दिल्ली की हवा दिवाली के एक दिन बाद सबसे साफ ! 2015 के बाद हुआ पहली बार, जानिए कैसे हुआ यह संभव

हर वर्ष दिवाली की अगली सुबह दिल्ली में प्रदूषण बढ़ जाता है। लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं है। 2015 के बाद पहली बार है जब दिल्ली की हवा साफ है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के डाटा के मुताबिक दिवाली के दिन AQI (वायु गुणवत्ता सूचकांक) 312 था, जबकि मंगलवार को यह 303 था जो पिछले कई वर्षों की अपेक्षा कम था। सीपीसीबी के आंकड़ों के मुताबिक 2015 के बाद से हवा की गुणवत्ता सबसे ज्यादा खराब पिछले वर्ष यानि कि 2021 में थी। पिछले वर्ष दिवाली के एक दिन बाद AQI 462 दर्ज किया गया था। वहीं, दिवाली के दिन AQI 382 था। इतने ज्यादा AQI को सबसे गंभीर श्रेणी में माना जाता है। इस बार वायु प्रदूषण कम होने के कई कारक जिम्मेदार हैं। ऐसे मे आइए जानते हैं उन कारकों को.........

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मौसम की स्थिति

मौसम की स्थिति

मौसम की स्थिति ने इस बार हवा की गुणवत्ता में सुधार करने में अहम भूमिका निभाई। SAFAR के फाउंडर प्रोजेक्ट डॉयरेक्टर गुफरान बेग की मानें तो हवा की गति ने इस बार प्रदूषण को एकत्रित नहीं होने दिया। इस वर्ष दिवाली पर भी तापमान गर्म था। उन्होंने कहा कि हवा की गति मंगलवार सुबह दो बजे के करीब तेज हो गई। ऐसे में सुबह प्रदूषक तत्व जमा नहीं पाए। क्योंकि जब तापमान ठंडा होता है और हवा नहीं चलती है तो प्रदूषक तत्व जमा हो जाते हैं। यही वजह थी कि इस बार सुबह 323 AQI दर्ज किया गया।

पिछले वर्ष की अपेक्षा कम हुई आतिशबाजी

पिछले वर्ष की अपेक्षा कम हुई आतिशबाजी

गुफरान बेग के मुताबिक पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष आतिशबाजी भी कम हुई। क्योंकि इस वर्ष पटाखों पर बैन लगाया गया था। हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि अभी तक पटाखों के फोड़ने को लेकर सही जानकारी नहीं सामने आ पाई है। ऐसे में यह नहीं बताया जा सकता है पिछले वर्ष की अपेक्षा यह कितना कम है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि हो सकता है कि इस बार लोगों ने ऐसे पटाखों को फोड़ा हो जो कम जहरीले थे।

हरियाणा और पंजाब में इस वर्ष पराली भी कम जली

हरियाणा और पंजाब में इस वर्ष पराली भी कम जली

गुफरान बेग के मुताबिक पंजाब और हरियाणा में इस वर्ष पराली भी कम जलाई गई। गुफरान बेग के मुताबिक हवा सोमवार से दिल्ली के पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम दिशा से चल रही थी। यही वजह थी कि यह पराली के धूएं के अनुकूल नहीं थी। SAFAR फोरकास्टिंग सिस्टम के आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार को दिल्ली में पराली जलाने का प्रतिशत पीएम 2.5 के स्तर पर करीब 5.6 फीसदी था।। वहीं, पिछले वर्ष दिवाली के दिन पराली के धुएं का योगदान 25% थी और दिवाली के अगले दिन यह 36 प्रतिशत हो गया था।

दिवाली पहले पड़ी इसलिए भी प्रदूषण हुआ कम

दिवाली पहले पड़ी इसलिए भी प्रदूषण हुआ कम

रिसर्च-एडवोकेट सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनुमिता की मानें तो इस वर्ष प्रदूषण इसलिए भी नहीं बढ़ा, क्योंकि दिवाली पिछले वर्ष की अपेक्षा जल्दी आ गई। इस वर्ष दिवाली 25 अक्टूबर को थी, जबकि पिछले वर्ष नवंबर में थी। दिवाली के जल्दी आने की वजह से मौसम भी गर्म है और हवा भी तेज चल रही है। वहीं, इस बार पराली भी पिछले वर्षों की अपेक्षा कम जली। यही वजह है कि प्रदूषण इस वर्ष कम है। वहीं, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के आंकड़ों की मानें तो पंजाब में 15 सितंबर से 25 अक्टूबर तक पराली जलाने के 5798 मामले दर्ज किए गए। यह पिछले साल 25 अक्टूबर तक दर्ज 6,134 के आंकड़े से कम है। शायद यही वजह है कि इस वर्ष हवा ज्यादा खराब नहीं हुई।

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