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Video: पोते करण देओल की शादी में धर्मेंद्र की कविता ने लूट ली थी महफिल, अनुपम खेर ने शेयर किया ऐसा वीडियो

Dharmendra Poem: हिंदी सिनेमा के लिजेंड्री एक्टर धर्मेंद्र हला ही में अपने पोते करण देओल की शादी खूब मस्ती करते नजर आए थे। इस शादी में धर्मेंद्र ने अपने बड़े बेटे सनी देओल और अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर के साथ जमकर डांस किया था। आपको बता दें कि सनी देओल के बड़े बेटे करण देओल की शादी समारोह में बॉलीवुड हस्तियों का मेला लगा था। हिंदी सिनेमा इंडस्ट्री के कई पुराने कलाकार भी इस सेरेमनी में शामिल हुए थे। इसी बीच इस शादी समारोह से धर्मेंद्र का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

करण देओल और दृशा आचार्य की शादी समारोह की तस्वीरें और वीडियोज इंटरनेट पर खूब वायरल हुए थे। शादी के फंक्शन के कई इनसाइड वीडियोज ने भी खूब धूम मचाई। लेकिन फिलहाल सोशल मीडिया पर धर्मेंद्र का एक लेटेस्ट वीडियो छाया हुआ है जिसे बॉलीवुड एक्टर अनुपम खेर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। इस वीडियो में एक्टर राज बब्बर भी नजर आ रहे हैं।

dharmendra

धर्मेंद्र का मजेदार वीडियो
वीडियो को देखकर ऐसा लग रहा है जैसे पुराने दोस्तों की महफिल सजी थी, जहां धर्मेंद्र ने ये महफिल लूट ली। इस वीडियो में धर्मेंद्र शानदार कविता सुनाते नजर आ रहे हैं जिसे सुनने के बाद सब मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। अनुपम खेर ने धर्मेंद्र का ये मजेदार वीडियो शेयर किया है और बताया है कि करण देओल की शादी में थोड़ा पहले पहुंचकर कैसे महफिल सजाई थी।

अनुपम खेर ने शेयर किया वीडियो
अनुपम खेर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर ये वीडियो शेयर किया है। अनुपम खेर ने वीडियो को शेयर करते हुए लिखा है- हम जब बड़े हो जाते हैं। उम्र में या रुतबे में तो अपने छोड़े हुए घर की बहुत याद आती है। उस घर की, जहां हमने अपना बचपन गुजारा होता है। उस दिन मेरे दोस्त सनी देओल के बेटे, करण की शादी में कुछ जल्दी पहुंच गया तो धरम जी के साथ वक्त गुजारने का मौका मिला।

'बहुत कहने पर धरम जी ने दी रिकॉर्ड करने की अनुमति'
अनुपम खेर ने आगे लिखा है- धरम जी अपनी लिखी हुई नज्म (कविता) की कुछ लाइनें गुनगुना रहे थे। जो मेरे और राज बब्बर जी के दिलों की गहराई को छू रही थी। मेरे बहुत कहने पर वो ये नज्म रिकॉर्ड करने के लिए राजी हो गए। आप भी सुनिए। आपको भी अपना बचपन, अपना घर और अपनी मां की बहुत याद आएगी।

धर्मेंद्र ने सुनाई ये कविता

अपने कमरे में गुमशुम, तन्हा, उदास बैठा था
देख उदास मुझे बेचैन सोच मेरी, ले गई मुझे मेरे गांव की गलियों में
फिर आया झोंका जो बिछड़ी यादों का
उड़ता जर्रा जर्रा मेरी धरती का
सूरते मां मेरे सामने आ खड़ा
जर्रा तारीख हो गया, चुप थीं मां मैं ख़ामोश हो गया
लम्हा ये जानेवाला था, अचानक मां मिल गई
दम घुट रहा था ख़ामोशी का
सुबुकती ममता ने फिर चुप्पी तोड़ी

अब और न तड़पा, आ मेरे बच्चे आ मेरे गले लग जा
और मैं बिलखता किसी बच्चे की तरह
मां, मेरी मां कहकर जाके मां से लिपटा
मां की नरम गोद में

नींद सी आने लगी
मां ने सिर सहलाते हुए कहा- वो देख
धरम, गांव के बच्चे-बूढ़े सब हैं खड़े तुझसे मिलने के लिए
जा उनसे मिल आ
मैं चला गया
फिर गिले-शिकवे जज्बात भरे होने लगे
नम हो गईं आंखें मेरी, आंसू उनके भी बहने लगे
और फिर स्कूल जाते बच्चों में खुद को देख लिया
रहा न गया, आवाज दी...धरम
धरम दौड़ता हुआ मेरे पास आ गया
उठा लिया बांहों में
भींच लिया सीने से, लिपटते ही गले वो रो दिया
कहां चले गए थे, क्यों चले गए थे...अब छोड़ के न जाना मुझे
डबडबाई आंखों में फिर पिघलते-पिघलते, सबकुछ पिघल गया
मैं अपने कमरे में गमशुम, तन्हा, उदास बैठा था

तन्हाई आंसू पोंछ रही थी कहते हुए-
भूल जा धरम, तेरा वो मासूम माजी अब कभी लौट के न आएगा।

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