UP: जब आखिरी बार अपने पैतृक गांव आए थे कैप्टन अंशुमान, बाबा से कही थी यह बात
Captain Anshuman News Deoria: देवरिया के रहने वाले कैप्टन अंशुमान सिंह जवानों को बचाते हुए सिचाचिन ग्लेसियर में शहीद हो गये। जैसे ही इनके मौत की खबर इनके पैतृक गांव देवरिया के बरडीहा दलपत पहुंची वहां कोहराम मच गया। एक तरफ जहां लोग शोक में डूब गए वहीं दूसरी तरफ अपने लाल पर देश के लिए न्यौछावर होने पर गर्व की अनुभूति भी है। वह चार साल पहले अपने पैतृक गांव आए हुए थे। इस दौरान उन्होंने अपने बाबा-दादी, चाचा व ग्रामीणों से अच्छे से मुलाकात की थी और काफी समय व्यतीत किया था।
अंशुमान के मन में बचपन से थी देश सेवा की भावना
भारतीय सेना में रेजीडेंट चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात रहे कैप्टन अंशुमान सिंह का अपने पैतृक गांव से खासा लगाव था। उनके पिता रवि प्रताप सिंह सूबेदार के पद पर देश के लिए अपनी सेवा दे चुके हैं। वह बताते हैं कि अंशुमान बचपन से ही आर्मी में जाने का सपना देखने था। देश के लिए कुछ करने की उसकी प्रबल इच्छा ने सेना में पहुंचाया। वह घायल सैनिकाें की सेवा कर उन्हे देश की रक्षा के लिए फिर से तैयार करता था।

यहां हुई शिक्षा
पिता रवि प्रताप सिंह बताते हैं कि सेना में सूबेदार होने के कारण मैंने कई जगह नौकरी की । लेकिन मैंने लखनऊ के राजाजी पुरम में अपना निजी आवास बना रखा है। यहीं पर अंशुमान की पूरी शिक्षा हुई। अंशुमान बचपन से ही मेधावी था।
पैतृक गांव से था खासा लगाव
पिता रवि प्रताप सिंह बताते हैं कि अंशुमान की शिक्षा बेसक लखनऊ से हुई लेकिन उसका अपने पैतृक गांव से खासा लगाव था। वह अक्सर अपने गांव जाता रहता था। यहां के लोगों से मिलना जुलना, यहां रहना उसे पसंद था। गांव पर उसके बाबा- दादी, चाचा- चाची सहित अन्य लोग आज भी रहते हैं।
बाबा से कही थी यह बात
काम की व्यस्तता के कारण अंशुमान चार साल पहले गांव गए थे। इस दौरान उन्होंने अपने बाबा सत्यनारायण सिंह, दादी शांति देवी, चाचा सूर्य प्रताप सिंह, हरि प्रताप सिंह व भानु प्रताप सिंह से मुलाकात की थी और अपने पूरे परिवार के साथ काफी समय व्यतीत किया था। इस दौरान अंशुमान से सभी से खूब बातचीत भी की थी। अंशुमान ने अपने बाबा से जल्द गांव आने और यहां कुछ दिन रहने की बात कही थी। बाबा सत्यनारायण सिंह कहते हैं कि अंशुमान की मौत से अपार दु:ख है। शब्दों में नहीं बयां किया जा सकता है। आज मेरा लाल देश के लिए शहीद हो गया।
गांव में शोक की लहर
गांव के रहने वाले आलोक बताते हैं कि अंशुमान के साथ काफी समय व्यतीत किया है। वह बेहद सरल स्वभाव का जिंदादिल इंसान था। आज उसकी मौत से पूरे गांव में शोक है लेकिन देश के लिए शहीद होने पर गर्व भी है।












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