Cannes 2024: कौन हैं पायल कपाड़िया जिन्होंने कान्स में रचा इतिहास, पीएम नरेंद्र मोदी भी हुए मुरीद
Cannes Film Festival 2024: 77वां कान्स फिल्म फेस्टिवल 2024 गत 25 मई को खत्म हो चुका है। कान्स 2024 इस बार भारत के लिए काफी खास रहा है। एक तरफ जहां श्याम बेनेगल की 'मंथन' की रिलीज के 48 साल बाद इस इवेंट में स्पेशल स्क्रीनिंग हुई, वहीं अनसूया से ठीक पहले मेरठ की मानसी माहेश्वरी और एफटीआई के स्टूडेंट्स की शॉर्ड फिल्म ने अवॉर्ड जीता है।
पायल कपाड़िया ने कान्स में रचा इतिहास
इस बार कान्स में पायल कपाड़िया का नाम भी चर्चा में रहा। उन्होंने इस इवेंट में देश का नाम रोशन किया है। भारतीय फिल्ममेकर पायल कपाड़िया ने कान्स 2024 में ग्रैंड प्रिक्स जीता है। आपको बता दें कि एफीआईआई से ग्रेजुएट हुईं पायल को कभी 'राष्ट्र विरोधी' कहा गया था और आज वो देश की शान बन गई हैं। हालांकि ऐसा करने में उन्हें 9 साल लग गए।

पीएम नरेंद्र मोदी ने पायल को दी बधाई
इस समय हर तरफ पायल कपाड़िया की बातें हो रही हैं। इसी बीच भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी उपलब्धि के लिए उन्हें बधाई दी है, उनकी रचनात्मकता और कहानी द्वारा नई पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए उनकी जमकर सराहना भी की है। पीएम मोदी ने एक्स हैंडल पर पायल को शुभकामनाएं देते हुए लिखा है- पायल कपाड़िया ने फिल्म मेकर्स की एक पूरी नई पीढ़ी को प्रेरित किया है।
पीएम नरेंद्र मोदी ने पायल के लिए लिखी ऐसी बात
इसे एक ऐतिहासिक मील का पत्थर बताते हुए, पीएम मोदी ने लिखा है- भारत को पायल कपाड़िया पर उनके काम ऑल वी इमेजिन एज लाइट के लिए 77वें कान्स फिल्म फेस्टिवल में ग्रैंड प्रिक्स जीतने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर गर्व है। एफटीआईआई की पूर्व छात्रा, उनकी उल्लेखनीय प्रतिभा वैश्विक मंच पर चमकती रहती है, जो भारत में समृद्ध रचनात्मकता की झलक देती है। यह प्रतिष्ठित सम्मान न केवल उनके असाधारण कौशल का सम्मान करता है बल्कि भारतीय फिल्म मेकर्स की नई पीढ़ी को प्रेरित भी करता है।
गजेंद्र चौहान के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ था
जानकारी के अनुसार पायल कपाड़िया ने साल 2015 में गजेंद्र चौहान को एफटीआईआई अध्यक्ष बनाए जाने पर 139 दिनों तक विरोध प्रदर्शन किया था। साथ ही 'पाकिस्तान जाओ' के नारों का सामना भी किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पायल इन दिनों 34 अन्य पूर्व छात्रों के साथ मिलकर संस्थान के तत्कालीन निदेशक प्रशांत पथराबे द्वारा दायर एक मामले पर कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं, जिसमें उन पर आरोप लगाया गया है कि उस साल उनका घेराव करने और उनके कार्यालय में तोड़फोड़ करने में वो लोग शामिल थे।












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