Delhi Blast Update: NIA जांच में सामने आया ‘सबसे कट्टर डॉक्टर’, उम्मर था मॉड्यूल का खूंखार आतंकी चेहरा
Delhi Blast Update: दिल्ली के रेड फोर्ट कार ब्लास्ट की जांच हर दिन नए खुलासे कर रही है। श्रीनगर में जांच कर रही एजेंसियों का कहना है कि विस्फोटक से भरी ह्यूंडई i20 कार चलाने वाला डॉक्टर उम्मर उन-नबी इस पूरे "व्हाइट कॉलर टेरर नेटवर्क" का सबसे ज्यादा कट्टर सदस्य था। जांच में सामने आया है कि उम्मर आत्मघाती हमलों को सही मानता था और खुद को "शहीद" की तरह पेश करना चाहता था।
यह शक तब और पुख्ता हो गया जब एजेंसियों ने उसके एक टूटे हुए मोबाइल से एक वीडियो निकाला। इस वीडियो में उम्मर साफ तौर पर आत्मघाती हमलों का समर्थन करता दिख रहा है। इससे संकेत मिलता है कि वह खुद तो कट्टरपंथी था ही, साथ ही दूसरों को भी इसी रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहा था।

मोबाइल वीडियो ने रखा पूरा मॉड्यूल जांच के घेरे में
1 मिनट 20 सेकंड का यह क्लिप अप्रैल का बताया जा रहा है जिसमें उम्मर उन-नबी कमरे में अकेले अंग्रेजी में बोलते हुए आत्मघाती हमलों का समर्थन करता दिख रहा है। यह वीडियो पुलवामा के कोइल क्षेत्र में उसके घर के पास पानी में फेंके गए एक फोन से फॉरेंसिक टीम ने रिकवर किया। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के अनुसार, नबी ने यह फोन अपने भाई जहूर इलाही को सितंबर-अक्टूबर के दौरान दिया था और निर्देश दिया था कि यदि उसके बारे में किसी "बड़ी खबर" की सूचना मिले, तो फोन को नष्ट कर दिया जाए।
जहूर की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में यह जानकारी सामने आई, जिसके बाद फोन को बरामद कर गंभीर नुकसान के बावजूद डेटा रिकवर किया गया। अब यह वीडियो जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है और एजेंसियाँ यह पता लगा रही हैं कि नबी ने यह वीडियो क्यों रिकॉर्ड किया था और क्या इसके जरिए वह अन्य सदस्यों को भी कट्टर बनाने की कोशिश कर रहा था।
NIA की पुष्टि, उमर ही था आत्मघाती हमलावर
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पुष्टि की कि फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी का डॉक्टर उम्मर उन-नबी ही वह आत्मघाती हमलावर था जिसने 10 नवंबर को रेड फोर्ट के पास विस्फोट किया। इस हमले में कम से कम 12 लोगों की मौत हुई थी। डीएनए जांच ने नबी की पहचान की पुष्टि की जिसमें ब्लास्ट साइट से मिले नमूनों का मिलान उसकी मां के नमूनों से हुआ। इसके बाद उसके दो भाइयों और मां को हिरासत में ले लिया गया।
जांच में सामने आया है कि नबी हमले के वक्त कम से कम दो मोबाइल फोन इस्तेमाल कर रहा था। एजेंसियाँ यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसके पास कुल कितने फोन और कितने सिम कार्ड थे।
"व्हाइट कॉलर" टेरर मॉड्यूल का विस्तार
अब तक तीन डॉक्टर डॉ. मुझम्मिल गनई, डॉ. शहीन शाहिद, डॉ. अदील रदर को गिरफ्तार किया जा चुका है। रदर का भाई डॉ. मुझ्जफर अफगानिस्तान में होने का संदेह है और एजेंसियों को शक है कि वह भी इस नेटवर्क का हिस्सा है। इसके अलावा डॉ. निसार-उल-हसन, जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी में नबी और अन्य डॉक्टरों के साथ काम करता था, भी जांच के रडार पर है। कई अन्य डॉक्टरों से भी पूछताछ की जा चुकी है।
फॉरेंसिक टीमें यह भी जांच कर रही हैं कि क्या यह समूह 2019 पुलवामा हमले की तर्ज पर VBIED (Vehicle-Borne IED) हमले को दोहराने की कोशिश कर रहा था। पुलवामा में कार में विस्फोटक भरकर CRPF की बस से टकराया गया था, जिसमें 39 जवान शहीद हुए थे।
क्यों बढ़ी एजेंसियों की चिंता?
पूर्व जम्मू-कश्मीर पुलिस प्रमुख एस.पी. वैद ने कहा कि नबी के जैसे वीडियो घाटी में युवा लड़कों को "ब्रेनवॉश" करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि शिक्षित पेशेवरों-खासकर डॉक्टरों-का आत्मघाती हमलों के लिए तैयार होना बेहद चिंताजनक संकेत है। उनके अनुसार ऐसे मामलों में समाज के नेताओं और समुदायों को सक्रिय रूप से आगे आकर कट्टरता के खिलाफ भूमिका निभानी होगी।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि विस्फोटक कहां से लाए गए? इतनी गाड़ियों की व्यवस्था किसने की? साजिश के पीछे कौन-सी बड़ी विदेशी हैंडलिंग थी? क्या 2019 पुलवामा का मोडस ऑपरेंडी दोहराने की प्लानिंग थी? हमले के बाद की छानबीन कई राज्यों दिल्ली, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और उत्तर प्रदेश - तक फैल चुकी है।
जांच आगे बढ़ने के साथ यह केस भारत में "व्हाइट कॉलर टेरर" की सबसे बड़ी साजिशों में से एक के रूप में उभर रहा है, जिसमें डॉक्टरों जैसे उच्च शिक्षित लोगों की भूमिका सामने आना सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है।












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