Arvind Kejriwal Tension: सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई, फिर भी मुश्किलों में घिरे हैं केजरीवाल, जानें कैसे?
Arvind Kejriwal Sore Spot: हरियाणा और जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव 2024 का बिगुल बज चुका है, और आम आदमी पार्टी (AAP) इस चुनावी रण में अकेले ही उतरी है। इस बीच, 13 सितंबर 2024 को दिल्ली के मुख्यमंत्री और आप प्रमुख अरविंद केजरीवाल को कथित दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है।
कोर्ट ने उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) के बाद अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के मामले में भी जमानत दे दी है। माना जा रहा है कि केजरीवाल 13 सितंबर की शाम तक तिहाड़ जेल से बाहर आ सकते हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने CBI की गिरफ्तारी को वैध ठहराया है और जमानत की शर्तें तय की हैं। केजरीवाल को कोर्ट से जमानत मिल गई है, लेकिन उन पर लगे आरोपों और कानूनी प्रक्रिया के चलते उनकी मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं।

क्या-क्या हैं मुश्किलें और जमानत की शर्तें?
- दस्तखत पर रोक: केजरीवाल किसी भी सरकारी फाइल पर दस्तखत नहीं कर सकते, जब तक यह बहुत आवश्यक न हो।
- कार्यालय जाने पर पाबंदी: वे मुख्यमंत्री कार्यालय या सचिवालय नहीं जा सकेंगे।
- कोई बयान नहीं दे सकते: वे इस मामले से जुड़े किसी भी मुद्दे पर बयान या टिप्पणी नहीं कर सकते।
- गवाहों से संपर्क नहीं: इस मामले के किसी भी गवाह से संपर्क करने की अनुमति नहीं है।
- फाइलों का निरीक्षण नहीं कर सकते: इस केस से जुड़ी किसी भी सरकारी फाइल को नहीं देख सकते।
- ट्रायल में सहयोग: उन्हें जब भी जरूरत होगी, ट्रायल कोर्ट में पेश होना होगा और जांच में सहयोग करना होगा।
- जमानत बॉन्ड: केजरीवाल को 10 लाख का बॉन्ड भरना होगा।
रिहाई के बावजूद कम नहीं हुईं मुश्किलें
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है, लेकिन केजरीवाल की मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं। जमानत की शर्तों के चलते वे नीतिगत फैसले नहीं ले पाएंगे और सरकार चलाने में उन्हें दिक्कतें होंगी। उदाहरण के तौर पर, महिलाओं के लिए प्रति महीने 1000 रुपये की योजना अब तक लागू नहीं हो पाई है।

क्यों फंसे थे केजरीवाल?
केजरीवाल कथित दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसे हैं। नवंबर 2023 से मार्च 2024 तक, उन्हें ED ने 9 बार समन भेजा था, लेकिन केजरीवाल पूछताछ में शामिल नहीं हुए। इसके बाद, 21 मार्च 2024 को ED ने उन्हें गिरफ्तार किया और 1 अप्रैल को तिहाड़ जेल भेज दिया। फिर 26 जून को CBI ने भी उन्हें अरेस्ट कर लिया, जिसके बाद उनका जेल में रहना जारी रहा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBI द्वारा केजरीवाल की गिरफ्तारी वैध थी और इसमें कोई प्रक्रियात्मक गड़बड़ी नहीं थी। कोर्ट ने यह भी कहा कि CBI को जांच के लिए उन्हें हिरासत में लेने की जरूरत थी।
- हालांकि, जस्टिस उज्जवल भुइयां ने इस पर मतभेद जताया और कहा कि CBI की गिरफ्तारी अनुचित थी। उनका मानना था कि जब ED ने केजरीवाल को जमानत दी थी, तब CBI की गिरफ्तारी केवल उनकी रिहाई में बाधा डालने के लिए की गई थी।
जुलाई में ED ने पहले ही दे दी थी जमानत
- आपको बता दें कि, जुलाई 2024 में उन्हें ED के मामले में जमानत मिल गई थी, लेकिन इसके बाद CBI ने उन्हें उसी नीति से जुड़े अन्य भ्रष्टाचार मामले में गिरफ्तार कर लिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी, लेकिन केस की सुनवाई अभी भी जारी है। केजरीवाल और उनकी पार्टी ने इन आरोपों को "राजनीतिक रूप से प्रेरित" बताया है।
- यह केस बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ा संकट है, और इस मामले को लेकर राजनीतिक और कानूनी बहस काफी समय से जारी है।
क्या केजरीवाल सिर्फ चुनाव प्रचार तक सीमित रहेंगे?
जमानत की शर्तों के अनुसार, केजरीवाल सरकार से जुड़े फैसलों में भाग नहीं ले पाएंगे, जिससे वे चुनाव प्रचार तक ही सीमित रह सकते हैं। इसके अलावा, वे किसी नीतिगत निर्णय या महत्वपूर्ण सरकारी कार्यों में भागीदारी नहीं कर पाएंगे।
बीजेपी के आरोप और AAP का रुख
भाजपा का कहना है कि केजरीवाल और उनकी पार्टी भ्रष्टाचार में लिप्त हैं और अब कानूनी प्रक्रिया में फंस चुके हैं। वहीं, AAP का दावा है कि केजरीवाल को राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया है। AAP ने इसे बीजेपी की चाल बताते हुए कहा कि इस मामले में केजरीवाल निर्दोष हैं।












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