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Delhi Election 2025: केजरीवाल और AAP के लिए अब यह चुनाव बहुत मुश्किल क्यों हो चुका है? 5 बड़ी वजह

Delhi Election 2025: 5 फरवरी को होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में अबतक सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (AAP) सबसे आगे नजर आ रही थी। दबी जुबान में भाजपा के सूत्र भी इसी तरह का संकेत दे रहे थे। लेकिन, बुधवार (5 फरवरी,2025) को होने वाले मतदान से कुछ दिन पहले दावे के साथ ऐसा कहना मुश्किल लग रहा है। इसकी मुख्य रूप से 5 वजहें नजर आ रही हैं।

शराब घोटाले में कई महीने तिहाड़ जेल में गुजारने के बाद दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जब सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ जमानत पर छोड़ा तो उन्हें मजबूरन इस्तीफा देना पड़ गया। क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत में ऐसी शर्तें लगा दीं कि उनका सीएम पद पर पर रहना बहुत ही कठिन था। लेकिन, आतिशी मार्लेना को सीएम बनाकर जब उन्होंने पार्टी के पक्ष में माहौल बनाना शुरू किया तो लगने लगा कि वह अपनी रणनीति में सफल हो रहे हैं। लेकिन, आज की तारीख में केजरीवाल और आप के लिए रास्ता उतना आसान नहीं रह गया है।

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Delhi Election 2025: 1) बजट में आयकर दाताओं को 12.75 लाख रुपए की इनकम पर पूरी छूट

दिल्ली चुनाव की घोषणा के बाद आम बजट पेश होना था। ऐसे में केंद्र सरकार आदर्श आचार संहिता में बंधी थी और दिल्ली के लिए कोई विशेष घोषणा नहीं कर सकती थी। लेकिन,मोदी सरकार ने कुल मिलाकर 12.75 लाख रुपए तक की आमदनी को नई रिजीम के तहत आयकर से पूरी छूट देकर टैक्सपेयरों को अप्रत्याशित राहत दे दी है, जितना किसी ने सोचा भी नहीं होगा।

2022 के प्राइस सर्वे के अनुसार दिल्ली में 40 लाख इनकम टैक्सपेयर हैं। दिल्ली में अंतिम मतदाता सूची के मुताबिक कुल वोटर 1,56,14,000 हैं।

यही नहीं अनुमान के मुताबिक दिल्ली के 67% परिवार मिडिल क्लास के हैं, जो कि राजधानी का सबसे बड़ा वोट ब्लॉक है। केंद्रीय बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की आयकर में बड़ी राहत की घोषणा के बाद यह मध्यम वर्ग बहुत ही ज्यादा उत्साहित लग रहा है और यह केजरीवाल और उनकी टीम के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन सकती है।

Delhi Election 2025: 2) मिडिल क्लास में दिख रहा है एंटी-इंकंबेंसी का सबसे ज्यादा असर

दिल्ली में हमने अपने पहले कई रिपोर्ट में बताया है कि आम आदमी पार्टी की सरकार को लेकर अगर सबसे ज्यादा एंटी इंकंबेंसी किसी में दिख रही है तो वह मध्यम वर्ग या मिडिल क्लास में है। यही वर्ग दिल्ली की खस्ताहाल सड़कों से भी परेशान है तो यही सीवर की समस्या, कचरे और गंदगी से बेहाल है। इसी वर्ग को गंदे पानी की भी सबसे ज्यादा समस्या है और यही बिजली के अप्रत्याशित बिलों को लेकर भी भड़का हुआ है।

इस वर्ग को खुश करने के लिए ही हाल में केजरीवाल ने केंद्र सरकार से सवाल पूछने शुरू किए थे। लेकिन, केंद्रीय बजट के माध्यम से केंद्र की भाजपा सरकार ने जो दांव चला है, उससे आप की मुश्किलें और बढ़ने की आशंका पैदा हुई है।

Delhi Election 2025: 3) महिला वोटरों में भी बीजेपी और कांग्रेस ने सेंध लगाने का चल दिया है दांव

जिस तरह से फ्री बिजली, पानी का वादा आप सरकार ने पूरा किया और जिस तरह से डीटीसी बसों में महिलाओं की मुफ्त यात्रा की सुविधाएं दीं, उससे दिल्ली की महिला वोटर पूरी तरह से केजरीवाल के पक्ष में गोलबंद दिख रही थीं। चुनाव की घोषणा से पहले आम आदमी पार्टी ने इन्हें हर महीने 2,100 रुपए देने का भी वादा किया।

लेकिन, उसके बाद जिस तरह से कांग्रेस और बीजेपी ने महिलाओं के लिए एक से बढ़कर एक कल्याणकारी योजनाओं का वादा किया है और आप से भी ज्यादा हर महीने 2,500 रुपए देने की बात कही है, उससे आप के पुराने वादे को लेकर उनके मन में दोबारा सोचने की वजह पैदा हुई है।

क्योंकि, विरोधी आप पर पंजाब में महिलाओं से किए गए इसी तरह के वादे पूरा नहीं करने का भी आरोप लगा रहे हैं, जबकि बीजेपी ने अपनी सरकारों वाले तमाम राज्यों में यह पूरा करके दिखाया है। वहीं भले ही कर्नाटक में अपने ही मंत्रियों का भरोसा डोल रहा हो, लेकिन कांग्रेस भी इसी तरह के वादे को पूरा करने को अपने रिकॉर्ड के तौर पर पेश कर रही है।

Delhi Election 2025: 4) केजरीवाल के चेहरे पर चुनाव का मतलब?

आम आदमी पार्टी (AAP) इस चुनाव में केजरीवाल को अपना चेहरा बता रही है और यही दावा किया जा रहा है कि पार्टी की जीत पर वही मुख्यमंत्री बनेंगे। लेकिन, सवाल है कि अगर आप जीतती भी ह2 तो इससे केजरीवाल के मुख्यमंत्री बनने के लिए परिस्थितियां कैसे बदलेंगी?

सुप्रीम कोर्ट की शर्तों में कैसे बदलाव हो जाएगा? बीजेपी और कांग्रेस यही बातें वोटरों तक पहुंचा रही हैं और आम आदमी पार्टी को भी मतदाताओं को इस सवाल का जवाब देना भारी पड़ सकता है कि जब केजरीवाल सीएम बनने के लिए पात्र हैं ही तो फिर इस्तीफे की क्यों जरूरत पड़ गई थी?

Delhi Election 2025: 5) भ्रष्टाचार और घोटाले के आरोप

आम आदमी पार्टी पूरे दमखम के साथ चुनाव लड़ रही है। लेकिन, यह भी उतना ही सच है कि केजरीवाल से लेकर इसके तमाम बड़े नेताओं पर घोटालों और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं और ये लोग सिर्फ तकनीकी वजहों से जमानत पर छूटे हुए नेता हैं।

ऐसे में मतदाताओं का एक बहुत बड़ा वर्ग है जो इनके इस दावे को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है कि यह सब केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी का किया हुआ है। क्योंकि, अगर इन्हें सिर्फ फंसाया गया होता तो सुप्रीम कोर्ट को जमानत देने में इतनी कठोर शर्तें नहीं लगानी पड़ती?

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