Delhi AQI Today: अभी और बिगड़ेंगे दिल्ली-एनसीआर के हालात, एयर क्वालिटी में नहीं हो रहा कोई सुधार
Delhi AQI Today: दिल्ली की हवा एक बार फिर ज़हर बन चुकी है। नवंबर की शुरुआत के साथ ही राजधानी पर धुंध और धुएं की चादर छाने लगी है। शनिवार को हवा की गुणवत्ता इतनी बिगड़ी कि दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 'बहुत खराब' श्रेणी में पहुंच गया।
हर साल की तरह इस बार भी नवंबर का पहला सप्ताह दिल्ली के लिए सांस लेने की सबसे मुश्किल समय बनने जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में हालात और खराब हो सकते हैं, क्योंकि पराली जलाने का चरम दौर अभी शुरू ही नहीं हुआ है। वहीं, मौसम की ठंडी और स्थिर हवाएं प्रदूषकों को जमीन के पास फंसा रही हैं, जिससे दिल्ली की हवा में घुटन और बढ़ गई है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के अनुसार, दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 303 दर्ज किया गया, जो शुक्रवार को 218 था। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल राहत की कोई उम्मीद नहीं है, क्योंकि नवंबर का पहला पखवाड़ा हर साल की तरह इस बार भी सबसे ज्यादा प्रदूषित रहने वाला है।
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नवंबर का पहला पखवाड़ा सबसे ज्यादा प्रदूषित
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के विश्लेषण के मुताबिक, हर साल 1 से 15 नवंबर के बीच राजधानी में प्रदूषण अपने चरम पर रहता है। 2018 से 2023 के बीच इस अवधि में औसत AQI 371 रहा है। इस दौरान खेतों में पराली जलाने, भारी ट्रैफिक और मौसम की प्रतिकूल स्थितियों के कारण प्रदूषक कण जमीन के पास जमा हो जाते हैं, जिससे हवा बेहद जहरीली बन जाती है।
पिछले साल नवंबर में दिल्ली में आठ दिन ऐसे रहे जब वायु गुणवत्ता 'गंभीर' (Severe) श्रेणी यानी 400 से ऊपर चली गई थी। इनमें से छह दिन नवंबर के पहले पंद्रह दिनों में ही दर्ज किए गए थे।
इस बार पराली जलाने में देरी, फिर भी हवा खराब
सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) के संस्थापक और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडीज (NIAS) के प्रोफेसर गुफ़रान बेग ने बताया कि इस साल पंजाब में बाढ़ की वजह से पराली जलाने में लगभग एक हफ्ते की देरी हुई है।
उन्होंने कहा, "आम तौर पर 1 से 15 नवंबर का समय सबसे ज्यादा प्रदूषित होता है, लेकिन इस बार पराली जलाने की चरम स्थिति अभी आई नहीं है। फिलहाल मौसम भी बहुत ठंडा नहीं हुआ है, जो कुछ हद तक राहत देने वाला कारक है, क्योंकि कम तापमान प्रदूषकों के फैलाव को और धीमा कर देता है।"
स्थानीय प्रदूषण के स्रोत बने बड़ी चुनौती
केंद्र फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (CSE) की कार्यकारी निदेशक (रिसर्च एंड एडवोकेसी) अनुमिता रॉय चौधरी ने कहा कि मौजूदा प्रदूषण में पराली की भूमिका बहुत कम है। "शुक्रवार को दिल्ली की PM2.5 मात्रा में पराली जलाने की हिस्सेदारी केवल 1.6% रही। यह दर्शाता है कि प्रदूषण के मुख्य कारण स्थानीय हैं-जैसे वाहन उत्सर्जन, निर्माण कार्य से उड़ती धूल और कचरा जलाना।" उन्होंने कहा, "दिल्ली को सिर्फ मौसमी नहीं, बल्कि सालभर लगातार प्रदूषण नियंत्रण उपायों की जरूरत है।"
आने वाले दिनों में राहत की उम्मीद नहीं
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आने वाले एयर क्वालिटी अर्ली वॉर्निंग सिस्टम ने चेतावनी दी है कि 2 नवंबर से 10 नवंबर तक दिल्ली की हवा 'बहुत खराब' श्रेणी में ही बनी रहेगी। किसी बड़े सुधार की संभावना नहीं है।
DPCC के आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 15 से 31 के बीच का समय दूसरा सबसे प्रदूषित पखवाड़ा रहता है, जब औसत AQI 354 होता है। यह समय सर्दी, कोहरे, बढ़े हुए यातायात और त्योहारों की वजह से प्रदूषण बढ़ने का होता है। जनवरी 1 से 15 के बीच तीसरा सबसे प्रदूषित दौर रहता है, जबकि जुलाई-अगस्त में बारिश के कारण हवा सबसे साफ होती है।
दिल्ली वालों के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली-एनसीआर में फिलहाल लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। बुजुर्ग, बच्चे और सांस की बीमारियों से जूझ रहे लोग सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें। साथ ही वाहन उत्सर्जन कम करने और खुले में कचरा जलाने से रोकने की सख्त जरूरत है, ताकि प्रदूषण की यह भयावह स्थिति और न बढ़े।
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