Berlin Review: सस्पेंस-थ्रिलर कहानी पसंद हैं तो जरूर देखें 'बर्लिन', क्लाइमैक्स उड़ा देगा आपके होश
फिल्म- बर्लिन
स्टारकास्ट- राहुल बोस, अपारशक्ति खुराना, इश्वाक सिंह, कबीर बेदी
डायरेक्टर- अतुल सभरवाल
ओटीटी प्लेटफॉर्म- जी5
स्टार- ***
Berlin Review: आज के समय में सस्पेंस-थ्रिलर कहानियां दर्शकों का दिल जीत रही हैं। इसी कड़ी में बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक अतुल सभरवाल साल 1993 का कालखंड चुनकर उसमें एक इंटेंस और इंट्रेस्टिंग कहानी लेकर आए हैं, जिसमें उनका कसा हुआ निर्देशन और कलाकारों का दमदारदेखने को मिला है।
फिल्म का नाम भले ही 'बर्लिन' हो, लेकिन इसका जर्मनी के बर्लिन से कोई लेना-देना नहीं है। ये फिल्म आज यानी 13 सितंबर 2024 को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी5 पर रिलीज हुई है। जान लें कि ये फिल्म आपको देखनी चाहिए या नहीं।

फिल्म 'बर्लिन' की कहानी
-फिल्म की कहानी में साल 1993 का समय दिखाया गया है जिसमें दिल्ली में 'ब्यूरो' नामक खुफिया एजेंसी के सोवियत डेस्क के हेड जगदीश सोढ़ी (राहुल बोस) एक मूक-बधिर युवक अशोक (इश्वाक सिंह) को संदिग्ध जासूस और कातिल के तौर पर गिरफ्तार करते हैं।
-अशोक पर 1993 में रूसी राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन की भारत यात्रा के दौरान उनकी हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप है। साथ ही उस पर भारतीय खुफिया विभाग के जासूस को मारने का भी आरोप लगा है। जगदीश उसे जर्मन जासूस मानता है।
-मूक-बधिर अशोक से पूछताछ के लिए साइन लैंग्वेज के स्पेशलिस्ट और मूक-बधिर स्कूल में टीचर के तौर पर काम करने वाले पुश्किन वर्मा (अपारशक्ति खुराना) को नियुक्त किया जाता है। जैसे-जैसे पुश्किन, अशोक के साथ अपनी पूछताछ में आगे बढ़ता है, वैसे-वैसे उसे जासूसों की कार्यशैली, नौकरशाही, राजनीति और प्रतिद्वंद्वी जासूसी विभाग 'विंग' के काले सच का पता चलता है।
-वहीं पुश्किन खुद को जासूसी के खतरनाक षड्यंत्र में फंसा हुआ पाता है। मगर वह अशोक के साथ अपना एक मजबूत कनेक्शन महसूस करने लगता है।
-प्रतिद्वंद्वी जासूसी संस्था 'विंग' उसका इस्तेमाल चारे के रूप में करके इस पूछताछ को एक ऐसा भयानक मोड़ पर ला देती है, जिसके कल्पना तक पुश्किन ने नहीं की थी, मगर अब पुश्किन यह तय कर चुका है कि उसे अशोक की सच्चाई पता करनी है।
-क्या वह अशोक की असलियत जान पाएगा या फिर दो एजेंसियों की राइवलरी का शिकार होकर अपना सबकुछ गंवा देगा। ये जानने के लिए आपको फिल्म देखनी होगी।
'बर्लिन' मूवी का रिव्यू
-बॉलीवुड के फेमस लेखक और डायरेक्टर अतुल सभरवाल इससे पहले वेब सीरीज 'जुबली' लेकर आए थे जो कि लोगों को खूब पसंद आया था। वे 'मिडनाइट लॉस्ट एंड फाउंड' और 'औरंगजेब' के लेखन-निर्देशन भी कर चुके हैं। डार्क और इंटेंस ड्रामा उनकी शैली है और 'बर्लिन' में भी उन्होंने कुछ इस तरह का ही काम किया है।
-हालांकि फिल्म की गति थोड़ी धीमी है, मगर इसका थ्रिलर अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आएगा। डायरेक्टर अतुल सभरवाल ने रूसी राष्ट्रपति के कत्ल की साजिश के बहाने देश की खुफिया एजेंसी में फैले पॉलिटिक्स को फिल्म का मेन बेस बनाया है।
-फिल्म की कहानी कुछ नई है। अतुल की कहानी का ये पहलू भी मजेदार है कि कैसे दिल्ली के बर्लिन नामक कॉफी हाउस में खुफिया बातचीत को राज बनाए रखने के लिए इन मूक-बधिर लोगों का इस्तेमाल किया जाता है। फिल्म का स्क्रीनप्ले भी काफी जबरदस्त है।
-आइरिन धर मलिक का संपादन चुस्त है। सिनेमेटोग्राफर श्रीदत्त नामजोशी ने बहुत ही अच्छा काम किया है। फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक भी दमदार है। फिल्म का क्लाइमैक्स शॉकिंग तो है, मगर बहुत जल्दी निपट जाता है। हालांकि सभी कलाकारों ने बहुत ही शानदार काम किया है। अगर आपको थ्रिलर और सस्पेंस पसंद है तो ये फिल्म देखी जा सकती है।












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