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Asha Bhosle: कौन होगा आशा भोसले का उत्तराधिकारी? किसको मिलने वाली है अरबों की संपत्ति, दो नाम रेस में सबसे आगे

Asha Bhosle Heir: भारतीय संगीत जगत के एक स्वर्णिम युग का अंत हो गया है। अपनी जादुई आवाज से सात दशकों तक दुनिया को मंत्रमुग्ध करने वाली 'स्वर कोकिला' आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनके जाने से न केवल सुरों की दुनिया में एक खालीपन आया है, बल्कि उनकी विशाल संपत्ति और बिजनेस साम्राज्य के उत्तराधिकार को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।

आशा ताई ने अपने पीछे केवल हजारों कालजयी गाने ही नहीं, बल्कि करोड़ों की चल-अचल संपत्ति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला एक सफल बिजनेस नेटवर्क भी छोड़ा है। अब संगीत प्रेमियों और जानकारों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंगेशकर खानदान की इस आखिरी स्तंभ की अतुलनीय विरासत का असली हकदार कौन होगा और उनकी वसीयत में किन नामों पर मुहर लगी है?

Asha Bhosle Heir

वसीयत में पोती जनेई भोसले का पलड़ा भारी?

मीडिया और पारिवारिक गलियारों में इस बात की सबसे प्रबल चर्चा है कि आशा जी ने अपनी वसीयत का एक बड़ा हिस्सा अपनी पोती जनेई भोसले के नाम किया है। इसके पीछे कई ठोस कारण नजर आते हैं:

  • दादी की परछाईं: जनेई पिछले कई वर्षों से आशा जी के सबसे करीब रहीं और उनके हर सुख-दुख में उनकी परछाईं बनकर साथ खड़ी रहीं।
  • डिजिटल विरासत: आशा ताई के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और उनके डिजिटल साम्राज्य की पूरी कमान जनेई ही संभाल रही थीं।
  • निजी संग्रह: माना जा रहा है कि आशा जी के ऐतिहासिक हीरों के गहने, उनकी सिग्नेचर साड़ियां और अन्य बेहद कीमती निजी संग्रह सीधे तौर पर जनेई को सौंपे जा सकते हैं।
  • सांस्कृतिक उत्तराधिकारी: जनेई न केवल उनकी सेवा कर रही थीं, बल्कि उनकी गायकी की विरासत को भी आगे बढ़ाने का प्रशिक्षण ले रही हैं।

बिजनेस साम्राज्य और रॉयल्टी

आशा भोसले महज एक पार्श्व गायिका नहीं, बल्कि एक विजनरी बिजनेसवुमन भी थीं। उनके वित्तीय साम्राज्य का दायरा काफी विस्तृत है:

इंटरनेशनल रेस्टोरेंट चेन: उनके प्रसिद्ध रेस्टोरेंट 'Asha's' का कारोबार दुबई, कुवैत और ब्रिटेन जैसे देशों तक फैला हुआ है।

सालाना रॉयल्टी: उनके गानों से हर साल करोड़ों रुपये की रॉयल्टी आती है।

प्रबंधन: जानकारों का दावा है कि इस कमर्शियल प्रॉपर्टी और रॉयल्टी के मुख्य वारिस उनके बेटे आनंद भोसले हो सकते हैं, जो लंबे समय से उनके सभी पेशेवर और कानूनी कार्यों का प्रबंधन देख रहे थे।

प्रभु कुंज और कानूनी वसीयत का सस्पेंस

मुंबई के पेडर रोड स्थित ऐतिहासिक 'प्रभु कुंज' अपार्टमेंट, जो मंगेशकर परिवार की पहचान रहा है, उसकी कानूनी मिल्कियत हमेशा से चर्चा का विषय रही है। सूत्रों की मानें तो आशा जी ने किसी भी संभावित विवाद से बचने के लिए एक अत्यंत पुख्ता और स्पष्ट कानूनी वसीयत तैयार की है।

यह वसीयत केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें उन सामाजिक संस्थाओं का भी विशेष उल्लेख होने की संभावना है जिनसे आशा ताई जीवनभर जुड़ी रहीं। अब पूरी दुनिया की नजरें उस आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं जो यह साफ करेगी कि सुरों की इस रानी की विरासत को कौन आगे बढ़ाएगा।

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