दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पाइस जेट एयरलाइन को दिए निर्देश, कलानिधि मारन को भुगतान करें 380 करोड़ रुपये
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पाइस जेट एयरलाइन को निर्देश देते हुए कहा कि वो सन ग्रुप के कलानिधि मारन को 380 करोड़ रुपये का भुगतान करें। साथ ही संपत्ति का हलफनामा प्रस्तुत करें।

स्पाइसजेट और उसके पूर्व प्रमोटर कलानिधि मारन के बीच विवाद साल 2015 में शुरू हुआ था। इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक नया मोड़ आ गया है। दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पाइसजेट एयरलाइन को उसके पूर्व प्रमोटर कलानिधि मारन को 380 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही चार सप्ताह के अंदर संपत्ति का एक हलफनामा प्रस्तुत करने को कहा है।
बता दें कि स्पाइसजेट के मौजूदा प्रमोटर अजय सिंह और पूर्व प्रमोटर कलानिधि मारन के बीच लंबे समय से जारी शेयर विवाद चल रहा है। 29 मई 2023 को उच्च न्यायालय का फैस
पूरा विवाद कुछ इस प्रकार है कि साल 2015 में जब मारन और उनकी फर्म KAL एयरवेज ने स्पाइसजेट में अपनी 58.46 फीसदी हिस्सेदारी को कम रुपये में ही स्पाइस जेट के मौजूदा प्रमोटर अजय सिंह को दे दी थी। उन्होंने एयरलाइन के मालिकाना हक के साथ इसकी 1500 करोड़ रुपये की लायबिलिटी भी अपने ऊपर ले लिया था।
इस शेयर ट्रांसफर एग्रीमेंट के तहत मारन को वारंट और प्रेफरेंस शेयर जारी किए जाने थे। इसके लिए उन्होंने 679 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया था। इसी के चलते साल 2017 में मारन ने दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया साथ ही कहा कि उन्हें न तो समझौते के अनुसार, प्रेफरेंस शेयर जारी किए और न ही उनके पैसों को वापस किया गया। हाईकोर्ट ने इस मामले को मध्यस्थता अदालत के पास भेज दिया था।
मध्यस्ता अदालत ने मारन को 579 करोड़ रुपये और उस पर ब्याज चुकाने का आदेश दिया। लेकिन, नुकसान के तौर पर मारन के 1323 करोड़ रुपये के मुआवजे के दावे को खारिज कर दिया। जब मारन ने इस आदेश को हाईकोर्ट के सामने चुनौती दी, तो कोर्ट ने मारन का पक्ष लिया। साथ ही स्पाइसजेट को ब्याज राशि के रूप में 243 करोड़ रुपये जमा करने के निर्देश दिए। अक्टूबर 2020 में ब्याज 243 करोड़ रुपये था जो फरवरी 2023 में बढ़कर 362 करोड़ होगया और अंत में ये 380 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।












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