Fisaddi Web Series Review: दुर्गेश सिंह की 'फिसड्डी' बढ़िया इंसान बनाती है, सीरीज़ ने बताया अपनों का महत्व
कास्ट- भुवन अरोड़ा, गोपाल दत्त, पूजन छाबरा, प्रियल महाजन, राजेश जैस
रेटिग- 3.5 स्टार
मम्मी. पापा. दीदी और भैया। भगवान हमें दुनिया में भेजने से पहले इन कुछ रिश्तों को बनाकर भेजता है। ये रिश्ते ऐसे होते हैं जो कभी साथ भी नहीं छोड़ते। हालांकि जब हम जवान हो रहे होते हैं तो इन्हीं लोगों की बातें चुभती हैं। अगर हमसे बड़ा कुछ बोलता है तो लगता है कि यार ज्ञान मत दो, ये तो हमें भी पता है। कभी कभी तो ये भी सोच लिया जाता है कि घर छोड़ कर कहीं निकल जाओ। अकेले रहेंगे और जीवन में कुछ कमाल कर लेंगे। लेकिन जैसे ही वक्त के थपेड़े पड़ते है, तो समझ आता है कि घर ही सही था।
एक और सत्य है। वो यह कि इंसान को अपने छात्र जीवन में कुछ समय हॉस्टल में जरूर बिताना चाहिए। भले ही वो समय एक साल या 6 महीने का ही क्यों ना हो। इससे जीवन जीने का सलीका और हर स्थिति में सर्वाइव करने का तरीका दोनों ही आ जाते हैं। यह सारी बाते हाल ही में रिलीज़ हुई सीरीज़ फिसड्डी में देखने को मिलेंगी। ये भी कह सकते हैं कि आपको महसूस करने को मिलेंगी।

भाई बनाम भाई
गोरखपुर का कुमार परिवार है। उनके तीन बच्चे हैं, दो बेटे और एक बेटी। बेटी इंजीनियरिंग करती थी, लेकिन शादी के बाद उसके पति ने छुड़वा दी। दो बेटों गोल्डी और विमल हैं। गोल्डी बड़ा और वो इलाहाबाद (अब प्रयागराज) की संगम यूनिवर्सिटी (असल में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी) में पढ़ता है। इसी यूनिवर्सिटी के मशहूर पॉलैंड हॉस्टल में रहता है। गोल्डी पढ़ाई लिखाई में थोड़ा कमजोर रहता है। वहीं, विमल ने 12वीं की परीक्षा पास की है और IIT या दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ना चाहता है। लेकिन पिताजी कहते हैं कि प्रयागराज जाकर संगम यूनिवर्सिटी में पढ़ाई करो। क्योंकि उसे पूरब का ऑक्सफोर्ड कहा जाता है। फिर क्या विमल कुमार पहुंच जाते हैं। वो सोचते हैं यूनिवर्सिटी जाकर मजे करेंगे, लेकिन वहां तो भैया है। वो भी ऐसे कि विमल की सांस में कंट्रोल रखना चाहते हैं। बस यहीं से कहानी में मजेदार और कुछ अहम सीख वाले पड़ाव आते हैं। जिसका लुफ्त सीरीज में आप लें। क्योंकि आगे कुछ बताना स्पॉइलर की श्रेणी में आएगा।
PCO दादा और गोल्डी की दोस्ती
गोल्डी का किरादर सीरीज में भुवन अरोड़ा ने निभाया है। ये वही भुवन है जो फर्जी जैसी सीरीज़ में नज़र आ चुके हैं। भुवन का काम यहां भी अच्छा है। बड़े भाई के रोल और जेलेसी वाले पार्ट को भी उन्होंने सीरीज में बखूबी निभाया है। दो भाईयों के बीच होने वाली खींचातानी भी ठीक दिखाई है। छोटे भाई विमल कुमार के रोल को पूजन छाबरा ने भी समझा है। उन्होंने छोटे भाई वाला अल्हड़पन और चुहलबाजी करने में सफल हुए है। प्यार और ईगो वाले पार्ट में भी बेहतर रहे हैं। सीरीज का एक बेहतरीन किरदार PCO दादा हैं। जिसे गोपाल दत्त ने निभाया है। उनका किरदार आपको सीरीज से और गहराई से जोड़ने में सफल रहता है। क्योंकि वो किरदार आपको अपने जीवन में जाना पहचाना सा लगता है। विमल की लव इंट्रेस्ट के किरदार में प्रियल हैं। ये सीरीज़ की हिरोइन भी हैं। उन्होंने भी अपने हिस्सा का काम ठीक ढंग से किया है। इनके अलावा सीरीज़ में राजेश जैस, मुकुंद पाल और शबनम वधेरा जैसे एक्टर्स भी हैं। जिन्होंने सीरीज़ को अपने काम से सपोर्ट किया है।
अपनी लगती है कहानी
सीरीज को गुल्लक वाले दुर्गेश सिंह ने गौरव बुम्ब के साथ मिलकर लिखा है। दुर्गेश सीरीज़ के हेड राइटर के साथ को-प्रोड्यूसर भी हैं। ये कहानी भी उनकी ही है। दरअसल फिसड्डी उन्हीं के इलाहाबाद विश्वविद्यालय की ही है। दुर्गेश का मानना है कि छोटे शहरों और कस्बों की भी कहानियां भी सबके सामने आना चाहिए। इन कहानियों को सबके सामने परोसने का जिम्मा उन्होंने उठाया है। इसलिए उनके लिखे हर शो में अपनापन देखने को मिलता है। उससे आप कनेक्ट कर जाते हैं। वो इसलिए क्योंकि वो अपने आसपास की कहानी और किरदारों को शो में लाते हैं। यही वजह है कि आम दर्शक तुरंत उससे अपने आपको जोड़ लेता है। सबसे बड़ा उदाहरण गुल्लक है। इसके बाद अब फिसड्डी का नाम भी जुड गया है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़कर निकलने वाले छात्रों के लिए ये सीरीज नॉस्टैल्जिया है। सीरीज़ में भाई को लेकर एक खूबसूरत है। इसके अलावा 'कैसा मर्द है तू' ये कविता भी आपके भीतर तक प्रवेश करती है।
बिंज वॉच मटेरियल
कुल जमा फिसड्डी को लेकर ये कहा जा सकता है कि आप दे लीजिए। अगर अभी तक नहीं देखा है तो इस वीकेंड इसे आप बिंज वॉच कर सकते हैं। फिसड्डी देख आपको अपनों और अपने रिश्तों का एहसास होगा। सफल और असफल लोगों के बीच अंतर ना करने की सीख मिलेगी। और...मिलेगा आपको कॉलेज लाइफ से गुजरने का मौका। सात एपिसोड की ये सीरीज़, अमेजन एमएक्स प्लेयर पर स्ट्रीम हो रही है। मेरी बात यहीं तक, आप भी फिसड्डी देखें और अपनी राय बनाएं।












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