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पुजारियों-ग्रंथियों को 18000 देने का वादा करके कौन सा कार्ड खेल रही है AAP? क्या दिल्ली चुनाव में होगा फायदा?

Delhi Election 2025: दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सोमवार (30 दिसंबर) को एक बड़ी घोषणा की है। अरविंद केजरीवाल ने वादा किया है कि अगर आम आदमी पार्टी (आप) आगामी चुनावों में सत्ता में वापस आती है तो मंदिरों के पुजारियों और गुरुद्वारों के ग्रंथियों को 18,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाएगा।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, "पुजारी और ग्रंथी हमारे धार्मिक रीति-रिवाजों के संरक्षक रहे हैं, जो निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करते हैं। दुर्भाग्य से, किसी ने कभी भी उनकी वित्तीय भलाई का ध्यान नहीं रखा।'' उन्होंने कहा,''देश में ऐसा पहली बार हो रहा है। लेकिन दुर्भाग्य है कि आज तक किसी ने उनकी तरफ ध्यान नहीं दिया है।''

Arvind Kejriwal News

अरविंद केजरीवाल ने कहा- योजना के लिए कल से शुरू होगा रजिस्ट्रेशन

केजरीवाल ने कहा कि योजना के लिए पंजीकरण कल से शुरू होगा और वह खुद हनुमान मंदिर में जाकर इसकी शुरुआत करेंगे। उन्होंने कहा, "मैं भाजपा से अनुरोध करता हूं कि पंजीकरण प्रक्रिया में बाधा न डालें। इसे रोकना पाप करने के समान होगा क्योंकि वे भगवान तक हमारा पुल हैं।"

Delhi Chunav 2025: दिल्ली चुनाव में क्या AAP को होगा इससे फायदा?

अरविंद केजरीवाल की यह घोषणा दिल्ली के लोगों के लिए उनकी कल्याणकारी योजनाओं की अगली कड़ी है। उन्होंने पहले वरिष्ठ नागरिकों के लिए संजीवनी योजना, फिर महिला सम्मान योजना और अब पुजारियों के लिए मासिक वेतन योजना की घोषणा की है।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने पुजारियों और ग्रंथियों को 18000 रुपये प्रति माह देने का वादा को लेकर ने दावा किया है कि यह पुजारियों-ग्रंथियों की मेहनत और समर्पण को सम्मान देने के लिए किया गया है।

इस योजना के तहत AAP ने यह सुनिश्चित करने का वादा किया है कि पुजारियों और ग्रंथियों को उनकी सेवा के लिए एक स्थिर और सम्मानजनक आमदनी मिले।

AAP का यह कदम चुनावी रणनीति के तहत देखा जा रहा है, जिसमें पार्टी अपनी चुनावी पकड़ को मजबूत करने के लिए विभिन्न वर्गों को लुभाने की कोशिश कर रही है। आप पार्टी धार्मिक समुदायों को लुभाने का प्रयास कर रही है। इस तरह के वादे से पार्टी अपने समर्थकों को और धार्मिक समुदायों को आकर्षित करने का प्रयास कर रही है।

हालांकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि यह कदम केवल चुनावी लाभ लेने के लिए उठाया गया है और इसे एक "धार्मिक कार्ड" के रूप में देखा जा रहा है। विपक्षी पार्टियां इसे एक चुनावी चाल मानते हुए सवाल उठा रही हैं कि क्या यह वादा केवल चुनावी लाभ के लिए किया गया है, या इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य है।

क्या AAP हिंदू वोटरों को लुभाने की कर रही है कोशिश?

दिल्ली चुनावों में AAP ने हिंदू वोटरों को लुभाने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं, जो उसकी चुनावी रणनीति का हिस्सा माने जा रहे हैं। पार्टी ने हिंदू धर्म के प्रतीकों और धार्मिक नेताओं के प्रति अपनी नजदीकी को बढ़ावा देने की कोशिश की है, ताकि हिंदू मतदाताओं का समर्थन हासिल किया जा सके। पुजारियों और ग्रंथियों को 18,000 रुपये प्रति माह देने का वादा भी इसी रणनीति का हिस्सा है।

इतना ही नहीं AAP ने मंदिरों और धार्मिक स्थलों को विकास के लिए बजट आवंटित करने की भी बात की है, ताकि उनकी मरम्मत और साज-सज्जा की जा सके। यह कदम धार्मिक समुदाय को आकर्षित करने के लिए है। चुनाव से पहले पार्टी के नेता और विधायक विभिन्न हिंदू त्योहारों में सक्रिय रूप से भाग लेते हैं और उन आयोजनों में शामिल होते हैं।

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