Durg District Hospital के डाक्टरों ने राज्योत्सव के दिन बनाया रिकॉर्ड, 39 परिवारों में गूंजी किलकारी
छत्तीसगढ़ में एक नवंबर को राज्य स्थापना दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान जिलों में राज्योत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वही दुर्ग जिले में जिला अस्पताल ने एक उपलब्धि अपने नाम कर लिया। राज्य स्थापना दिवस के दिन जिला अस्पताल के मातृ शिशु अस्पताल में 39 बच्चों की किलकारी गूंजी है। सरकारी अस्पताल में संस्थागत प्रसव में आई वृद्धि से स्वास्थ्य विभाग काफी उत्साहित है।

एक ही दिन में 22 सिजेरियन प्रसव, बनाया रिकॉर्ड
जिला अस्पताल की बड़ी उपलब्धि के बीच खास बात यह है कि मातृ शिशु अस्पताल में पैदा हुए सभी 39 बच्चे स्वस्थ हैं। समान्यतः यहां 15 से 18 महिलाएं प्रसव के लिए पहुंचती थी। इनमें 17 लड़के व 22 लड़कियां हैं। वहीं जिला अस्पताल में अब तक 8 से 10 सिजेरियन ऑपरेशन किये जाते थे। लेकिन एक नवंबर को 22 सिजेरियन डिलीवरी करवाई गई है। जो जिला अस्पताल के लिए अपने आप में यह एक बड़ी उपलब्धि है।

अचानक बढ़ी संख्या, डॉक्टरों ने चुनौती किया स्वीकार
दरअसल जिला अस्पताल में पहले से भर्ती और 1 नवंबर को प्रसव के लिए पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या में वृद्धि देखी गई। अचानक पहुंची महिलाओं को संस्थागत प्रसव कराना जिला अस्पताल के मातृ शिशु वार्ड के नर्स और डॉक्टरों के लिए एक बड़ी चुनौती थी। लेकिन इस चुनौती को स्वीकार करते हुए डॉक्टरों की टीम ने यह प्रसव करवाया। जिसमें तीनों शिफ्ट मिलाकर 25 कर्मचारियों ने अपना सहयोग दिया। यानी 6 घण्टे की शिफ्ट में औसतन 13 बच्चों ने जन्म लिया है। जिला अस्पताल प्रबंधन ने यह रिकॉर्ड 24 घंटे में हुए प्रसव के आधार पर दर्ज कराया है।
100 बिस्तर मातृ शिशु अस्पताल में उपलब्ध है सुविधाएं
दुर्ग सीएमएचओ डॉ जेपी मेश्राम ने बताया कि जिला अस्पताल में अलग से गर्भवती महिलाओं के लिए 100 बिस्तर मातृ शिशु वार्ड का निर्माण कराया है। इस वार्ड में स्वास्थ विभाग ने सभी जरूरी इक्विपमेंट वह मशीनें लगाई है। जिससे प्रसव के दौरान शिशु मृत्यु दर व मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सके। इसके अलावा इस वार्ड में 25 से अधिक स्टाफ नर्स व 5 डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है। इस तरह मामले में आज जिला अस्पताल पूरे प्रदेश में नम्बर वन बन गया है।
टीम वर्क से मिली सफलता, रात भर जागती रहीं नर्सें
जिला अस्पताल में इस सफलता को मातृ शिशु अस्पताल के सभी डॉक्टरों और नर्सों ने टीम वर्क के माध्यम से हासिल किया। जिसमें विभाग से डॉ उज्ज्वला देवांगन, डॉक्टर बीआर साहू डॉ स्मिता, इसके अलावा अलावा डॉ संजय वॉलमान्द्रे, निश्चेतना विशेषज्ञ डॉक्टर बसंत चौरसिया, डॉक्टर पूजा पटेल और सभी स्टाफ नर्सों ने भी रात भर जागकर सिजेरियन प्रसव में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।












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