निर्भया: तिहाड़ की फांसी की कोठरी में किया गया अहम बदलाव, अब तक नहीं आया था ऐसा मौका
दिल्ली। 22 जनवरी को निर्भया के चार दोषियों को मिली मौत की सजा को तिहाड़ की फांसी की कोठरी में यूपी का जल्लाद अंजाम तक पहुंचाएगा। जेल प्रशासन इसकी तैयारी में लगा है। इसके लिए फांसी की कोठरी की बनावट में कुछ फेरबदल किया गया ताकि चारों को लटकाया जा सके।

पहले दो को ही साथ लटकाने की व्यवस्था थी
फांसी कोठा में पहले दो दोषियों को एक साथ फांसी पर लटकाने की व्यवस्था थी। अब इसके प्लेटफार्म की चौड़ाई को बढ़ाया गया और एक साथ चार को फांसी पर लटकाने का इंतजाम किया गया है। इसका निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। जैसे ही यह तय हो गया था कि अब निर्भया के दोषियों को फांसी दी जाएगी, वैसे ही जेल प्रशासन ने फांसी कोठा में सुधार कराना शुरू कर दिया था।

....ताकि चारों का भार थाम सके!
जेल अधिकारियों के मुताबिक, फांसी जिस ढांचे के सहारे दी जाएगी उसके सपोर्ट में एक और ढांचा बनाया गया है ताकि चारों फंदे को अलग-अलग अंतराल पर मजबूती से बांधा जा सके और चारों दोषियों का भार थामा जा सके। चारो दोषी जिस स्टैंड पर खड़े होंगे उसको भी फिर से डिजाइन किया गया है।

तिहाड़ के इतिहास में पहली बार...
तिहाड़ जेल में चार को एक साथ फांसी पर लटकाने का यह पहला मौका होगा। इससे पहले आए तीन मामलों में दो को एक साथ लटकाया गया। इन मामलों में रंगा-बिल्ला, करतार सिंह-उजागर सिंह औक केहर सिंह-सतवंत सिंह को फांसी दी गई थी। इसके अलावा आंतकवादी मकबूल बट्ट और अफजल गुरु को फांसी दी गई। तिहाड़ के इतिहास में पहली बार ऐसा होगा जब चार को एक साथ फांसी पर लटकाया जाएगा।

1950 में बना था यह फांसी कोठा
जानकारी के मुताबिक, तिहाड़ में जेल में यह फांसी कोठा 1950 में बनाया गया था। कंक्रीट से बने दो स्तंभ पर धातु का मजबूत गार्टर लगा था। समय बीतने के साथ धातु का गार्टर कमजोर हो गया। इसका परीक्षण कर मजबूती बढ़ाने के लिए फांसी के तख्ते में बदलाव किया गया है।

बक्सर जेल से मंगाई गई मनीला रस्सी
बक्सर जेल में कैदियों के हाथों से बनी मजबूत आठ मनीला रस्सी मंगाई जा चुकी है। इस रस्सी के बारे में कहा जाता है कि यह गले में कसते समय काटता नहीं है। यह धीरे-धीरे कसता है ताकि फांसी की सजा पाए दोषियों को कम से कम तकलीफ हो।

दोषियों के व्यवहार पर रखी जा रही नजर
फांसी से पहले चारों कैदियों को जेल नंबर तीन में शिफ्ट किया जाएगा और अलग-अलग कोठरी में रखा जाएगा। उनको फांसी से पहले 15 दिन में कम से कम एक बार परिवार से मिलने की इजाजत है। जेल अधिकारी चारों दोषियों के व्यवहार पर नजर रख रहे हैं।












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