Asha Bhosle World Record: खुद की पहचान बचाने के लिए बदला अंदाज! फिर रच दिया संगीत का सबसे बड़ा इतिहास!
Asha Bhosle Guinness World Record: भारतीय संगीत जगत के लिए आज का दिन बेहद काला और दुखद साबित हुआ है। अपनी खनकती आवाज से सात दशकों तक करोड़ों दिलों पर राज करने वाली महान गायिका आशा भोसले (Asha Bhosle) का निधन हो गया है। उनके जाने से संगीत के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत हो गया है, जिसकी भरपाई शायद कभी मुमकिन नहीं होगी।
आशा ताई पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी बीमारियों से जूझ रही थीं। उन्हें शनिवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में एडमिट कराया गया था। उन्हें सांस लेने में तकलीफ (Respiratory issues) और हृदय संबंधी दिक्कतें थीं। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी हालत काफी गंभीर थी और रविवार दोपहर मल्टिपल ऑर्गन फेलियर की वजह से उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

उनका पार्थिव शरीर उनके घर ले जाया गया है और सोमवार को शिवाजी पार्क में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। उनके निधन की खबर फैलते ही बॉलीवुड से लेकर आम फैंस तक हर कोई गहरे सदमे और दुख में डूबा हुआ है। आइए जानते हैं किस तरह आशा ताई ने संघर्षों से निकलकर विश्व रिकॉर्ड तक का सफर तय किया..

उपलब्धियां और वो ऐतिहासिक विश्व रिकॉर्ड
आशा भोसले के नाम संगीत के इतिहास का एक ऐसा कीर्तिमान दर्ज है, जिसे छू पाना किसी भी कलाकार के लिए एक बड़ी चुनौती है। साल 2011 में उन्हें आधिकारिक तौर पर 'दुनिया की सबसे अधिक गाने रिकॉर्ड करने वाली कलाकार' के रूप में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शामिल किया गया था।

20 भाषाओं में गाए थे 11000 से ज्यादा गाने
उन्होंने अपने आठ दशक लंबे करियर में 20 से अधिक भारतीय भाषाओं में 11,000 से भी ज्यादा सोलो और डुएट गाने रिकॉर्ड किए। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनकी कड़ी मेहनत को दर्शाती है, बल्कि संगीत के प्रति उनके अटूट समर्पण का भी प्रमाण है, जिसने उन्हें वैश्विक पटल पर एक अद्वितीय स्थान दिलाया।

ऐसा करने वाली पहली भारतीय गायिका बनीं
आशा जी का करियर केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं था, बल्कि उनकी झोली में देश-दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार भी शामिल रहे। वे ग्रैमी अवॉर्ड्स के लिए नामांकित होने वाली पहली भारतीय गायिका बनीं, जिसने भारतीय संगीत की गूंज विदेशों में भी पहुंचाई। उन्हें 'उमराव जान' की कालजयी गजलों और 'इजाजत' जैसे गीतों के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

दादा साहब फाल्के और पद्म विभूषण पुरस्कार
भारत सरकार ने उनकी महानता को स्वीकारते हुए उन्हें दादा साहब फाल्के पुरस्कार और पद्म विभूषण जैसे सर्वोच्च नागरिक सम्मानों से नवाजा। उनकी आवाज की खनक और हर गाने में एक नई जान फूंकने की कला ने उन्हें संगीत प्रेमियों की कई पीढ़ियों का पसंदीदा बना दिया।

खुद की पहचान बचाने के लिए बदला अंदाज!
मंगेशकर परिवार में जन्मी आशा भोसले के लिए अपनी एक अलग पहचान बनाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। शुरुआत में उनकी आवाज उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर से काफी मिलती-जुलती थी, जिस कारण उन्हें काम मिलने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

लेकिन आशा ताई ने हार मानने के बजाय अपनी शैली को बदलने का साहसी फैसला लिया। उन्होंने वेस्टर्न संगीत सीखा, कव्वाली और गजलों में महारत हासिल की और कैबरे जैसे आधुनिक गीतों को एक नया आयाम दिया। आर. डी. बर्मन और ओ. पी. नैयर जैसे संगीतकारों के साथ उनकी जुगलबंदी ने भारतीय सिनेमा को वह संगीत दिया जो आज भी हर पार्टी और हर महफिल की जान है।












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