Delhi Flood: 45 साल पहले जब दिल्‍ली ने बाढ़ के कारण झेली थी भयंकर तबाही, क्‍या अभी फिर से हैं वो ही हालात ?

Delhi Flood: देश की राजधानी दिल्‍ली बाढ़ का कहर झेल रही है। पिछले दो दिनों से भारी बारिश नहीं हुई लेकिन यमुना नदी का प्रलयकारी रूप राजधानीवासियों के लिए खतरा बन चुका है। यमुना नदी का जलस्‍तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच कर पिछले 45 सालों का रिकॉर्ड ब्रेक कर दिया है।

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दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने दिल्‍ली के निचले हिस्‍सों में ना रहने और ना जाने की सलाह दी है। दिल्‍ली ने पिछले कई सालों से बाढ़ का सामना नहीं किया लेकिन इस बार भीषण बाढ़ का सामना कर रही है।

45 साल पहले दिल्‍ली में आई थी प्रलयकारी बाढ़

हालांकि ये पहली बार नहीं है जब दिल्‍ली में बाढ़ का कहर झेल रही है। इससे पहले दिल्ली 1924, 1977, 1978, 1995, 2010 और 2013 में भीषण बाढ़ से जूझ चुकी हैं लेकिन इससे पहले 45 साल पहले जो 1978 में बाढ़ आई थी वो दिल्‍ली की अब तक की सबसे भयानक बाढ़ थी। आइए जानते हैं कि क्‍या इस बार भी दिल्‍ली में 1978 वाले हालात हैं?

क्‍या फिर दिल्‍ली में हैं 1978 वाले हालात?

आखिरी बार 1978 में यमुना का जलस्तर बढ़ने के कारण दिल्‍ली में प्रलयकारी बाढ़ आई थी। इस बार भी यमुना नदी में जलस्‍तर बढ़ने के कारण बाढ़ आई है। इस साल यमुना नदी का जलस्‍तर 207.66 मीटर पर पहुंच चुका है जिसके कारण दिल्‍ली में बाढ़ की स्थिति उत्‍पन्‍न हुई है। इससे पहले 1978 में दिल्‍ली की यमुना नदी का जलस्‍तर 207.49 मीटर पर पहुंच गया था।

2023 में भी मंडरा रहा वो खतरा

वर्तमान समय में दिल्‍ली वो खतरा झेल रही है जो आज से 45 साल पहले यमुना में आई जल प्रलय के कारण राजधानी दिल्‍ली सह चुकी है।

1978 में लाखों लोग हो गए थे बेघर

दिल्‍ली ने 1978 में जो बाढ़ के कारण प्रलय देखी उससे पहले आई किसी बाढ़ में ऐसे हालात नहीं हुए थे। लोगों के घरों में बाढ़ का पानी घुस गया था जिसके कारण लोग बेघर हो गए थे। इस बार भी दिल्‍ली में हजारों लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा है। यमुना का जैसे अभी जलस्‍तर प्रलयकारी हो गया है उस समय भी ऐसा ही हुआ था।

दिल्‍ली में इमरजेंसी जैसे थे हालात

मीडिया रिपेार्ट के अनुसार 1978 में जो दिल्‍ली ने बाढ़ देखी इससे पहले 100 सालों तक ऐसी बाढ़ नहीं देखी थी। देश की राजधानी में आपातकाल जैसी स्थिति हो गई थी सभी क्षेत्रों में सेना को तैनात किया गया था। यमुना के सभी पुलों पर यातायात बंद कर दिया गया था। यमुना दी नदी का पुराना रेलवे पुल खतरे के निशान से 2.50 मीटर ऊपर यमुना नदी बह रही थी और अंत में नदी का जलस्‍तर 207.49-मीटर के खतरे के निशान को छू लिया था।

क्‍यों 1978 में आई थी प्रलयकाली बाढ़?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 1978 में भी हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से लगभग 7 लाख क्‍यूसेक पानी छोड़ा गया था जिसके कारण दिल्‍ली की यमुना में प्रलयकारी बाढ़ आने से पूरी दिल्‍ली पानी-पानी हो गई थी।

45 साल बाद 2023 में दिल्‍ली मे क्‍या इसी वजह से आई है बाढ़

आज 45 साल बाद दिल्‍ली में जो बाढ़ आई है उसका भी कारण हरियाणा का हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी ही है। केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट के अनुसारदिल्‍ली से 180 किलोमीटर दूर हरियाणा के यमुनानगर में स्थित हथिनी कुंड बैराज से जो पानी छोड़ा गया उसके कारण यमुना नदी में जलस्‍तर बढ़ा और प्रलयकारी लहरों के कारण दिल्‍ली पानी-पानी हो गई। अधिकारियों के अनुसार हथिनी कुंड बैराज के पानी को पहुंचने में पहले दो से तीन दिन का समय लगता था लेकिन इस बार बहुत कम समय में दिल्‍ली में बैराज का छोड़ा हआ पानी पहुंच गया।

बैराज का पानी क्‍यों जल्‍दी पहुंचा दिल्‍ली

अधिकारियों के अनुसार इस बाढ़ की वजह यमुना नदी के किनारे हुआ जबरदस्‍त अतिक्रमण है। जिस कारण अनुमान है किहथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए पानी को निकलने के लिए बहुत सकरा रास्‍ता मिला जिस कारण उफान के साथ पानी दिल्‍ली के इलाकों को जलमग्न कर दिया। इसके अलावा यमुना नदी की निचला स्‍तर गाद के ऊपर आ चुका है जिसके कारण दिल्‍ली में बाढ़ आई है।

1978 में 30 गांव पानी में डूब गए थे, 10 करोड़ का हुआ था नुकसान

दिल्‍ली में 1978 में आई प्रलयकारी बाढ़ में 18 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 10 करोड़ का दिल्‍ली को नुकसान झेलना पड़ा था लाखों की संख्‍या में लोग बेघर हो गए थे। उत्‍तरी दिल्‍ली के लगभग 30 गांव इस बाढ़ की भेंट चढ़ गए थे यानी डूब गए थे।

1978 में दिल्‍ली के इन इलाकों में आई थी बाढ़

1978 में यमुना नदी के दाया सीमांत बांध और बाया सीमांत बांध, दोनों तटबंधों में दरार आ गई थी। जिसके कारण दिल्‍ली का सराय काले खां, दिल्ली विश्वविद्यालय, महारानी बाग, आदर्श नगर, मॉडल टाउन, जहांगीरपुरी सिविल लाइन्स, मुखर्जी नगर, किंग्सवे कैंप, ओखला प्रभातिव हुआ था। इसके अलावा दिल्‍ली के नजफगढ़ नाले में भीषण ऊफान आया जिसके कारण दिल्‍ली का उत्तम नगर, जनकपुरी, पंखा रोड, हस्तसाल, नजफगढ़ और विष्णु गार्डन समेत 72 गांव पानी में डूब गए थे।

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