Delhi Pollution: दमघोंटू हुई दिल्ली! 2 साल का सबसे खराब AQI दर्ज,GRAP-4 के बाद भी हवा कैसे बनी इतनी जहरीली
Delhi Pollution Update: CPCB के मुताबिक 18 जनवरी की शाम 4 बजे दिल्ली का AQI 440 रिकॉर्ड किया गया। यह शनिवार, 17 जनवरी के 400 से अधिक AQI से भी ज्यादा खराब रहा। इससे पहले जनवरी 2024 में 14 तारीख को AQI 447 दर्ज किया गया था।
विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी के दूसरे हफ्ते में आमतौर पर प्रदूषण कुछ कम होने लगता है, लेकिन इस बार हालात इसके उलट रहे। आंकड़ों पर नजर डालें तो जनवरी के दूसरे हिस्से में इससे पहले 2019 में 17 जनवरी को AQI 440 रहा था।

इसके अलावा 2016 से 2025 के बीच इस अवधि में AQI आमतौर पर 370 से 410 के दायरे में रहा। ऐसे में इस साल का आंकड़ा बेहद चिंताजनक माना जा रहा है। यह पहली बार है जब जनवरी के दूसरे हिस्से में लगातार दो दिन AQI 400 से ऊपर रहा है, जो आखिरी बार 2016 में देखा गया था।
Delhi Worst Air Quality: जाती जनवरी में राजधानी क्यों बनी जहरीली?
वैज्ञानिकों के मुताबिक प्रदूषण बढ़ने की मुख्य वजह सतह पर चलने वाली बेहद धीमी हवाएं और पश्चिमी विक्षोभ हैं। इन कारणों से नमी बढ़ जाती है और प्रदूषक तत्व वातावरण में ही फंस जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम को नियंत्रित नहीं किया जा सकता, लेकिन उत्सर्जन के स्रोतों पर सख्ती से काबू पाया जा सकता है।
रविवार को आनंद विहार दिल्ली का सबसे प्रदूषित इलाका रहा, जहां AQI 497 तक पहुंच गया। इसके अलावा मुंडका और रोहिणी में औसतन AQI 491 दर्ज किया गया। कई अन्य इलाकों में भी हवा 'सीवियर' श्रेणी में बनी रही, जिससे लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा।
इतनी गंभीर स्थिति यह दिखाती है कि क्षेत्र में उत्सर्जन लगातार बढ़ रहा है। शांत हवाओं के समय GRAP के सारे प्रतिबंध भी फेल होते नजर आ रहे हैं। यह योजना प्रदूषण को नियंत्रित करने में नाकाम साबित हो रही है।
GRAP स्टेज-4 लागू, फिर भी राहत नहीं
प्रदूषण के गंभीर स्तर पर पहुंचने के बाद शनिवार शाम को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने GRAP का स्टेज-4 लागू कर दिया। इसके तहत BS-IV ट्रकों की दिल्ली में एंट्री पर रोक, सभी तरह के निर्माण और तोड़फोड़ कार्य पर पूर्ण प्रतिबंध और स्कूलों में हाइब्रिड मोड लागू किया गया है। कक्षा 10 और 12 को छोड़कर बाकी कक्षाओं के लिए ऑनलाइन या हाइब्रिड पढ़ाई की व्यवस्था की गई है।
इसके बावजूद रविवार को हवा की हालत और बिगड़ गई। विशेषज्ञों का मानना है कि GRAP को अक्सर देर से लागू किया जाता है और कई बार पाबंदियां बहुत जल्दी हटा ली जाती हैं, जिससे हालात संभलने से पहले ही दोबारा बिगड़ जाते हैं।
NCR से आ रहा प्रदूषण भी बड़ी चुनौती
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि राजधानी में प्रदुषण के स्तर को बढ़ाने में NCR के औद्योगिक इलाकों और थर्मल पावर प्लांट्स भी अहम भूमिका में हैं। पूर्वी दिशा से चलने वाली हवाओं के कारण गौतम बुद्ध नगर और बुलंदशहर जैसे औद्योगिक क्षेत्रों से बड़ी मात्रा में प्रदूषण दिल्ली पहुंच रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि NCR के छोटे शहरों में उद्योग तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन वहां प्रदूषण नियंत्रण के उपाय उतनी तेजी से लागू नहीं हो रहे।
सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की बिगड़ती स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट भी हाल ही में सख्त रुख अपना चुका है। कोर्ट ने CAQM को फटकार लगाते हुए प्रदूषण के कारणों और उनके योगदान की स्पष्ट पहचान न कर पाने को अपनी जिम्मेदारियों में फेल बताया था। अदालत ने दो हफ्तों के भीतर बढ़ते प्रदुषण के कारण और अपॉर्शनमेंट रिपोर्ट सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है।
आगे क्या उम्मीद ?
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार सोमवार से हवाओं की गति में थोड़ी तेजी आ सकती है, जिससे AQI 'सीवियर' से घटकर 'वेरी पुअर' श्रेणी में आ सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक उत्सर्जन के स्रोतों-जैसे सड़क की धूल, कचरा जलाना, उद्योग और वाहनों-पर सख्ती से नियंत्रण नहीं किया जाता, तब तक मौसम में मामूली बदलाव से स्थायी राहत मिलना मुश्किल है।
दिल्लीवासियों के लिए यह स्थिति एक बार फिर चेतावनी है कि वायु प्रदूषण केवल मौसमी समस्या नहीं, बल्कि नीति, क्रियान्वयन और क्षेत्रीय समन्वय से जुड़ी गंभीर चुनौती बन चुका है।












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