Yamuna में शाही मौज की तैयारी पर चला हथौड़ा! करोड़ों का VIP बोट टेंडर रद्द, 2 अधिकारी भी नपे, कैसे हुआ खुलासा?
Delhi Luxury Boat Tender: दिल्ली सरकार ने वीआईपी और वीवीआईपी (VIP/VVIP) लोगों के लिए यमुना में सैर-सपाटे के लिए दो एयर-कंडीशन्ड नावें खरीदने की योजना बनाई थी। इन दो नावों की कीमत ₹6.2 करोड़ तय की गई थी। लेकिन अब बीजेपी के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार के मंत्री प्रवेश वर्मा ने इस पूरे टेंडर को रद्द कर दिया है। मंत्री ने साफ कहा कि इस तरह की फिजूलखर्ची बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस मामले में लापरवाही और बिना जानकारी के टेंडर जारी करने के आरोप में दो अधिकारियों-संबंधित अधिशासी अभियंता (Executive Engineer) और सहायक अभियंता (Assistant Engineer)-को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है। मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि इन अधिकारियों ने विभाग को बिना पूर्व सूचना दिए ही इतना बड़ा टेंडर जारी कर दिया था, जिसकी अब गहन जांच की जा रही है।

इन नावों में क्या थी सुविधाएं?
हिंदुस्तान टाइम्स द्वारा एक्सेस किए गए टेंडर दस्तावेजों के अनुसार, इन नावों को किसी फाइव स्टार होटल की तरह तैयार किया जाना था:
- बिजनेस क्लास सीटें: नाव के अंदर वीगन लेदर (Vegan Leather) वाली प्रीमियम स्टिचिंग और वुडन फिनिश वाली सीटें होनी थीं।
- एसी और लाइटिंग: कैसेट-टाइप रूफटॉप मरीन एसी और एंबिएंट एलईडी लाइटिंग से इसे सजाया जाना था।
- वीआईपी डेक: नाव के पीछे एक खुला डेक होना था, जहां वीआईपी लोगों के जनता के सामने आने के लिए सोफे लगाए जाने थे।
- पेंट्री की सुविधा: खाना परोसने के लिए एक समर्पित पेंट्री (रसोई) की भी व्यवस्था थी।
विपक्ष का कड़ा प्रहार और सरकार का यू-टर्न
इस 'लग्जरी बोट' प्लान को लेकर आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने सरकार को जमकर घेरा था। विपक्ष ने इसे 'जनता के पैसे की बर्बादी' और 'प्राथमिकताओं का गलत चयन' करार दिया था। भारी फजीहत और मीडिया रिपोर्ट के बाद सरकार ने कदम पीछे खींचे हैं। अब मंत्री ने निर्देश दिए हैं कि भविष्य में नावों की खरीद केवल निगरानी, प्रदूषण मॉनिटरिंग और परिचालन कार्यों जैसे जरूरी कामों के लिए ही की जाएगी।
यमुना सफाई का लक्ष्य और वर्तमान स्थिति
बीजेपी सरकार ने यमुना की सफाई को अपनी प्राथमिकता बताया है। गौरतलब है कि वजीराबाद से असगरपुर गांव तक का 26 किलोमीटर का हिस्सा यमुना के सबसे प्रदूषित हिस्सों में से एक है। सरकार का तर्क है कि पैसा वीआईपी नावों के बजाय नदी के सुधार पर खर्च होना चाहिए।
VIP बोट मामले में कब, क्या और कैसे हुआ?
- 15 मार्च 2026: दिल्ली के सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण (I&FC) विभाग द्वारा गुपचुप तरीके से दो लग्जरी वीआईपी नावों (AC, वीगन लेदर सीट्स और पेंट्री वाली) के लिए ₹6.2 करोड़ का टेंडर जारी किया गया। अधिकारियों ने इसकी जानकारी विभागीय मंत्री को नहीं दी थी।
- 18 मार्च 2026: अलग-अलग रिपोर्ट में इस 'लग्जरी प्लान' का खुलासा किया गया।
- 18 मार्च: खबर फैलते ही आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने बीजेपी सरकार को घेरा। विपक्ष ने इसे 'भ्रष्टाचार और फिजूलखर्ची' का बड़ा उदाहरण बताया।
- 18 मार्च (शाम): चौतरफा फजीहत के बाद विभागीय मंत्री प्रवेश वर्मा ने तुरंत उच्च स्तरीय जांच (Inquiry) के आदेश दिए। विभाग ने एक 'शुद्धिपत्र' जारी कर बिडिंग की आखिरी तारीख को बढ़ाकर 27 मार्च कर दिया।
- 19-26 मार्च 2026: जांच के दौरान पाया गया कि संबंधित अधिशासी अभियंता (EE) और सहायक अभियंता (AE) ने नियमों को ताक पर रखकर यह टेंडर निकाला था। मंत्री ने साफ किया कि भविष्य में नावें केवल प्रदूषण की निगरानी और जरूरी काम के लिए ही खरीदी जाएंगी।
- 26 मार्च 2026 (देर रात): जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों दोषी इंजीनियरों को सस्पेंड (Suspended) करने की फाइल पर मुहर लगी।












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