Bhilai Nigam में राजस्व बढ़ाने की कवायद, ड्रोन से तैयार होगा सम्पत्ति का नक्शा, खाली भुमि पर लगेगा टैक्स

छत्तीसगढ़ में सबसे अधिक राजस्व के लिए जाना जाने वाला नगर निगम भिलाई का कोष खाली होता जा रहा है। आर्थिक संकट से जूझ रहा भिलाई निगम अब अपनी आय बढ़ाने के लिए के प्लान तैयार कर रहा है। इसके तरह एक बड़ा बदलाव भी निगम महापौर परिषद ने किया है। अब भिलाई निगम के सम्पत्तिकर वसूली व निर्धारण करने के लिए अब नई एजेंसी को जिम्मेदारी दी जा रही है।

नई कम्पनी को मिला काम, ड्रोन से होगा सम्पत्ति का सर्वे

नई कम्पनी को मिला काम, ड्रोन से होगा सम्पत्ति का सर्वे

भिलाई नगर निगम क्षेत्र में अब महानगरों की तर्ज पर दिल्ली की कंपनी सीई इन्फो सिस्टम को संपत्ति सर्वे कार्य का ठेका दिया गया है। यह कम्पनी अब निगम क्षेत्र अंतर्गत आने वाली संपत्ति का ड्रोन के माध्यम से सर्वे करेगी। जीआईएस मैप से कोई भी भवन इससे अछूते नहीं रहेंगे, उनका एरिया, लोकेशन, क्षेत्रफल सभी की सही जानकारी इससे मिल जायेगी, स्व विवरणी की जांच में भी आसानी होगी। इससे पहले स्पेरो इंडिया कम्पनी को सम्पत्तिकर वसूली का काम दिया गया था। जिसे वसूली के एवज में निर्धारित कमीशन का भुगतान किया जाता था।

जीआईएस मैपिंग से बढ़ेगा राजस्व, गलत जानकारी भरने वाले रहे सावधान

जीआईएस मैपिंग से बढ़ेगा राजस्व, गलत जानकारी भरने वाले रहे सावधान

दरअसल प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना के तहत नगर निगमों में जीआईएस मैपिंग का आदेश पहले ही हो चुका है। कुछ निगमों में यह कार्य शुरू हो गया है। इससे निगम के राजस्व में वृद्धि होने की उम्मीद जताई जा रही है। भिलाई के संपत्ति सर्वे कार्य आने वाले महीने में शुरू कर दिया जाएगा। उपायुक्त नरेंद्र बंजारे ने बताया कि वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट के तहत ड्रोन से संपत्ति का सर्वे कर जीआईएस मैप तैयार कर डिजिटल डोर नम्बर जारी किया जाएगा। अब लोग प्रॉपर्टी, मकानों और दुकानों की गलत जानकारी नहीं दे पाएंगे। गलत स्व विवरणी जमा करने वाले इसके दायरे में आ जाएंगे। और इनसे वास्तविक एरिया के मुताबिक वसूली की जाएगी।

कम होगा देनदारियों का बोझ, मिलेगा नियमित वेतन

कम होगा देनदारियों का बोझ, मिलेगा नियमित वेतन

निगम के इस नए एक्शन प्लान से निगम के अधिकारी, कर्मचारियों को वेतन के लिए भी फंड उपलब्ध हो सकेगा। भिलाई निगम का राजस्व बढ़ने से बिजली, पानी ठेकेदारों की देनदारियों का बोझ कम हो सकेगा। इसके साथ ही निगम क्षेत्र में विकास कार्यों को भी गति मिलेगी, निगम के सभी जोन में स्टाफ की कमी को प्लेसमेंट के माध्यम से दुर किया जा सकेगा। क्योंकि फिलहाल भिलाई समेत सभी नगरीय निकायों में नई भर्ती पर रोक लगाया गया है।

निर्माणाधीन और खाली भूमि का होगा निर्धारण

निर्माणाधीन और खाली भूमि का होगा निर्धारण

वर्तमान में भिलाई निगम क्षेत्र अंतर्गत स्थित भवनों भूमियों पर संपत्तिकर समेकित कर स्व निर्धारण प्रक्रिया के अंतर्गत लिया जा रहा है। निर्माणाधीन आवासीय एवं व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स जैसे-जैसे पूर्ण हो रहे इनका संपत्तिकर, समेकितकर स्व विवरणी के माध्यम से जमा कराने का काम किया जा रहा हैं। निगम क्षेत्र में ऐसी खुली भूमि जिसका आवासीय या व्यवसायिक व अन्य प्रयोजन के लिए डायवर्सन हो चुका है। ऐसे खुली भूमि में भवन निर्माण अनुज्ञा जारी करने के पूर्व डायवर्सन के पश्चात वर्ष से संपत्ति कर निर्धारण कर जमा कराया जा रहा है।

स्व विवरणी की जांच करेगा निगम, अतिरिक्त निर्माण पर लगेगा टैक्स

स्व विवरणी की जांच करेगा निगम, अतिरिक्त निर्माण पर लगेगा टैक्स

इसके अलावा निगम क्षेत्र में जिन भवनों भूमि स्वामियों द्वारा अब तक संपत्तिकर जमा नहीं किया गया है। उन पर निर्माण वर्ष से अधिभार सहित स्व निर्धारण प्रक्रिया के अंतर्गत संपत्तिकर, समेकितकर निर्धारण कर जमा लिया जा रहा है। संपत्तिकर वसूली के लिए संपत्तियों की जांच की जाएगी। अवैध नल कनेक्शन का नियमितीकरण किया जाएगा, दुकानों की नीलामी ई ऑक्शन के माध्यम से किया जा रहा है। बड़े भवनों की नापजोख की जाएगी तथा अतिरिक्त निर्माण की भी जांच होगी। स्व-विवरणी प्राप्त होने के उपरांत रैंडमली जांच की जाएगी।

निगम करेगा कुर्की की कारवाई, खाली भूमि पर लगेगा टैक्स

निगम करेगा कुर्की की कारवाई, खाली भूमि पर लगेगा टैक्स

राजस्व वसूली बढ़ाने के लिए भवन एवं भूमि स्वामियों को उनके मोबाइल पर मैसेज के माध्यम से सूचित कर वसूली की कार्रवाई की जा रही है। पूर्व वर्षो के बकाया राशि की वसूली के लिए धारा 173 के तहत डिमांड, धारा 174 के अंतर्गत मांग सूचना एवं धारा 175 के अंतर्गत कुर्की वारंट जारी कर वसूली की जा रही है। अब तक 66 बड़े बकायेदारों की सूची निगम ने तैयार की है। रिक्त भूखंडों का पता लगाकर संपत्तिकर आरोपित किया जाएगा। वार्षिक भाड़ा मूल्य की समीक्षा करने नए सिरे से संपत्तिकर हेतु टैक्स जोन का निर्माण किया जाएगा। विज्ञापन बोर्ड के माध्यम से भी राजस्व बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

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