हरियाणा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची दिल्ली सरकार, कहा- गर्मी में हमारे हिस्से का पानी रोक रखा, पूरा छुड़वाएं
नई दिल्ली, जुलाई 12: देश की राजधानी दिल्ली इन दिनों जल-संकट से जूझ रही है। यहां कई इलाकों में लोगों को पानी नहीं मिल रहा। जगह-जगह दिल्ली सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं, दिल्ली सरकार ने पानी की किल्लत के लिए हरियाणा की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। दिल्ली सरकार के जल बोर्ड ने इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष उठाया है। दिल्ली जल बोर्ड का कहना है कि, भरी गर्मी में हरियाणा ने दिल्ली के हिस्से का पानी राेक रखा है। हरियाणा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दिल्ली जल बोर्ड ने मांग की है कि, यमुना नदी में दिल्ली के हिस्से का पूरा पानी छुड़वाया जाए।

दिल्ली सरकार के आप विधायक व दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने कहा कि, कोरोना महामारी और भीषण गर्मी के बीच हरियाणा सरकार द्वारा यमुना में पानी की आपूर्ति कम कर दी गई है। दिल्ली के पानी का हिस्सा रोक दिया गया है। ऐसे में दिल्ली जल बोर्ड वर्ष 1995 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही निर्धारित दिल्ली के वैध हिस्से की आपूर्ति की मांग के लिए हरियाणा सरकार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है। दिल्ली जल बोर्ड की ओर से 1,150 एमजीडी जल आपूर्ति की मांग की गई, वहीं अभी 945 एमजीडी पानी की आपूर्ति की जा रही है। चड्ढा के मुताबिक, हरियाणा द्वारा यमुना में छोड़ा जा रहा पानी 'अब तक के सबसे निचले स्तर' पर है।

दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष ने कहा, 'इस समय दिल्ली को हरियाणा से 609 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) पानी मिलना चाहिए, लेकिन 479 एमजीडी पानी ही मिल रहा है। इसके अलावा दिल्ली को 90 एमजीडी पानी भूजल से और 250 एमजीडी ऊपरी गंगा नहर से मिलता है। इससे शहर को 945 एमजीडी जल की आपूर्ति ही हो पा रही है। जबकि मांग 1,150 एमजीडी की है।' उन्होंने कहा कि, इससे पहले भी हरियाणा ऐसा करता रहा है। हमारे हिस्से का पानी रोक लिया जाता है।' अब दिल्ली सरकार के आरोप हैं कि, हरियाणा सरकार की ओर से 2 करोड़ की आबादी में से 20 लाख लोगों का पानी रोका गया है।












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