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दिल्ली दंगों के आरोपी ताहिर हुसैन को सुप्रीम कोर्ट से मिली कस्टडी पैरोल, चुनाव प्रचार के लिए मिली छूट

Delhi Elections: दिल्ली दंगों के आरोपी और एआईएमआईएम के उम्मीदवार ताहिर हुसैन को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने हुसैन को आगामी दिल्ली विधानसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए कस्टडी पैरोल दी है। इसके तहत हुसैन को 29 जनवरी से 3 फरवरी तक दिन में 12 घंटे जेल से बाहर रहने की अनुमति दी जाएगी, जबकि रात को उन्हें फिर से जेल लौटना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने ताहिर हुसैन को कस्टडी पैरोल देने के साथ ही कुछ शर्तें भी तय की हैं। हुसैन को जेल से बाहर आने के दौरान दो पुलिसकर्मियों की सुरक्षा, जेल वैन और एस्कॉर्ट वाहन के खर्चे स्वयं उठाने होंगे। इसके लिए अदालत ने उनसे दो दिन की अग्रिम जमा राशि देने का आदेश दिया, जो लगभग 2 लाख रूपए प्रति दिन है। ताहिर हुसैन आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद हैं और अब वे एआईएमआईएम के टिकट पर दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने 14 जनवरी को उन्हें कस्टडी पैरोल दी थी ताकि वे मस्टफाबाद सीट से अपना नामांकन दाखिल कर सकें।

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हुसैन को अपने निर्वाचन क्षेत्र में मतदाताओं से मुलाकात करने की अनुमति दी गई है, लेकिन उन्हें अपने घर, करावल नगर जाने की अनुमति नहीं दी गई है। इसके अतिरिक्त, उन्हें उनके खिलाफ लंबित मामलों पर कोई टिप्पणी करने की भी मनाही है। इस फैसले पर दिल्ली चुनाव में हलचल मच गई है। कुछ लोगों का कहना है कि ऐसे आरोपियों को चुनाव में भाग लेने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए, जबकि अन्य इसे न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा मानते हैं।

ताहिर हुसैन पर लग चुके हैं दंगा फ़ैलाने के आरोप

24 फरवरी 2020 को दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क गए थे, जिनमें 53 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हुए थे। यह दंगा दिल्ली विधानसभा चुनावों से ठीक पहले हुआ था, और इसमें ताहिर हुसैन पर कई गंभीर आरोप हैं।

ताहिर हुसैन 2020 के दिल्ली दंगों के प्रमुख आरोपियों में से हैं। इन दंगों में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या भी शामिल है। हुसैन को मार्च 2020 से न्यायिक हिरासत में रखा गया है। उन्होंने पहले दिल्ली हाई कोर्ट में अंतरिम जमानत के लिए आवेदन किया था, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। अब चुनाव प्रचार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें कस्टडी पैरोल दी है।

सुप्रीम कोर्ट से सुनाया फैसला
सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने इस फैसले पर सुनवाई की। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संजय करोल और संदीप मेहता की पीठ ने यह आदेश दिया। अदालत ने दिल्ली सरकार से यह जानकारी मांगी थी कि यदि हुसैन को कस्टडी पैरोल दी जाती है तो सुरक्षा और अन्य खर्चे कैसे होंगे।

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