पंजाब में खेतों में आग लगने की घटनाओं में आई 50% की कमी, फिर भी दिल्ली की हवा खराब
पंजाब में फसल कटाई के बाद खेतों में आग लगने की घटनाएं इस साल पहले से कम हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद दिल्ली की वायु गुणवत्ता में कोई खास सुधार नहीं देखा गया है। पंजाब रिमोट सेंसिंग सेंटर के अनुसार, 15 सितंबर से 27 अक्टूबर तक पंजाब में खेतों में आग लगने की 1,995 घटनाएं दर्ज की गईं, जो पिछले साल इसी अवधि के 4,059 मामलों से लगभग 50% कम हैं।
दिल्ली में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 355 के साथ 'बहुत खराब' श्रेणी में बना हुआ है। यह दिखाता है कि पंजाब और हरियाणा में खेतों में आग की घटनाओं में कमी के बावजूद, दिल्ली के वायु प्रदूषण पर इनका प्रत्यक्ष प्रभाव अभी भी संतोषजनक नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि खेतों में आग लगने की घटनाएं अक्टूबर और नवंबर में अधिक होती हैं, क्योंकि इस समय धान की कटाई के बाद किसान अवशेषों को जल्दी से खत्म करने के लिए उन्हें जला देते हैं।

ऐतिहासिक आंकड़ों में कमी और उतार-चढ़ाव
पिछले कुछ वर्षों में पंजाब में आग की घटनाओं के आंकड़े उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं...
2023: 36,663 घटनाएं
2022: 49,922 घटनाएं
2021: 71,304 घटनाएं
2020: 76,590 घटनाएं
2019: 55,210 घटनाएं
2018: 50,590 घटनाएं
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि 2023 में खेतों में आग की घटनाओं में कमी दर्ज की गई है। हालांकि, संगरूर, मानसा, बठिंडा और अमृतसर जैसे जिलों में फसल जलाने की घटनाएं अब भी अधिक हैं, जो दिल्ली और एनसीआर की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं।
खेतों में आग लगने की वजह और इसके प्रभाव
किसान फसल के अवशेषों को तेजी से साफ करने के लिए धान के भूसे को जलाते हैं, ताकि वे गेहूं जैसी रबी फसलों की समय पर बुवाई कर सकें। पंजाब में सालाना लगभग 180-200 लाख टन धान का भूसा उत्पन्न होता है, जिसे जल्दी खत्म करना किसानों के लिए एक चुनौती होती है।
सरकार और किसान के प्रयासों की आवश्यकता
पंजाब सरकार ने खेतों में आग की घटनाओं को कम करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन इनका पूर्ण प्रभाव अब तक नहीं दिखा है। इन घटनाओं को रोकने के लिए किसानों के लिए वैकल्पिक तकनीक और उपकरण उपलब्ध कराने की आवश्यकता है, ताकि वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय अन्य तरीकों का उपयोग कर सकें। साथ ही, सरकार को किसानों के लिए जागरूकता अभियान चलाने की भी जरूरत है।
खेतों में आग की घटनाओं में कमी के बावजूद दिल्ली की वायु गुणवत्ता अभी भी खराब स्थिति में है। इससे स्पष्ट होता है कि पंजाब और हरियाणा में फसल जलाने के मुद्दे को प्रभावी तरीके से हल करना आवश्यक है। दिल्ली और एनसीआर की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए सख्त कदम उठाने और किसानों को वैकल्पिक तकनीक प्रदान करने की आवश्यकता है, ताकि आने वाले वर्षों में वायु प्रदूषण को नियंत्रित किया जा सके।
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