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कौन हैं डॉ.आश्मा बेगम? लुटियंस दिल्ली में ‘फर्जी डिप्लोमैट’बनकर रहने वाली महिला की सनसनीखेज कहानी,अब गिरफ्तारी

Who is Dr Ashma Begum? दिल्ली की हाई-सिक्योरिटी डिप्लोमैटिक गलियों में अगर कोई महीनों तक बेधड़क घूमता रहे और किसी को शक तक न हो, तो मामला वाकई चौंकाने वाला होता है। ठीक ऐसा ही मामला सामने आया है डॉ. आश्मा बेगम का, जिसने खुद को विदेशी राजनयिक बताकर न सिर्फ लुटियंस दिल्ली के पॉश इलाके में रुतबा बनाया, बल्कि एंबेसियों और हाई-सिक्योरिटी जोन तक में आवाजाही करती रही। अब यह पूरा मामला दिल्ली पुलिस के लिए एक बड़ा सुरक्षा अलर्ट बन गया है।

कौन है डॉ. आश्मा बेगम?

डॉ. आश्मा बेगम असम के गुवाहाटी की रहने वाली बताई जा रही हैं। उम्र करीब 48 साल। बाहर से देखने पर वह एक पढ़ी-लिखी, प्रभावशाली और ऊंचे संपर्कों वाली महिला लगती थीं। वसंत विहार जैसे पॉश इलाके में किराए के मकान में रहती थीं, लेकिन पड़ोसियों को बताती थीं कि यह घर उनका अपना है। वह खुद को डिप्लोमैटिक कॉर्प्स का हिस्सा बताती थीं और अक्सर एक नीली डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट लगी टोयोटा इनोवा में घूमती नजर आती थीं।

Who is Dr Ashma Begum

🟡 कैसे बना फर्जी डिप्लोमैट का भरोसेमंद चेहरा

पुलिस के मुताबिक, आश्मा बेगम ने अपनी पहचान को मजबूत दिखाने के लिए कई दावे किए। वह खुद को रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (RPI) की ऑल इंडिया सेक्रेटरी बताती थीं, जिसका नेतृत्व केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले करते हैं। इसके अलावा उन्होंने राष्ट्रीय खेल संस्थाओं से जुड़े होने और एक विदेशी दूतावास में कंसल्टेंट के तौर पर काम करने का दावा भी किया।

🟡 फर्जीवाड़े की असली स्क्रिप्ट

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन एंड किडनैपिंग सेल (AEKC) की जांच में सामने आया कि यह सब एक सोची-समझी प्लानिंग का हिस्सा था।

पुलिस के अनुसार, आश्मा ने नवंबर 2024 में एक विदेशी दूतावास से टोयोटा इनोवा खरीदी थी, लेकिन उसका रजिस्ट्रेशन अपने नाम ट्रांसफर नहीं कराया। जब दूतावास ने चाणक्यपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई, तो पुलिस से बचने के लिए उसने नकली डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट बनवा ली।

🟡 एंबेसियों में घुसपैठ कैसे की

जांच एजेंसियों का कहना है कि आश्मा बेगम अक्सर एंबेसी से जुड़े सामाजिक कार्यक्रमों में शामिल होती थीं। वहां वह खुद को विदेशी राजनयिक बताकर असली डिप्लोमैट्स और प्रभावशाली लोगों से संपर्क बनाती थीं। इस सोशल नेटवर्किंग के जरिए उसने खुद को एक भरोसेमंद चेहरा बना लिया।

🟡 डॉ. आश्मा बेगम कीगिरफ्तारी कैसे हुई?

15 जनवरी को पुलिस को एक पुख्ता इनपुट मिला कि एक महिला फर्जी डिप्लोमैटिक प्लेट वाली गाड़ी से हाई-सिक्योरिटी इलाकों में घूम रही है। वसंत विहार के बी-ब्लॉक में जाल बिछाया गया। जैसे ही आश्मा बेगम गाड़ी खोलकर अंदर बैठने लगीं, पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। तलाशी में गाड़ी से तीन और नकली डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट और वाहन से जुड़े संदिग्ध दस्तावेज बरामद हुए।

🟡 पूछताछ में खुली पोल

पूछताछ के दौरान वह न तो किसी दूतावास का नाम बता सकीं और न ही कोई वैध डिप्लोमैटिक दस्तावेज दिखा पाईं। बाद में उन्होंने माना कि वह विदेशी छात्रों, खासकर अफ्रीकी देशों के छात्रों को मेघालय की एक यूनिवर्सिटी में दाखिला दिलाने की कंसल्टेंसी कर रही थीं।

🟡 कानूनी शिकंजा और जांच

डॉ. आश्मा बेगम पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की कई धाराओं में फर्जीवाड़ा और प्रतिरूपण के आरोप लगे हैं। कोर्ट ने उन्हें छह दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। पुलिस अब उनके मोबाइल, डिजिटल डेटा और संपर्कों की जांच कर रही है, ताकि यह पता चल सके कि यह फर्जीवाड़ा कब से चल रहा था और इसमें कोई और शामिल तो नहीं है।

🟡 राष्ट्रीय सुरक्षा पर बड़ा सवाल

गणतंत्र दिवस से ठीक पहले सामने आया यह मामला दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पुलिस मान रही है कि यह गिरफ्तारी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है। अब जांच का फोकस इस बात पर है कि आखिर एक आम महिला इतने समय तक डिप्लोमैटिक जोन में कैसे बेखौफ घूमती रही।

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