केजरीवाल के चुनावी भाषणों पर ED की आपत्ति खारिज, याचिका पर कोर्ट ने कहा- हम इसमें नहीं पड़ेंगे
दिल्ली शराब नीति मामले में सीएम केजरीवाल को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 2 जून तक जमानत मिली है। जमानत की अवधि के दौरान वे आम आदमी पार्टी की चुनावी जनसभाओं में शामिल हो रहे हैं। इस दौरान उन्होंने मंच से अपने भाषण के दौरान कई इमोशन कॉर्ड खेला। उन्होंने अपनी गिरफ्तारी और जमानत का जिक्र करते हुए हाल ही में कहा कि वे जेल के अंदर बैठकर चुनावी नतीजे देखेंगे और अगले दिन बाहर आ जाएंगे। ऐसे में प्रवर्तन निदेशालय ने केजरीवाल के बयानों को लेकर कोर्ट में आपत्ति जताई, जिसको लेकर दायर याचिका को अब अदालत ने खारिज कर दिया।
उच्चतम न्यायालय ने गुरूवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के खिलाफ उनके चुनावी भाषणों को लेकर कार्रवाई की मांग करने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि अदालत राजनीतिक भाषणों के बारे में कोई निर्णय नहीं देना चाहती।

दरअसल, ईडी ने सुनवाई के दौरान कोर्ट के समक्ष केजरीवाल के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि केजरीवाल अपनी सभाओं में कह रहे हैं कि अगर लोग आम आदमी पार्टी को वोट देंगे तो वे दो जून को जेल नहीं जाएंगे। सर्वोच्च अदालत ने याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि कोर्ट का आदेश स्पष्ट है। अंतरिम जमानत की मियाद तय की गई है। अदालत ने कहा,ऐसे में बेहतर यही है कि सिर्फ कानूनी मुद्दे पर ही बात की जाए।
वहीं अदालत में सॉलिसिटर मेहता ने कहा कि पीएमएलए की धारा 19 के तहत अथॉरिटी को ये तय करना चाहिए कि क्या ऐसा कोई मैटिरियल मौजूद है, जिसके लिए किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी की जरूरत है। साक्ष्यों का मूल्यांकन करने की न्यायिक शक्तियों का प्रयोग आवश्यक नहीं है। सरकारी वकील मेहता ने कहा कि अगर किसी की शिकायत पर किसी शख्स को गिरफ्तार किया जाता है तो उनकी सीआरपीसी के आधार पर गिरफ्तारी होती है। इसके लिए वे सीधे संवैधानिक कोर्ट नहीं जाते। अदालत को इस तरह उन दरवाजों को नहीं खोलना चाहिए। इसके भयानक परिणाम होंगे।












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