VIRAL PICS: नदी अपना रास्ता कभी नहीं भूलती, क्या सदी बाद फिर पुराने रास्ते पर बह निकली यमुना ?
भारी बारिश दिल्ली और हिमाचल में तबाही लेकर आई है। भारी जलजमाव के चलते रेड फोर्ट को पर्यटकों के लिए बंद करना पड़ा है। ऐसे में इस ऐतिहासिक स्थल को लेकर प्राचीनकाल से जुड़े कई बातें कही जा रही हैं।
दिल्ली में लगातार बारिश ने जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त कर दिया है। यमुना का रौद्र रूप अब दिल्लीवालों को सताने लगा है। निचले इलाकों के हालात चिंताजनक है। कई सड़कें लबाबलब भरी हैं। लोग घुटने से भी ऊपर पानी ने निकल कर अपने काम के लिए जा रहे हैं। लाल किले का इलाका पूरा जलमग्न है। हालात ये हैं कि ऐतिहासिक स्थल रेड फोर्ट में पानी घुस गया है।
लाल किले के पिछले हिस्से में तो झरने जैसी तस्वीर दिखी। ये हालात रिंग रोड से सलीम गढ़ के बाईपास के क्षेत्र का इलाका है। पानी का फ्लो ऐसा है कि लगता है ये सभी इंफ्रस्टक्चर यमुना नदी के क्षेत्र में हैं। दिल्ली में हालत हरिद्वार जैसे दिख रहे हैं।

लाल किले में इस कदर हालात देख एक बार फिर मुगल बादशाह शाहजहां का जिक्र किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि नदी कभी भी अपना रास्ता नहीं भूलती, वो लौट कर जरूर आती है। लेकिन ये बात किस आधार पर कही जा रही है, ये सवाल मन में जरूर उठता है। दरअसल, लाल किले का निर्माण 29 अप्रैल 1638 में शुरू हुआ था। 10 साल बाद 1648 में इसका निर्माण हुआ। उस वक्त इसका नाम रखा गया किला-ए-मुबारक। किले का निर्माण यमुना किनारे किया गया। लेकिन समय के साथ दिल्ली में यमुना का आकार इंफ्रस्टक्चर के आगे छोटा होने लगा।
यमुना के बढ़े जलस्तर की वजह से रेड फोर्ट इलाके में भारी जलजमाव ने लोगों की नींद उड़ा दी है। ऐसे में कहा जा रहा कि लाल किला जब बना था तो वे यमुना नदी के किनारे था। यानी नदी का क्षेत्र रेड फोर्ट के पास तक था और अब नदी का जलस्तर जब बढ़ा पूरा लाल किला का एरिया जलमग्न हो गया।












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