Soma Mandal: SAIL करेगी प्राचीन शिव मंदिर को संरक्षित, Bhilai Steel Plant सबसे बड़ी इकाई इसलिए अपेक्षा अधिक
SAIL चेयरमैन सोमा मंडल तीन दिवसीय भिलाई दौरे पर रहीं, उन्होने शुक्रवार को जहां छत्तीसगढ़ के भिलाई इस्पात संयंत्र का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने बीएसपी अधिकारियों की बैठक लेकर राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत उत्पादन बढ़ाने की बात कही। वहीं वे दुर्ग जिले के चरोदा रेलवे यार्ड के समीप स्थित प्राचीन देवबलोदा शिव मंदिर पहुंची। जहां उन्होंने भगवान शिव की पूजा अर्चना की, इस दौरान उन्होंने मंदिर के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए मंदिर को गोद लेने की बातें कही।

राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत तय करें लक्ष्य: सोमा मंडल
भिलाई इस्पात संयंत्र के दौरे पर पहुंचे सेल चेयरमैन सोमा मंडल ने परफॉर्मेंस मीटिंग के दौरान अधिकारियों से को संयंत्र में सुरक्षा और उत्पाद बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए राष्ट्रीय इस्पात नीति के तहत साल 2030 तक कंपनी के उत्पादन क्षमता को दोगुना करते हुए 50 मिलियन टन तक पहुंचाने के उद्देश्य को लेकर काम करने का बात कहीं है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भिलाई इस्पात संयंत्र और सेल की कैपटिव माइंस राव घाट की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

सेल विस्तारीकरण योजना पर कर रहा काम, भिलाई से अपेक्षा अधिक
सेल चेयरमैन ने बताया सेल प्रबंधन, इस्पात मंत्रालय के द्वारा दिए गए लक्ष्य की प्राप्ति के लिए विस्तारीकरण की योजनाओं पर कार्य कर रहा है। सेल की सभी इकाइयों में मॉडर्नाइजेशन 4.0 पर कार्य किया जा रहा है। सभी यूनिट के लिए एक विशेष कार्य योजना के तहत पॉलिसी तैयार की जा रही है। बीएसपी सेल की सबसे बड़ी इकाई है इसलिए बीएसपी और रावघाट से अपेक्षा अधिक है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सेल के स्टील की मांग बढ़ी है।

ASI से सेल करेगा अनुबंध, CSR मद से खर्च होगी राशि
दरअसल दुर्ग जिले के देवबलोदा स्थित शिव मंदिर का निर्माण 13 -14 वीं शताब्दी में किया गया है। सेल चेयरमैन सोमा मंडल ने अपने भिलाई दौरे के दौरान यहां आने की इच्छा जताई थी। इसके बाद अब इस मंदिर को सेल द्वारा संरक्षित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए आने वाले दिनों में सेल और आर्कियोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया ASI के बीच अनुबंध किया जाएगा। जिसके बाद यहां रखें कलाकृतियों, प्राचीन मूर्तियों, मंदिर परिसर, कुंड आदि को संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए भिलाई इस्पात संयंत्र के CSR मद से राशि खर्च की जाएगी।

13 शताब्दी में कलचुरी राजाओं ने कराया था निर्माण
मंदिर के ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए मंदिर के मंडप, कुंड, सती माता मंदिर , गर्भगृह का जीर्णोद्धार किया जाएगा। इसके अलावा मंदिर परिसर के बाहर पेयजल शौचालय दर्शनाथियों के लिए आराम की व्यवस्था की जाएगी। सेल चेयरमैन ने यहां एक पौधा भी लगाया। राष्ट्रीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के अनुसार इस शिव मंदिर का निर्माण कल्चुरी राजाओं ने 13 वीं शताब्दी में कराया। नवरंग शैली में निर्मित मंदिर की बनावट काफी भव्य है। मंदिर की दीवारों पर की गई नक्काशी भी उत्कृष्ट व आश्चर्यजनक है। मंदिर की दीवारों पर पशु, पक्षी, पेड़ पौधे व रामायण के किरदारों के साथ-साथ नित्य संगीत, मिथुन मूर्तियों को भी पत्थरों पर उकेरा गया है। मंदिर का गुम्बद आज भी अधूरा है।

आउटसोर्सिंग पर काम चलाने की कवायद, NPC कर रही सर्वे
स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड के सभी इकाइयों को मिलाकर नियमित कर्मचारियों की संख्या करीब 55 हजार है। ठेका मजदूरों की संख्या लगभग 70 हजार है। सेल की इकाइयों में ठेका प्रथा बढ़ती जा रही है। आउट सोर्सिंग के लिए नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल की मदद ली गई है। NPC सेल की सभी इकाइयों में सर्वे कर रही है। कहां-कहां मैनपॉवर कम किए जा सकते हैं। कहां-आउट सोर्सिंग से काम कराया जा सकता है। इन तमाम विषयों पर रिपोर्ट आने के बाद प्रबंधन मैनपॉवर को लेकर एक नई पॉलिसी तैयारी करेगी। निश्चित रूप से मैनपॉवर कास्ट कम करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।
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