व्हीलचेयर से स्मार्टफोन तक… दिव्यांगों की जिंदगी बदल रही दिल्ली की ‘सुगम्य सहायक योजना’, 400 को सीधा फायदा
Sugamya Sahayak Yojana Delhi: दिल्ली सरकार की सुगम्य सहायक योजना धीरे धीरे दिव्यांगजनों के लिए एक बड़ी राहत और उम्मीद की स्कीम बनती जा रही है। चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 400 से ज्यादा दिव्यांग लोगों को इस योजना का सीधा फायदा मिल चुका है।
सरकार ने इस योजना के तहत ऐसे सहायक उपकरण दिए हैं, जो न सिर्फ उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान बनाते हैं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने में भी मदद कर रहे हैं।

17 कैंप, एक ही मकसद, दिव्यांगों को सशक्त बनाना
दिल्ली सरकार के समाज कल्याण विभाग ने इस साल राजधानी में कुल 17 कैंप आयोजित किए। इनमें 12 असेसमेंट कैंप और 5 वितरण कैंप शामिल थे। इन कैंपों के जरिए जरूरतमंद दिव्यांगों की पहचान की गई और उन्हें उनकी जरूरत के हिसाब से उपकरण दिए गए। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 435 लाभार्थियों को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, व्हीलचेयर, हियरिंग एड, बैसाखी, वॉकर, कैलिपर्स, ब्रेल किट और नेत्रहीनों के लिए स्मार्टफोन दिए जा चुके हैं।
40 लाख खर्च, 2 करोड़ का बजट
सरकार ने इस योजना के लिए इस साल करीब 2 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इसमें से अब तक 40 लाख रुपये से ज्यादा की राशि खर्च की जा चुकी है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में और कैंप लगाए जाएंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा दिव्यांगों तक यह सुविधा पहुंच सके। अभी 358 और दिव्यांगों का आकलन किया जा चुका है, जिन्हें जल्द ही अगले वितरण कैंपों में सहायता दी जाएगी।
किसे मिलता है योजना का लाभ
सुगम्य सहायक योजना का लाभ उन्हीं लोगों को दिया जाता है, जिनकी दिव्यांगता 40 प्रतिशत या उससे ज्यादा है और जिनके पास दिव्यांगता अधिकार अधिनियम 2016 के तहत प्रमाण पत्र है। इसके अलावा लाभार्थी का दिल्ली का निवासी होना जरूरी है। परिवार की सालाना आय 8 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। सरकार का मकसद साफ है कि आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगों को ज्यादा से ज्यादा सहारा दिया जाए।
गंभीर दिव्यांगता वालों के लिए खास इंतजाम
इस योजना में गंभीर रूप से दिव्यांग लोगों के लिए खास व्यवस्था की गई है। जिन लोगों की दिव्यांगता 80 प्रतिशत या उससे ज्यादा है, जैसे क्वाड्रिप्लेजिया, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, सेरेब्रल पाल्सी या स्ट्रोक के मरीज, उन्हें मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल दी जाती है। यह सुविधा 16 साल से ज्यादा उम्र के लोगों को हर तीन साल में एक बार मिलती है। वहीं कम दिव्यांगता वाले लोगों को हाथ से चलने वाली ट्राइसाइकिल या व्हीलचेयर दी जाती है।
सुरक्षा को लेकर भी सख्ती
सरकार ने सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ शर्तें भी रखी हैं। गंभीर मानसिक दिव्यांगता वाले लोगों को ट्राइसाइकिल या मोटराइज्ड उपकरण नहीं दिए जाते, ताकि किसी तरह का हादसा न हो। साथ ही लाभार्थियों को यह शपथ भी देनी होती है कि उन्होंने पहले ऐसी कोई सहायता नहीं ली है।
आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा कदम
इस योजना का असली मकसद सिर्फ उपकरण देना नहीं है, बल्कि दिव्यांगों को पढ़ाई, नौकरी और रोजगार के बेहतर मौके देना है। व्हीलचेयर या ट्राइसाइकिल से जहां उनकी आवाजाही आसान होती है, वहीं स्मार्टफोन और टैबलेट जैसे उपकरण उन्हें डिजिटल दुनिया से जोड़ते हैं। यही वजह है कि कैंपों में लोगों की बढ़ती संख्या यह दिखाती है कि योजना को लेकर जागरूकता और भरोसा दोनों बढ़ रहे हैं।
दिल्ली में दिव्यांगों के लिए क्यों खास है सुगम्य सहायक योजना?
सुगम्य सहायक योजना को गेमचेंजर इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि यह दिव्यांगों को सहानुभूति नहीं, बल्कि साधन दे रही है। साधन जो उन्हें खुद के पैरों पर खड़ा होने में मदद करें। दिल्ली सरकार की यह पहल दिखाती है कि सही नीति और सही इरादे से हजारों जिंदगियों में असली बदलाव लाया जा सकता है।












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