Delhi Liquor: शराब ने दिल्ली सरकार का खजाना किया गुलजार, FY26 के पहले 6 महीनों में रेवेन्यू में रिकॉर्ड उछाल
Delhi Government: शराब की बिक्री में जबरदस्त बढ़ोतरी के दम पर दिल्ली सरकार ने करंट फाइनेंशियल ईयर (FY26) की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में एक्साइज रेवेन्यू कलेक्शन में 12 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की है। अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि यह वृद्धि पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले हुई है, जिससे सरकार के खजाने को मजबूती मिली है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, VAT सहित कुल एक्साइज राजस्व पिछले साल के ₹3,731.79 करोड़ से बढ़कर इस बार ₹4,192.86 करोड़ हो गया है। इस मजबूत शुरुआत के चलते सरकार ने ₹6,000 करोड़ के वार्षिक एक्साइज रेवेन्यू लक्ष्य का आधा से अधिक हिस्सा पहले ही पार कर लिया है। विभाग को उम्मीद है कि दिवाली और नए साल जैसे त्योहारों के आस-पास बिक्री बढ़ने से यह वार्षिक लक्ष्य आसानी से पार हो जाएगा।

नई नीति पर विचार, बिक्री में उछाल
राजस्व में हुई इस बढ़ोतरी को देखते हुए विभाग ने पहले ही सरकारी निगमों द्वारा संचालित 700 से अधिक रिटेल शराब दुकानों को त्योहारी सीजन के लिए पर्याप्त स्टॉक रखने और समय पर ऑर्डर करने के निर्देश दिए हैं। दिलचस्प बात यह है कि VAT को छोड़कर मासिक एक्साइज प्राप्ति में 84.86 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है।
इस बीच दिल्ली सरकार एक नई एक्साइज पॉलिसी लाने की तैयारी में है। PWD मंत्री प्रवेश साहिब सिंह वर्मा की अध्यक्षता में एक हाई लेवल कमेटी इस नीति को अंतिम रूप दे रही है। सरकार का उद्देश्य इस नई नीति को ट्रांसपेरेंट, कंज्यूमर फ्रेंडली और सामाजिक रूप से जिम्मेदार बनाकर राजस्व को और बढ़ाना है।
कीमत निर्धारण और पॉलिसी में बदलाव की जरूरत
समिति की बैठकों में शराब की कीमतों में ठहराव, कानूनी पीने की उम्र, और खुदरा व्यापार में निजी क्षेत्र की भूमिका जैसे कई अहम बिंदुओं पर हितधारकों के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है। एक सूत्र ने बताया कि दिल्ली में एक्साइज टैक्स दरें 2014 से संशोधित नहीं हुई हैं और MRP को भी आखिरी बार तीन साल पहले अपडेट किया गया था।
नई पॉलिसी में प्रति बोतल निश्चित मार्जिन (Fixed Margins) जैसे मुद्दों को संबोधित करने की संभावना है। वर्तमान निश्चित मार्जिन प्रणाली खुदरा विक्रेताओं को सस्ती, कम लोकप्रिय ब्रांडों का स्टॉक करने के लिए प्रोत्साहित करती है, जिससे लोकप्रिय और हाई क्वालिटी वाले ब्रांडों की उपलब्धता कम हो जाती है। समिति जल्द ही नई पॉलिसी का मसौदा लेकर आ सकती है।












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