फिल्मों में काम शुरू किया, जिसमें 1967-69 के बीच 4 फिल्मों में मुख्य और सहायक भूमिकाएं निभाईं।
1970 के दशक में असरानी की कॉमिक टाइमिंग ने उन्हें स्टार बनाया। आज की ताजा खबर (1973) और बालिका वधू (1977) के लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट कॉमेडियन अवॉर्ड मिला। शोले (1975) में जेलर का किरदार और नमक हराम (1973) में राजेश खन्ना के साथ उनकी केमिस्ट्री ने उन्हें मशहूर किया। 1970-79 तक उन्होंने 101 फिल्में कीं। कुल मिलाकर, असरानी ने 350+ हिंदी फिल्में, गुजराती, पंजाबी, और हॉलीवुड की द केज (1995) में काम किया। उन्होंने द लायन किंग (हिंदी डब) में जूजू को आवाज दी।

How Become Govardhan Asrani Comedy King: कैसे बने कॉमेडी किंग?
FTII की ट्रेनिंग और राजेश खन्ना की दोस्ती ने असरानी को नई ऊंचाइयां दीं। नमक हराम के सेट पर खन्ना से दोस्ती हुई, और उन्होंने 1972-91 तक 25 फिल्मों में असरानी को कास्ट करने की सिफारिश की। असरानी ने 25+ फिल्में भी डायरेक्ट कीं, जैसे हम नहीं सुधरेंगे (1980)। उनकी आखिरी फिल्म भूत बंगला (2025) अक्षय कुमार के साथ रिलीज होनी थी।

पारिवारिक जीवन: मंजू के साथ अनकही कहानी
असरानी की पत्नी मंजू असरानी (पूर्व नाम: मंजू बंसल) 1970-80 की अभिनेत्री थीं। उनकी मुलाकात आज की ताजा खबर और नमक हराम के सेट पर हुई, जहां दोस्ती प्यार में बदली। 1970 के अंत में शादी हुई। मंजू ने तपस्या, जुर्माना जैसी फिल्मों में काम किया और बाद में मां की ममता (1989) डायरेक्ट की। दंपति की कोई संतान नहीं थी। परिवार में मंजू, असरानी की बहन, और भतीजा बचे हैं।
गणित में फेल होने वाला जयपुर का लड़का FTII की ट्रेनिंग और मेहनत से बॉलीवुड का सितारा बना। असरानी की शिक्षा और समर्पण ने 350+ फिल्मों का रिकॉर्ड बनाया। उनके निधन से इंडस्ट्री में शोक है, लेकिन उनकी हंसी गूंजती रहेगी।
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