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Delhi Election 2025: दिल्ली में आदर्श आचार संहिता लागू,क्या कर सकते हैं,क्या नहीं? सबकुछ समझिए

Delhi Election 2025: चुनाव आयोग (ECI) ने मंगलवार (7 जनवरी, 2025) को दिल्ली विधानसभा चुनाव कार्यक्रमों की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू हो गई है। आदर्श आचार संहिता चुनाव आयोग की ओर से जारी पूरी गाइडलाइन है, जिसका अब चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने तक राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को पालन करना होता है।

आदर्श आचार संहिता चुनाव आयोग की ओर से जारी एक पूरी गाइडलाइंस है,जिससे चुनाव तारीखों की घोषणा से लेकर चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने तक राजनीतिक दल और उम्मीदवार बंधे होते हैं और उन्हें चुनाव आयोग के प्रति जवाबदेह रहना पड़ता है।

delhi chunav 2025

Delhi Election 2025: चुनाव आयोग के अधिकार

  • आदर्श आचार संहिता के माध्यम से चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत जो अधिकार मिले हुए हैं, उसकी तामील कराने में सहायता मिलती है। भारत में संसदीय और विधान सदनों के चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से करवाने का जिम्मा चुनाव आयोग को ही मिला हुआ है।
  • आदर्श आचार संहिता चुनाव तारीखों और कार्यक्रमों की घोषणा के समय से लेकर चुनाव परिणाम घोषित होने तक लागू रहती है।

Delhi Election 2025: आदर्श आचार संहिता लागू होने पर राजनीतिक दल और उम्मीदवार क्या कर सकते हैं और क्या नहीं कर सकते?

  • राजनीतिक दल विरोधियों की नीतियों, कार्यक्रमों, उनके पिछले रिकॉर्ड और काम के दायरे तक सीमित रहकर उनकी आलोचना कर सकते हैं।
  • आदर्श आचार संहिता के दौरान वोट हासिल करने के लिए जातीय और सांप्रदायिक भावनाएं पैदा करके वोट हासिल करने की कोशिशों पर प्रतिबंध होता है। अपुष्ट जानकारी के आधार पर उम्मीदवारों की आलोचना,उनपर आरोप लगाने, मतदाताओं को धमकाने या रिश्वत देने की मनाही होती है।
  • अगर राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों को कोई सभा करनी होती है तो उन्हें स्थानीय पुलिस प्रशासन को पूर्व सूचना देना जरूरी होता है, ताकि सभी तरह के उचित प्रतिबंध किए जा सकें। बिना अनुमति के ऐसे कार्यक्रम नहीं आयोजित किए जा सकते।
  • अगर दो उम्मीदवार या पार्टियां एक ही मार्ग पर कोई रोडशो जैसा कुछ करना चाह रहे हैं, तो उन्हें पहले ही सूचना देना आवश्यक है। ताकि, इस दौरान कोई संघर्ष होने की स्थिति पैदा न होने पाए।
  • विरोधी दलों और उनके नेताओं के पुतले लेकर चलना या उन्हें जलाने पर इस दौरान प्रतिबंध लगा होता है।

Delhi Election 2025: मतदान वाले दिन आदर्श आचार संहिता में क्या शामिल होता है

  • मतदान वाले दिन मतदाताओं के अलावा राजनीतिक दलों या उम्मीदवारों के सिर्फ उन्हीं एजेंट को बूथ पर जाने की इजाजत मिलती है, जिनके पास चुनाव आयोग से जारी पास होता है।
  • सभी पार्टी कार्यकर्ताओं को इस दौरान अपने साथ अपना पहचान पत्र रखना आवश्यक है।
  • उन कार्यकर्ताओं की ओर से मतदाताओं को जो मतदान वाली पर्ची दी जाती, वह सादे पेपर में होना चाहिए और उसपर किसी तरह के निशान, उम्मीदवार या पार्टी का नाम नहीं होना चाहिए।

Delhi Election 2025: उम्मीदवार या पार्टी कहां रख सकते हैं अपनी समस्या?

  • अगर चुनाव प्रक्रिया के दौरान उम्मीदवारों को किसी तरह की शिकायत होती है तो वह चुनाव आयोग की ओर से तैनात चुनाव पर्यवेक्षकों से संपर्क कर सकते हैं और अपनी समस्या रख सकते हैं। ये पर्यवेक्षक स्वतंत्र रूप से पूरी चुनाव प्रक्रिया पर नजर रखते हैं और चुनाव आयोग को अपनी रिपोर्ट देते हैं।

Delhi Election 2025: सत्ताधारी दलों के लिए नियम

  • आदर्श चुनाव संहिता में सत्ताधारी दलों के लिए खास नियम हैं। चुनाव के दौरान मंत्री चुनाव कार्यों के लिए आधिकारिक मशीनरी का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
  • राजनीतिक दल जनता के पैसे का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के लिए कर सकते। यही नहीं, सत्ताधारी पार्टियां सरकारी मीडिया का भी अपने चुनावी फायदे के लिए उपयोग नहीं कर सकतीं।
  • आदर्श आचार संहिता लागू होने के साथ ही मंत्री और सरकार की ओर से कोई वित्तीय आवंटन की घोषणा नहीं की जा सकती और न ही सड़कों और अन्य निर्माण कार्यों का ही सरकारी तौर पर कोई वादा कर सकते हैं।
  • अगर कोई सार्वजनिक स्थान है या सरकारी गेस्ट हाउस है,तो उसे अन्य दलों को भी उपयोग के लिए अनुमति दी जाएगी, सत्ताधारी का उनपर अकेले का अधिकार नहीं होगा।

Delhi Election 2025: घोषणापत्र के संबंध में आदर्श आचार संहिता

  • राजनीतिक दलों के चुनाव घोषणापत्र में संविधान के आदर्शों और सिद्धांतों के खिलाफ कुछ भी नहीं होना चाहिए।
  • राजनीतिक दलों को ऐसे वादे करने से बचना चाहिए जो चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता नष्ट कर सकते हैं या वोटरों को अनुचित तरह से प्रभावित कर सकते हैं।
  • घोषणापत्रों में किए गए वादों के औचित्य भी बताना चाहिए तथा मोटे तौर पर इसके लिए वित्तीय व्यवस्था को पूरा करने के तरीकों और साधनों के बारे में भी संकेत दिया जाना चाहिए।
  • जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 के अंतर्गत निर्धारित निषेधात्मक अवधि के दौरान घोषणापत्र नहीं जारी किए जा सकते।
  • मतदान के समाप्त होने के बाद तक एग्जिट पोल के नतीजे जारी नहीं किए जा सकते।

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