नूंह हिंसा: दिल्ली हाईकोर्ट के महिला अधिवक्ता फोरम का CJI को पत्र, 'Hate Speech' पर एक्शन की मांग
नूंह हिंसा को लेकर कथित रूप से आर्थिक बहिष्कार के उकसावे के भाषण के खिलाफ सीजेआई से एक्शन की मांग की गई है। मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की महिला अधिवक्ताओं ने आवाज उठाई है।
हरियाणा के नूंह में फैली हिंसा को लेकर 'हेट स्पीच' के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की महिला अधिवक्ताओं ने एक्शन की मांग की है। इसको लेकर वुमन अधिवक्ता फोरम की ओर सीजेआई एक पत्र लिखा गया है। जिसमें कुछ समुदायों के 'आर्थिक बहिष्कार' का आह्वान करने वाले वीडियो के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की गई।
नूंह हिंसा के बाद कुछ समुदायों ने कथित रूप से आर्थिक बहिष्कार का आह्वान किया था। जिसको लेकर सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। मामले में दिल्ली हाईकोर्ट की महिला वकील फोरम ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ को एक पत्र लिखा है।

पत्र में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि हरियाणा सरकार को नफरत भरे भाषण की घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने, ऐसे भाषण के वीडियो पर प्रतिबंध लगाने और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की गई है।
सीजेआई को लिखे पत्र में दिल्ली हाईकोर्ट के महिला अधिवक्ता फोरम की कुल 101 वकीलों ने हस्ताक्षर किए हैं। महिला वकीलों ने सीजेआई के नफरत भरे भाषण वाले वीडियो के प्रसार और लक्षित हिंसा भड़काने पर गहरी चिंता व्यक्त की है। पत्र में लिखा गया, "नफरत भरे भाषण वाले वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे हैं। वीडियो को मीडिया हरियाणा की रैलियों में रिकॉर्ड किए जाने का दावा करता है। राज्य में नफरत फैलाने वाले भाषण की घटनाओं को रोकने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हैं। ऐसे वीडियो नफरत फैलाने के साथ डर का माहौल पैदा करते हैं।"
इसके अलावा महला अधिवक्ता फोरम की ओर सीजेआई को लिखे पत्र में कहा गया है कि हरियाणा की रैलियों में नफरत फैलाने वाले भाषण से हिंसा भड़कने के खतरे के साथ सांप्रदायिक भय, उत्पीड़न और भेदभाव का माहौल पैदा होता है।












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