Durg News: मंत्रालय में बताया पहचान, तहसीलदार बनाने ठगे 15 लाख, तीन महीने से फरार था आरोपी
छत्तीसगढ़ सरकार के मंत्रालय में ऊंचे पदों के लोगों से पहचान होने का दावा करने वाले शख्स को दुर्ग पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस शख्स ने नायब तहसीलदार पद पर नौकरी लगाने के नाम पर 15 लाख रुपए की धोखाधड़ी की थी। इस युवक की तलाश पुलिस को तीन महीने से थी। आरोपी ने पीड़ित की पुत्री को नायब तहसीलदार और पुत्र को एम्स में नौकरी लगाने के नाम पर पैसे लिए। जिसके बाद फरार हो गया था। जिसे पकड़ने में अब पुलिस ने सफलता प्राप्त की है।

दरअसल पुलिस रात्रि गश्त के दौरान संदिग्ध लोगों से पूछताछ कर रही थी। इस दौरान आरोपी युवक पुलिस के हत्थे चढ़ा है। पुलिस के अनुसार प्रार्थी निमाई देवनाथ ने लिखित शिकायत दी थी कि माह फरवरी 2021 में अपने पुत्री को नायब तहसीलदार एवं पुत्र को एम्स अस्पताल में शासकीय नौकरी में लगवाने के नाम से आरोपी श्रेयांश यादव एवं अभिजीत सिंह ने 15 लाख रूपये लिया था।

पैसे लेकर नहीं लगवाई नौकरी, फरार हुआ आरोपी
पीड़ित से पैसे लेने के बाद आरोपियों द्वारा नौकरी लगवाने का झांसा देता रहा लेकिन न ही उसने पैसा वापिस किया गया। इसके बाद लगातार संपर्क करने के बाद से ही आरोपी फरार हो गया। इसके बाद पीड़ित ने पुलिस चौकी पहुंचकर इसकी शिकायत की इस रिपोर्ट पर 30 अगस्त 2022 को धारा 420, 34 भादवि का अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
पुलिस कर रही पुछताछ, और कितने को ठगा
दुर्ग के इस परिवार को मंत्रालय में अपनी अच्छी पहचान बता कर आरोपी ने 15 लाख रुपए ठग लिया था। लेकिन नौकरी नहीं लगाई। आखिरकार प्रार्थी की शिकायत पर पुलिस ने ठग को गिरफ्तार किया। अब पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है, कि अब तक कितने लोगों को इस नटवरलाल ने बेवकूफ बनाकर कितने रुपए ठगे हैं।
एसपी ने बनाई थी जांच कमेटी
इस अपराध की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ अभिषेक पल्लव ने नगर पुलिस अधीक्षक निखिल राखेचा के निर्देशन में टीम गठित किया गया। तीन माह से फरार चल रहा आरोपी पुलिस को चक्मा देकर लगातार अपना स्थान बदल रहा था।धोखाधड़ी के शातिर आरोपी श्रेयांश यादव को स्मृति नगर क्षेत्र में रात्रि चेकिंग के दौरान गिरफ्तार किया गया। आज 7 नवंबर को न्यायालय दुर्ग में पेश किया जाकर ज्युडिशियल रिमाण्ड पर भेजा गया।












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