Delhi: कोविड में लापरवाही बरती, मोहल्ला क्लीनिकों से शौचालय गायब, CAG रिपोर्ट में AAP की कई खामियां उजागर
Delhi CAG Report: दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी की सरकार पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा कोविड-19 के लिए जारी की गई 'इमरजेंसी कोविड-19 रिस्पांस प्लान' के तहत प्राप्त फंड्स का बड़े पैमाने पर अपर्याप्त उपयोग किए जाने की बात CAG (कर्मचारी लेखा महालेखाकार) की रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली सरकार द्वारा कोविड-19 से निपटने के लिए जारी कुल 787.91 करोड़ रुपये में से केवल 582.84 करोड़ रुपये ही उपयोग किए गए।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली सरकार के मोहल्ला क्लिनिक में कई बुनियादी सुविधाओं की कमी पाई गई। 21 मोहल्ला क्लिनिक में टॉयलेट नहीं थे, 15 में पावर बैकअप नहीं था, 6 में चेक-अप के लिए कोई टेबल नहीं था और 12 में शारीरिक रूप से विकलांगों के लिए पहुँच की सुविधा नहीं थी। AYUSH डिस्पेंसरी में भी स्थितियां कुछ अलग नहीं थीं, जहां 49 में से 17 डिस्पेंसरी में पावर बैकअप नहीं था, 7 में टॉयलेट नहीं थे और 14 में पीने के पानी की सुविधा नहीं थी।

रिपोर्ट के अनुसार, कोविड-19 के दौरान अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या में बहुत कम वृद्धि हुई। जबकि बजट घोषणाओं के अनुसार 32,000 बिस्तरों की वृद्धि का लक्ष्य था, केवल 1,357 बिस्तर ही जोड़े गए। इसके साथ ही अस्पतालों में कर्मचारियों की भारी कमी पाई गई, जिनमें से 21% नर्स और 38% पैरामेडिकल स्टाफ की कमी थी।
सरकारी अस्पतालों में नहीं मिली कई सेवाएं
CAG रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दिल्ली सरकार के अस्पतालों में कई सेवाएं नहीं मिल रही थीं। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के 27 अस्पतालों में से 14 में ICU सेवाएं, 16 में ब्लड बैंक, 8 में ऑक्सीजन आपूर्ति, 15 में मोर्ट्यूरी सेवाएं और 12 अस्पतालों में एंबुलेंस सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं।
परियोजनाओं की शुरुआत में भी हुई बड़ी देरी
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 15 भूखंडों की कीमत 648.05 लाख रुपये, जो 2007 से 2015 के बीच अस्पतालों के लिए अधिग्रहित किए गए थे, 15 साल तक बिना उपयोग के पड़े रहे। इसके अलावा, नए अस्पतालों की परियोजनाओं की शुरुआत में भी बड़ी देरी हुई और पहले की लागत से अधिक लागत पर इन परियोजनाओं को पूरा किया गया।
इस रिपोर्ट को 31 मार्च, 2023 तक के आंकड़ों के आधार पर तैयार किया गया है और इसे दिल्ली सरकार को 24 सितंबर, 2024 को सौंपा गया था। रिपोर्ट ने दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रबंधन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
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