'बहुत सारी गलतियां हैं, दोबारा दायर करें', बांसुरी स्वराज के खिलाफ याचिका पर सोमनाथ भारती से HC ने कहा
Somnath Bharti on plea against Bansuri Swaraj: दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को आप नेता सोमनाथ भारती की याचिका में कई त्रुटियां पाईं, जिसमें उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज के निर्वाचन को चुनौती दी है।
न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा ने कहा कि याचिका में कई टाइपोग्राफिकल गलतियां हैं, जिससे दावों को समझना मुश्किल हो गया है। भारती के वकील ने अदालत से अनुरोध किया कि याचिका के आधार पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए।

हालांकि, न्यायमूर्ति अरोड़ा ने यह कहते हुए इनकार कर दिया, "बहुत सारी गलतियाँ हैं। पहले याचिका को सही करें। मैं इस तरह से नोटिस जारी नहीं कर सकता। मैं बस इसे स्थगित कर दूंगा। कृपया एक सही याचिका दायर करें।" अदालत ने भारती को संशोधित याचिका प्रस्तुत करने के लिए 10 दिन का समय दिया और अगली सुनवाई 14 अगस्त के लिए निर्धारित की।
भ्रष्ट आचरण का आरोप
याचिका में बांसुरी स्वराज, उनके चुनाव एजेंट और अन्य पर चुनाव के दौरान भ्रष्ट आचरण में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। इसमें यह भी दावा किया गया है कि पूर्व आप मंत्री राज कुमार आनंद ने बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा और वोटों को विभाजित करके स्वराज की मदद की। याचिका के अनुसार, आनंद 9 अप्रैल तक भारती के लिए सक्रिय रूप से प्रचार करने के बाद 10 जुलाई को भाजपा में शामिल हो गए और 10 अप्रैल को आप से इस्तीफा दे दिया।
चुनाव के दिन भारती कथित तौर पर यह देखकर चौंक गए कि स्वराज के बूथ एजेंट उनके मतपत्र संख्या, फोटो, चुनाव चिन्ह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर वाले पर्चे बांट रहे थे। याचिका में कहा गया है कि ये एजेंट मतदाताओं को ये पर्चे दिखा रहे थे और उनसे मतपत्र संख्या 1 के लिए मतदान करने का आग्रह कर रहे थे, जिसे भारती ने भ्रष्ट आचरण बताया।
याचिका विवरण में विसंगतियां
अदालत ने याचिका में उल्लेखित प्रतिवादियों और पार्टियों के ज्ञापन और सारांश में सूचीबद्ध प्रतिवादियों के बीच विसंगतियों को उजागर किया। इस विसंगति ने पूरे दस्तावेज़ में टाइपोग्राफ़िकल त्रुटियों के कारण भ्रम को और बढ़ा दिया। भारती और स्वराज दोनों ने नई दिल्ली लोकसभा सीट के लिए चुनाव लड़ा था। रिटर्निंग ऑफिसर के अनुसार, भारती को 3,74,815 वोट मिले, जबकि स्वराज को 4,53,185 वोट मिले। जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 80 और 81 के तहत याचिका दायर की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया कि इन भ्रष्ट आचरणों की सूचना प्रतिवादी संख्या 3 (रिटर्निंग अधिकारी) को देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई।
(ये खबर PTI से है)
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