कवर्धा: भाइयों की कलाई पर सजेगी सब्जियों के बीज से बनी भोरबंधन राखियां, महिला समूहों को मिला रोजगार

कबीरधाम जिले में बिहान समूह की दीदियाँ अब राखियां तैयार कर रही है। रक्षा बंधन त्यौहार को देखते हुए बिहान की महिला समूहों की महिलाओं ने भाइयों की कलाइयों में प्राकृतिक राखियां सजाने की तैयार की जा रही है।

कवर्धा, 03 अगस्त। छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार की योजनाएं अब गांवों की महिलाओं को रोजगार के अवसर प्रदान कर रही है। जिसके परिणाम स्वरूप महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। राज्य के कबीरधाम जिले में बिहान समूह की दीदियाँ अब राखियां तैयार कर रही है। इन राखियों की ब्रांडिंग भी की जा रही है। भाई-बहनों का पवित्र रक्षाबंधन(Raksha Bandhan) का त्यौहार इसी माह के 11 अगस्त को मनाया जाएगा। पवित्र रक्षा बंधन त्यौहार को देखते हुए बिहान की महिला स्वसहायता समूहों की महिलाओं ने भाइयों की कलाइयों में प्राकृतिक चीजों से निर्मित राखियां सजाने की तैयारियों में लगी है।

raksha bandhan rakhi

बिहान की दीदियों ने तैयार की भोरबंधन राखियां
कबीरधाम(kabeerdham) जिले में महिला स्व सहायता समूहों ने जिला पंचायत की मदद से राखियाँ बनाने का काम शुरू किया है। 15 दिनों की ट्रेनिंग के बाद महिला समूह की दीदियों ने यह काम शुरू कर दिया। कबीरधाम जिले में भोरमदेव के प्रसिद्ध मंदिर के कारण भोर शब्द और भाई बहन के पवित्र बंधन के त्यौहार से भोर बंधन ब्रांड से राखियाँ बनाई जा रही है। इसके लिए महिलाओं अपनी राखियों को भोरबंधन नाम दिया है।

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बनाए गए सात काउंटर, सी मार्ट में भी उपलब्ध
महिला समूह द्वारा अलग अलग प्रकार की राखियां तैयार की जा रही है, जिसमें भोरबंधन नाम की यह राखियों की किमत 20 रूपए से 35 से 40 रूपए तक की खुले बाजारों मे उपलब्ध रहेंगी। भोर बंधन नाम की राखियों की बिक्री के लिए कबीरधाम जिले में सात अलग-अलग कांउटर भी बनाए गए है। जिसमें कलेक्टोरेट परिसर, सी-मार्ट, सुमीत बाजार, और जिले के सभी विकासखण्ड के जनपद पंचायत मुख्यालयों में भोरबंधन ब्रांड की राखियां उपलब्ध रहेगी।

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गेंहूं, चावल, सब्जियों के बीज से बन रही राखियां
बिहान समूह की दीदियों को जिला प्रशासन ने प्लास्टिक की अपेक्षा प्राकृतिक चीजों से बनने वाली राखियों को तैयार करने की ट्रेनिंग दी। यह सभी राखियां बहुत आकर्षक तो है ही साथ ही राखियों को बनाने के लिए धान का दाना, चांवल, गेहू, लौकी व अन्य सब्जियों के बीज का इस्तेमाल किया इनमें किया जा रहा है। इससे इस पवित्र रक्षा बंधन पर्व का महत्व और बढ़ गया है। जानकारी के अनुसार बीते सप्ताह में ही महिला समूहों ने 20 हजार की भोरबंधन राखियों की बिक्री की है।

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जिले के17 समूहों की 130 महिलाओं को मिल रहा रोजगार
कबीरधाम जिले में महिला समूहों को आर्थिक मदद और रोजगार की दिशा में जोड़ने का काम भी किया जा रहा है।छत्तीसगढ़ सरकार के आर्थिक विकास व रोजगार मूलक गतिविधियों से जोड़ते हुए जिले की 17 सक्रिय महिला स्वसहायता समूहों को राखियां बनाने और उनके लिए स्वतंत्र बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है। वर्तमान में इस समूहों द्वारा भोरबंधन नाम से 6 हजार 600 से अधिक राखियां तैयार कर ली गई। बाजार के मांग के आधार पर समूहों को लगभग 30 हजार राखियां बनाने के लिए तैयार किया जा रहा है।

कोविड के बाद बाजारों में रौनक
कलेक्टर जनमेजय महोबे ने स्वसहायता समूहों की आजीविका मूलक गतिविधियों के अवलोकन के दौरान महिला स्व सहायता समूहों की महिलाओं से चर्चा करते हुए कहा था कि इस बार दोगुनी उत्साह और उमंग से भाई-बहनों का पवित्र रक्षा बंधन मनाया जाएगा,क्योंकि इस बार कोविड संक्रमण के नियंत्रण के बाद बाजार में रौनक देखने को मिल रही है। कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ के साथ कलेक्टोरेट परिसर में समूहों द्वारा लगाई गई राखी के स्टॉल का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कलेक्टोरेट परिसर में लगाई गई राखी के स्टॉल का शुभारंभ किया। राजानवागांव की महिला स्व सहायता समूह ने बताया कि उनके समूह ने राखियां बनाने में दोगुनी मेहतन की है। बहुत कम समय में समूह ने 1000 राखियां तैयार की है।

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