MCD Election:दिल्ली में ओवैसी की पार्टी पर भारी पड़ा NOTA,सिर्फ मुस्लिम लीग से बच गई लाज
दिल्ली एमसीडी के जो चुनाव नतीजे आए हैं, वह हैदराबाद के सांसद और एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी के लिए बहुत ही निराशाजनक हैं। उन्होंने मुस्लिम वोटरों को जीतने के लिए सारे जतन लगाए, लेकिन सफल नहीं हो पाए। नोटा आगे निकला।

Delhi MCD Election Results 2022 Hindi News Updates:दिल्ली नगर निगम के चुनाव में असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने भी 15 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। लेकिन, लगता है कि मुसलमानों की राजनीति करने वाले हैदराबाद के सांसद की पार्टी पर दिल्ली के मुसलमानों ने भी भरोसा नहीं किया है। क्योंकि, एमसीडी इलेक्शन में वोटरों ने एआईएमआईएम के उम्मीदवारों से भी ज्यादा NOTA का बटन दबाया है। ओवैसी इस बात से संतोष कर सकते हैं कि उनकी पार्टी पर वोटरों ने इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग से अधिक विश्वसनीयता जताई है।

एमसीडी चुनाव में ओवैसी की पॉलिटिक्स फेल
दिल्ली नगर निगम के चुनाव में हैदराबाद की पार्टी एआईएमआईएम ने 15 उम्मीदवारों को टिकट दिया था। ओवैसी ने तब आरोप लगाया था कि मुस्लिम-बहुल वार्ड में विकास को लेकर कभी ध्यान नहीं दिया गया है। एआईएमआईएम चीफ ने कहा था कि 'गुजरात जाइए या फिर दिल्ली के सीलमपुर में ...इन इलाकों में कहीं विकास नहीं हुआ है और ना ही स्कूल बने हैं।' लेकिन, मुस्लिम मतदाताओं को गोलबंद करने की उनकी कोशिश दिल्ली में तो पूरी तरह से फेल हो गई है। अलबत्ता कम से कम दिल्ली में मुसलमानों ने ओवैसी से ज्यादा यकीन कांग्रेस पर दिखाया है, जिसके टिकट पर चुने जाने वाले 9 पार्षदों में से 7 मुसलमान हैं।

एमसीडी में नोटा को मिले 0.78% वोट
वैसे जब बुधवार को दिल्ली में एमसीडी चुनाव के लिए वोटों की गिनती चल रही थी तो शुरू में ओवैसी की पार्टी के उम्मीदवार बृजपुरी के वार्ड से जरूर आगे थे, लेकिन बाद में वहां भी उनकी पार्टी पिछड़ती चली गई। बता दें कि इस बार दिल्ली नगर निगम चुनाव में लगभग आधे मतदाताओं ने वोट ही नहीं डाले हैं। जो वोटर घर से निकलकर मतदान करने पहुंचे, उनमें से भी 0.78% वे वोटर हैं, जिन्होंने किसी भी पार्टी के उम्मीदवार या निर्दलीय प्रत्याशी पर यकीन नहीं किया है। उन्होंने 'नोटा' पर बटन दबाकर अपनी नाराजगी का इजहार किया है।

एमसीडी में ओवैसी की पार्टी को सिर्फ 0.62% वोट
लेकिन, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के लिए शर्मनाक स्थिति इसलिए बन गई है कि उसके उम्मीदवारों को मिलाकर जो कुल वोट हुए हैं, वह नोटा से भी कम हैं। दिल्ली की एमसीडी चुनाव में एआईएमआईएम को सिर्फ 0.62% वोट मिले हैं। ओवैसी की पार्टी पर बीजेपी-विरोधी दल वोट कटवा होने के आरोप लगाते रहे हैं या फिर भाजपा की बी टीम बताकर भी तंज कसते हैं। लेकिन, एमसीडी का चुनाव परिणाम कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा है।

0.00% वोट लेने वाली पार्टियां कौन हैं ?
वैसे एमसीडी के चुनाव में एआईएमआईएम से भी पतली हालत कई पार्टियों की हुई है। इसमें इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग भी शामिल है। उसे 0.00% वोट मिले हैं। दिल्ली एमसीडी चुनाव में 0.00% वोट लाने वाले दलों में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) भी शामिल है। जबकि, सपा को 0.01%, राष्ट्रीय लोक दल को 0.09%, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक को 0.02%, सीपीआई को 0.01%, सीपीएम को 0.02% और एनसीपी को 0.20% वोट मिले हैं। जेडीयू भी सिर्फ 0.16% वोट ले पाई है।

दिल्ली में ओवैसी ने क्या मुद्दे उठाए थे ?
गौरतलब है कि दिल्ली के एमसीडी चुनावों को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने तबलीगी जमात और शाहीन बाग का भी मुद्दा उठाया था और गुजरात तक जाकर आम आदमी पार्टी और उसके चीफ अरविंद केजरीवाल को घेर आए थे। उन्होंने कहा था, 'आपने तबलीगी जमात को बदनाम किया। कोरोना के दौरान केजरीवाल ने पूरी दुनिया में बदनाम किया था कि यदि कोरोना बढ़ता है तो इसके फैलने के लिए तबलीगी जमात जिम्मेदार होगा।' इसके साथ ही उन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान भी सीएम केजरीवाल पर गायब रहने का आरोप लगाया था। इसी तरह शाहीन बाग को लेकर उन्होंने दावा किया था कि केजरीवाल ने तब कहा था कि एक दिन के लिए मुझे पुलिस दो मैं शाहीन बाग खाली करा दूंगा। लेकिन, लगता है कि दिल्ली के वोटरों पर ओवैसी के इन आरोपों का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है।












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