Delhi News: दिल्ली में अब नहीं मिलेगा मीट, जानें कांवड़ यात्रा के दौरान कब से कब तक बंद रहेंगी दुकानें
सावन का महीना 11 जुलाई से शुरू हो रहा है। ऐसे में दिल्ली में कांवड़ यात्रा की तैयारियां जोरों पर हैं। लाखों कांवड़िए हर साल दिल्ली के रास्ते होकर शिवधाम की ओर रवाना होते हैं। इस धार्मिक यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान करते हुए दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने बड़ा फैसला लिया है।
दरअसल, दिल्ली में कांवड़ मार्ग पर मौजूद सभी मीट की दुकानें तय अवधि तक बंद रहेंगी। आइए जानते हैं यह बंदी कब से कब तक लागू रहेगी और सरकार ने इसके लिए क्या कदम उठाए हैं।

दिल्ली के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने बुधवार को कहा कि इस महीने के अंत में शुरू होने वाले कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थित मांस की दुकानें, जिनमें से अधिकांश अवैध रूप से चल रही हैं, इस धार्मिक आयोजन के दौरान बंद रहेंगी।
मंत्री ने सत्तारूढ़ भाजपा के कई विधायकों के साथ शहर में कांवड़ यात्रा मार्ग की तैयारियों की समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान मिश्रा ने कहा कि, 'यह दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम (MCD) का निर्णय है कि मांस की दुकानें बंद रहेंगी। फिर भी, उनमें से अधिकांश अवैध हैं और उन्हें वहां नहीं होना चाहिए। ऐसी कोई भी दुकान नहीं खोली जाएगी और इसमें कोई छूट नहीं है।'
कांवड़ यात्रा के दौरान कब से कब तक बंद रहेंगी दुकानें
उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि, 'यह विशेष रूप से सुनिश्चित किया जाएगा कि कहीं भी ऐसी कोई अवांछित घटना न घटे।' 11 से 25 जुलाई तक श्रावण मास के पावन महीने में श्रद्धालुओं द्वारा कांवड़ यात्रा की जाएगी। इस दौरान कांवड़ मार्ग पर मौजूद सभी मीट की दुकानें बंद रहेंगी।
कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु नदियों और अन्य पवित्र जलाशयों से जल लेकर भगवान शिव के प्रमुख मंदिरों में चढ़ाते हैं और लंबी दूरी पैदल तय करते हैं। मिश्रा ने भाजपा विधायकों अजय महावर, तिलक राम गुप्ता, अनिल शर्मा, प्रद्युम्न राजपूत और संजय गोयल के साथ अप्सरा बॉर्डर से करोल बाग तक कांवड़ यात्रा मार्ग और शिविरों का इंस्पेक्शन किया।
उन्होंने कहा कि, 'हर साल लगभग 2.5 से 3 करोड़ कांवड़िये दिल्ली से गुजरते हैं। हमारी सरकार उन्हें हर तरह की सुविधाएं प्रदान कर रही है, जैसे उनके लिए कैंप लगाना, विभिन्न स्थानों पर भव्य प्रवेश द्वार बनाना और उन पर पुष्प वर्षा करना।'
मंत्री ने कहा कि सरकार पहले ही प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से कांवड़ समितियों को वित्तीय सहायता प्रदान करने की घोषणा कर चुकी है और शिविरों को 1,200 यूनिट मुफ्त बिजली भी प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में कांवड़ समितियों को इस आयोजन की तैयारियों में सुविधा प्रदान करने के लिए
सिंगल विंडो सिस्टम स्थापित किया गया है।












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