OPINION: दिल्ली सरकार की ईवी नीति 2.0, रेट्रोफिटिंग को बढ़ावा देने में अहम
दिल्ली सरकार की नई ईवी नीति राष्ट्रीय राजधानी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए बेहद अहम है। योजना का पूरा लाभ मिले इसके लिए इसे लागू करने के लिए पूरी तरह से पारदर्शी तरीका अपनाया जाएगा। दिल्ली सरकार का दावा है कि नई इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति के लिए राज्य में बड़े पैमाने पर रेट्रोफिटिंग को बढ़ावा भी मिलेगा।
दिल्ली सरकार की ओर दावा किया जा रहा है कि इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2.0 में वाहनों की उच्च लागत को कम करने के प्रयास किए जाएंगे। जिसके तहत रेट्रोफिटिंग को बढ़ावा दिया जाएगा। एक साक्षात्कार में दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा था कि दिल्ली सरकार राजधानी में प्रदूषण स्तर को घटाने की की नई नीतियों पर कार्य कर रही है। ऐसे में ईवी नीति 2.0 बेहद अहम साबित होने वाली है। इसको लेकर कई अपडेट हैं। नई नीति के पूरी तरह तैयार होने तक पुरानी ईवी नीति को करीब 6 महीने तक बढ़ाया जा सकता है।

दरअसल, दिल्ली की आम आदमी पार्टी नेतृत्व वाली सरकार का लक्ष्य है कि 2025 तक देश में कुल ई- वाहनों में से एक चौथाई वाहन दिल्ली में हों। ऐसे में ई-व्हीकल नीति 2.0 को अंतिम रूप देने से लोगों से सुझाव भी मांगे गए थे। जिसके आधार पर इसे अपडेट भी किया जा रहा है। अब सवाल ये है कि नई नीति कब तक आएगी। ऐसे में परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत के बयान के मुताबिक दिल्ली सरकार एक कैबिनेट नोट ला रही है। जिसके तहत नई ईवी नीति को अंतिम रूप दिया जा सकता है और मौजूदा नीति को छह महीने या नई नीति अधिसूचित होने तक बढ़ाया जाएगा।
दिल्ली सरकार मौजूदा वाहनों को भी ईवी मोड में अपग्रेड की व्यवस्था करने जा रही है। इसका जिक्र इसलिए भी किया जा रहा है क्योंकि लोग आईसी इंजन को अब इलेक्ट्रिक इंजन में बदलना चाह रहे हैं। हालांकि ये प्रक्रिया मंहगी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक एक सामान्य जिप्सी को ईवी में बदलने पर करीब पांच से छह लाख रुपये का खर्च आता है। लेकिन अब दिल्ली सरकार इसे भी प्रोत्साहित करने की योजना पर काम कर रही है।












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